
पशु चिकित्सा की आधुनिक तकनीक को बढ़ावा मिले
डॉ. विष्णु शर्मा
पूर्व कुलपति, राजस्थान पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय
भा रत दुग्ध उत्पादन में गत 25 वर्ष से विश्व में प्रथम स्थान पर बना हुआ है। पूरे विश्व के कुल दूध उत्पादन के लगभग एक चौथाई हिस्से का उत्पादन भारत ही करता है। इस वर्ष राजस्थान प्रांत पूरे देश में प्रथम स्थान पर आया है। इस महान लक्ष्य की प्राप्ति में महती योगदान सुदूर गांव-ढाणी तक पशु चिकित्सा की विभिन्न विधाओं व तकनीकों का पहुंचना है। कृत्रिम गर्भाधान, उन्नत नस्ल, संतुलित आहार व रोगों की रोकथाम आदि के जरिये पशुओं का ध्यान रखा जा रहा है। पशुपालन, ग्रामीण अर्थव्यवस्था की जीवन रेखा बन कर ग्रामीणों का संबल प्रदान कर रहा है।
कोविड महामारी के बाद पशुओं से जुड़े रोगों के प्रति पूरे विश्व में जागरूकता और सतर्कता का संचार हुआ है। संयुक्त राष्ट्र के चार महत्त्वपूर्ण संगठनों (विश्व स्वास्थ्य संगठन, खाद्य व कृषि संगठन, पशु स्वास्थ्य वैश्विक संगठन व संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम) द्वारा वन हेल्थ इनिशिएटिव की स्थापना की गई है, जिसका मुख्य कार्य मानव पशु-वातावरण के मध्य कार्यरत विभिन्न घटकों का प्रभाव और आकलन करना है। संयुक्त राष्ट्र के 17 सस्टेनेबल डवलपमेंट उद्देश्यों की धुरी में भी पशु चिकित्सा विधाओं के भिन्न-भिन्न आयाम हंै। पशु फार्म पर उत्पादित दूध, मांस, अंडा आदि उत्पाद उपभोक्ता की टेबल तक किस प्रकार विभिन्न संक्रमणों व रोगाणुओं से मुक्त होकर पहुंच सकें, यह सुनिश्चित करना आवश्यक है।
शहरी क्षेत्रों में बढ़ती आबादी के बीच संयुक्त परिवारों का विघटन और एकल परिवारों में बढ़ोतरी हो रही है। लोग श्वान, बिल्ली आदि जानवरों को परिवार में सदस्य के रूप मे रख रहे हंै। ये सह-सदस्य मनोरंजन ही नहीं कर रहे, बल्कि एकान्तता के कारण उत्पन्न मानसिक अवसाद व अन्य रोगों को दूर करने में सकारात्मक प्रयोग के रूप में उपयोगिता सिध्द हो रहे हैं। इन पारिवारिक साथी पशुओं के स्वास्थ्य की सुरक्षा भी पशु चिकित्सक संवेदनशीलता से करते हैं। मानव के लिए उपलब्ध उन सभी आधुनिक तकनीकों जैसे सोनोग्राफी, सी.टी.स्कैन, लेप्रोस्कोपी डायलिसिस, कॉर्डियक मोनिटर आदि द्वारा इन पशुओं का इलाज किया जाता है। इससे एकल परिवारों में खुशी उमंग व सुरक्षा की भावना का संचार होता है। शहरीकरण के युग में पशुचिकित्सा के इस आयाम में नित नई संभावनाएॅ पनप रही है।
वन्य जीव संरक्षण व जैव विविधता में पशु चिकित्सकों का योगदान सर्वविदित है। साथ ही पशुओं के वैज्ञानिक प्रबंधन से जलवायु परिवर्तन पर अनुकूल प्रभाव पूर्णत: प्रामाणिक है। तेजी से बदलते वैश्विक परिदृश्य व विश्व व्यापार संगठन की मुक्त बाजार अवधारणा को ध्यान मे रखते हुए, विभिन्न देशों की सीमाओं से आने वाले पशु खाद्य उत्पाद, भिन्न पशु प्रजातियां व रोगाणु-विषाणु आदि पर पशु चिकित्सक निगरानी रखते हैं। वे प्रहरी के रूप में पूरी सतर्कता रखकर अपने कत्र्तव्य का निर्वहन करते हंै। आधुनिक युग की सेंसर, डिजिटल, एआइ व सैटेलाइट तकनीकों के समावेश से पशु चिकित्सा विधाओं को नया आयाम प्रदान किया जा सकता है, वहीं देशी गौवंश उत्पाद, जैविक पशुपालन, एंटीबायोटिक व रसायन रहित उत्पादों का परंपरागत ज्ञान के समावेश से विकसित करने की अपार संभावना है।
विश्व पशु चिकित्सा दिवस अपे्रल के अंतिम शनिवार को पशु चिकित्सकों के महत्व और पशु स्वास्थ्य, कल्याण और सार्वजनिक स्वास्थ्य में उनके योगदान के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए मनाया जाता है। इस वर्ष विश्व पशु चिकित्सा दिवस की थीम पशु चिकित्सा पेशे में विविधता, समानता और समावेशिता को बढ़ावा देना है। यह पशु चिकित्सकों की कड़ी मेहनत और समर्पण को पहचानने और उनकी सराहना करने का एक अवसर है। सुदूर गांव से लेकर आधुनिक शहर तक पशु चिकित्सकों ने अपनी सार्थकता सिद्ध कर दी है। अब शिक्षाविदों व नीति धारकों को चाहिए कि वे पशु चिकित्सा में विशेषज्ञता को प्रोत्साहन देते हुए आधुनिक विधाओं से युक्त गुणवत्तापूर्ण पशु चिकित्सा शिक्षा व प्रशिक्षण पद्धति को बढ़ावा देने पर ध्यान दें।
Published on:
28 Apr 2023 09:32 pm
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