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अर्धनारीश्वर की व्याख्या का सुंदर स्वरूप, दर्शन के सिद्धांत पर खरा ‘ नारी सौम्या, स्त्री (योषा) आग्नेय है’ पर प्रतिक्रियाएं

Reaction On Gulab Kothari Article : पत्रिका समूह के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी के विशेष लेख -'नारी सौम्या, स्त्री (योषा) आग्नेय है' पर प्रतिक्रियाएं

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Gulab Kothari Editor-in-Chief of Patrika Group

Gulab Kothari Editor-in-Chief of Patrika Group

Reaction On Gulab Kothari Article : पुरुष को अग्नि, स्त्री को सोम और दोनों को अर्धनारीश्वर के रूप में निरूपित करते पत्रिका समूह के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी की आलेखमाला ' शरीर ही ब्रह्मांड' के आलेख ' नारी सौम्या, स्त्री (योषा) आग्नेय है ' को प्रबुद्ध पाठकों ने अर्धनारीश्वर की सटीक व्याख्या का सुंदर स्वरूप बताया है। उनका कहना है कि लेख जीवन और जगत में दर्शन के मूलभूत सिद्धांतों को चरितार्थ करने वाला भी है। पाठकों की प्रतिक्रियाएं विस्तार से...


स्त्री शब्द से तात्पर्य है प्रकृति अर्थात् वह सृष्टि विस्तारक, संवेदनशील, आनंददायी, प्रेम प्रदाता आदि अनेक देवीय गुणों का पुंज है। हमारे शास्त्रों में एक शब्द आता है ब्रह्मवर्चस्वि...अर्थात् जो सहज,सरल होते हुए भी अत्यधिक कठोरता के साथ कर्तव्य को निष्पादित करे वह होती हैं स्त्री। क्योंकि स्त्री प्रकृति स्वरूपा है।
सुधा आचार्य, साहित्यकार, बीकानेर

सम्पूर्ण विश्व का पालन करने वाली धरती भी मां स्वरूपा हैंं। जल के रूप में प्राणीमात्र का तर्पण करने वाली गंगा, जमुना, सरस्वती तीनों मां स्वरूप हैं और सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इन सभी रूपों को पुरुषों द्वारा पूजा जाता है। वैदिक संस्कृति में स्त्री को पुरुष की अर्धांगिनी एवं सहधर्मिणी कहा जाता है, सदैव महिलाओं का सम्मान सबको करना चाहिए।
प्रीति रामनानी, जयपुर

आज भी आदर्श भारतीय नारी में तीनों देवियां विद्यमान हैं। अपनी संतान को संस्कार देते समय उसका सरस्वती रूप सामने आता है। गृह प्रबन्धन की कुशलता में लक्ष्मी का रूप तथा दुष्टों के अन्याय का प्रतिकार करते समय दुर्गा का रूप प्रगट हो जाता है। पुरुष यज्ञ करें, दान करे, राजसिंहासन पर बैठें या अन्य कोई श्रेष्ठ कर्म करे तो पत्नी का साथ होना अनिवार्य माना गया है।
राधादामोदर शर्मा, जयपुर

स्त्री- पुरुष दोनों अर्द्धनारीश्वर हैं| दोनों एक-दूसरे के भीतर है| अतः किसी एक से नहीं बल्कि दोनों से ही परिवार, समाज और दुनिया चलेगी| दोनों को समान अधिकार कानून के साथ सामाजिक स्तर पर भी मिलना चाहिए| आलेख में सुंदर ढंग से स्त्री- पुरुष की उत्पति को बताया गया है।
डाॅ. विशाल पारीक, हनुमानगढ़

वेद में स्त्री को दिए स्थान का वर्णन आलेख में शास्त्रीय तरीके से किया गया है। आलेख में नारी और पुरुष के स्वभाव का सरल वर्णन किया गया है।
राजेंद्र प्रसाद नायक, हनुमानगढ़

पुरुष अग्नि और स्त्री सोम का प्रतीक है, यही अर्धनारीश्वर की संकल्पित और सृन्दर व्याख्या है, सुंदर स्वरूप है। स्त्री पुरुष एक ही गाड़ी के दो पहिये हैं। दोनों एक दूसरे के पूरक हैं दोनों का जीवन एक दूसरे पर आधारित है। प्रस्तुत आलेख में पुरुष को भीतर से नारी और स्त्री को भीतर से पुरुष कहा गया है। यह जीवन और जगत में भी दर्शन के मूलभूत सिद्धांतों पर सही उतरता है कि वास्तव में वर्तमान समय में स्त्रियों में जो पुरुषार्थ की बात कही जा रही है, वह सोम और अग्नि का ही सम्मिलन है।
डॉ शोभना तिवारी, निदेशक, डॉ शिवमंगल सिंह सुमन स्मृति शोध संस्थान, रतलाम

स्त्री-पुरुष से मिलकर ही इस संसार की रचना हुई है। इसलिए दोनों एक-दूसरे के पूरक समझे जाते हैं। प्रकृति ने भी दोनों में कोई भेदभाव नहीं किया है। जीव माता के गर्भ के जरिए इस दुनिया में आता है और चला जाता है। स्त्री और पुरुष दोनों ही जरूरी हैं। ये बात भी सही है कि स्त्री सोम को ग्रहण करती है, वह अग्नि रूप में भी है और सोम का अग्नि में समाना ही अर्धनारीश्वर रूप है।
गौरव उपाध्याय, ज्योतिषाचार्य, ग्वालियर

आलेख में अर्धनारीश्वर रूप की सारगर्भित व्याख्या है। उन्होंने उदाहरण सहित व्याख्या की है कि मानव संस्था में पुरुष अग्नि है, स्त्री सोम है। पुरुष भीतर नारी है, स्त्री पुरुष है। वेद भी कहते हैं कि सृष्टि विस्तार के लिए ब्रह्म ही स्त्री तत्त्व को पैदा करता है। यज्ञ से ही सृष्टि का निर्माण है। सोम का अग्नि में समा जाना ही अर्धनारीश्वर रूप है।नीरज नयन शास्त्री, भगवताचार्य, दतिया

आलेख में सही कहा है अग्नि और सोम ही यज्ञ का आधार हैं और यज्ञ से ही सृष्टि का निर्माण हुआ है। वेदों में भी बताया गया है कि नारी और पुरुष से ही दुनिया की उत्पत्ति हुई है।
आशुतोष शर्मा, साहित्यकार, शिवपुरी