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पुलिस आधुनिकीकरण निधि के लिए शर्त पर सवाल

एक समाधान संविधान में संशोधन कर और पुलिस को 'समवर्ती सूची' में लाना हो सकता है। इससे केंद्र को पूरे देश के लिए एक समान नया पुलिस अधिनियम बनाने में मदद मिलेगी, वह भी राज्यों पर बोझ डाले बिना।

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Patrika Desk

Apr 21, 2022

पुलिस आधुनिकीकरण निधि के लिए शर्त पर सवाल

पुलिस आधुनिकीकरण निधि के लिए शर्त पर सवाल

आर.के. विज
लेखक छत्तीसगढ़ के
पूर्व विशेष पुलिस
महानिदेशक हैं
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने हाल ही में राज्यों को पुलिस बल में महिलाओं का प्रतिनिधित्व 33 प्रतिशत तक बढ़ाने के लिए कहा है। ऐसा न होने पर पुलिस आधुनिकीकरण निधि गैर-अनुपालन वाले राज्यों को जारी नहीं की जाएगी। वर्तमान में महिलाएं पूरे पुलिस बल का लगभग 10.3 प्रतिशत हैं और बिहार को छोड़कर, किसी अन्य राज्य में महिलाओं का 20 प्रतिशत से अधिक प्रतिनिधित्व नहीं है। संविधान की सातवीं अनुसूची में पुलिस राज्य का विषय होने के कारण, पुलिस सुधारों का कार्यान्वयन मुख्य रूप से मात्र राज्यों की चिंता का विषय बना हुआ है। हालांकि, गृह मंत्रालय ने उन राज्यों को वित्तीय प्रोत्साहन देने की एक योजना (वर्ष 2018-19 में) शुरू की (शुरुआत में कुल आधुनिकीकरण निधि का 10 प्रतिशत और फिर 20 प्रतिशत), जिन्होंने गृह मंत्रालय के सुझाव के अनुसार एक संतोषजनक स्तर तक पुलिस सुधारों को लागू किया। महिला पुलिस का नियमित पुलिस में विलय एक सुधार था। इसी प्रकार, यद्यपि पुलिस भर्ती बोर्ड की स्थापना भी ऐसा ही एक और सुधार था। कई राज्यों ने इसे लागू करने में ज्यादा उत्साह नहीं दिखाया। नतीजतन, कई राज्यों को इस योजना का लाभ नहीं मिल सका।
वस्तुस्थिति यह है कि पुलिस आधुनिकीकरण कोष की धनराशि धीरे-धीरे कम होती गई है। इस केंद्र प्रायोजित योजना में केंद्र की हिस्सेदारी भी 2012-13 से 75 प्रतिशत से घटकर 60 प्रतिशत हो गई है। यदि धन का समय पर उपयोग नहीं किया जाता है, तो अगले वर्ष के लिए आवंटन अव्ययित राशि के बराबर कम कर दिया जाता है। राज्यों द्वारा इन निधियों की स्वीकृति देने और पुलिस द्वारा उपयोग करने में भी आमतौर पर विभिन्न प्रशासनिक बाधाओं के कारण देरी होती है। अधिकांश पुलिस सुधार राज्य सरकार के क्षेत्राधिकार में आते हैं, उनके कार्यान्वयन में इनकार या देरी से पुलिस संगठन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। पिछले आयोगों की सिफारिशों पर विचार करने के बाद समीक्षा समिति द्वारा की गई 49 संक्षिप्त-सूचीबद्ध सिफारिशों में से कई अब भी धूल फांक रही हैं। ऐसे परिदृश्य के साथ, जब हर साल आधुनिकीकरण कोष सिकुड़ रहा हो और राज्य पुलिस सुधारों में गहरी दिलचस्पी नहीं दिखा रहे, तो पुलिस बल में महिला कर्मियों की संख्या में वृद्धि के साथ आधुनिकीकरण कोष को जोडऩे से ज्यादा उद्देश्य पूरा नहीं होगा। समीक्षा समिति की सिफारिशों में से एक सिफारिश पुलिस अधिनियम, 1861 का प्रतिस्थापन था। एक नए अधिनियम का मसौदा तैयार करने के लिए गठित एक विशेषज्ञ समिति ने अक्टूबर 2006 में एक मॉडल पुलिस अधिनियम प्रस्तुत किया था, जिसे गृह मंत्रालय द्वारा सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को भेज दिया गया था। नतीजा यह है कि अधिकांश राज्यों में मॉडल पुलिस अधिनियम का अब एक विविध और कमजोर संस्करण ही लागू है।
'आपराधिक कानून' और 'आपराधिक प्रक्रिया' समवर्ती सूची में होने के कारण, केंद्र सरकार ने इन कानूनों में विभिन्न संशोधन किए हैं। कुछ एफआइआर और बयान एक महिला पुलिस अधिकारी द्वारा अनिवार्य रूप से दर्ज करने का प्रावधान किया गया है। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए महिला पुलिस की आवश्यकता होती है। वे कंट्रोल रूम की ड्यूटी में अपनी काबिलियत पहले ही साबित कर चुकी हैं। महिलाओं और बच्चों से संबंधित आपराधिक मामलों से निपटने के लिए भी पुलिस थानों में महिलाओं की जरूरत होती है। यह निर्विवाद है कि महिलाएं पुलिस संगठन के किसी भी कार्य को संभाल सकती हैं। एक लोकतांत्रिक देश में प्रत्येक संगठन को अपनी जनसंख्या का सही मायने में प्रतिनिधि मिलना चाहिए। लेकिन, तथ्य यह है कि सभी पुलिस थानों में महिला डेस्क स्थापित करने के लिए राज्यों को प्रोत्साहन के रूप में गृहमंत्रालय द्वारा धन उपलब्ध कराने के बावजूद, जिलों में इन डेस्कों के लिए पर्याप्त महिलाकर्मी नहीं हैं।
इसका एक समाधान संविधान में संशोधन करके पुलिस को 'समवर्ती सूची' में लाना हो सकता है। इससे केंद्र को न केवल पूरे देश के लिए एक समान नया पुलिस अधिनियम बनाने में मदद मिलेगी, बल्कि राज्यों पर बोझ डाले बिना और अधिक गंभीरता से पुलिस सुधार लागू किए जा सकेंगे। हालांकि, इसके लिए कम से कम आधे राज्यों की विधायिका द्वारा अनुसमर्थन की आवश्यकता होगी। इसलिए, जब तक राज्य पुलिस पर अपनी कुछ पकड़ ढीली करने के लिए तैयार नहीं होते, तब तक यह बदलाव मुश्किल दिखाई देता है। इस बीच, एक कदम आगे बढ़ाते हुए, सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा ( 33 प्रतिशत रिक्तियों की तुलना में) अधिक महिलाओं की भर्ती के लिए और एक बार में पुलिस बल में उनके प्रतिनिधित्व को बढ़ाने के लिए एक विशेष अभियान शुरू करने की आवश्यकता है। पुलिस विभाग में महिलाओं की संख्या बढऩे का सकारात्मक असर होगा।