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ट्रैवलॉग अपनी दुनिया : धर्म-इतिहास का साक्षी मगध का हिमालय

बिहार के जहानाबाद जनपद से 25 किलोमीटर की दूरी पर मखदमपुर के पहाड़ी इलाके में स्थित बराबर की गुफाएं भी किसी रहस्य से कम नहीं हैं।

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ट्रैवलॉग अपनी दुनिया : धर्म-इतिहास का साक्षी मगध का हिमालय

ट्रैवलॉग अपनी दुनिया : धर्म-इतिहास का साक्षी मगध का हिमालय

संजय शेफर्ड , (ट्रैवल ब्लॉगर)

गुफाएं हमेशा से इंसानों के लिए रहस्य और दिलचस्पी का केन्द्र रही हैं। बिहार के जहानाबाद जनपद से 25 किलोमीटर की दूरी पर मखदमपुर के पहाड़ी इलाके में स्थित बराबर की गुफाएं भी किसी रहस्य से कम नहीं हैं। ये गुफाएं मौर्य वंश के शासन काल में बनाई गई थीं। इन्हें दुनिया की सबसे प्राचीन मानव निर्मित गुफा होने का श्रेय प्राप्त है। 2013 में मैं यहां पहली बार आया और उसके बाद हर बार एक नया पहलू उजागर हुआ।

इसी जगह पर नौ स्वयंभू नाथों में प्रथम सिद्धेश्वरनाथ का मंदिर भी है। धर्म-कर्म में आस्था रखने वाले लोग भारी संख्या में यहां आते हैं। ऐसा कहा जाता है कि बाबा सिद्धनाथ मंदिर 7वीं सदी के दौरान बाना राजा ने बनवाया था जो राजगीर के राजा जरासंध के ससुर थे। इसीलिए ऐतिहासिक के साथ-साथ इस स्थान का धार्मिक महत्व भी है। बराबर और नागार्जुन पर्वतों को भारतवर्ष के सबसे पुरातन और ऐतिहासिक पर्वतों में गिना जाता है और इसी जगह पर कभी मगध का साम्राज्य हुआ करता था, इसीलिए 1100 फुट ऊंचे बराबर और नागार्जुन पर्वतों को मगध का हिमालय भी कहा जाता है। इन गुफाओं में आजीविका संप्रदाय के संन्यासी रहते थे।

बराबर के पहाड़ ग्रेनाइट से बने हैं। हेमाटाइट, मैग्नाटाइट और आयरन ओर की अधिक मात्रा के कारण ये पहाड़ मजबूत होते हैं। सम्राट अशोक की जीत का श्रेय इन पहाड़ों को भी दिया जाता है, क्योंकि उसकी सेना के लिए हथियार निर्माण में इस ग्रेनाइट का इस्तेमाल हुआ।

बराबर की गुफाओं से कुछ ही दूरी पर नागार्जुन की गुफाएं भी स्थिति हैं। इनका निर्माण सम्राट अशोक के पोते राजा दशरथ ने कराया था। संख्या में ये कुल सात हैं इसलिए इन्हें 'सतघर' के रूप में जाना जाता है। इन गुफाओं के अलावा राजगीर से 13 मील की दूरी पर सीतामढ़ी गुफा भी है जिसे किसी पहाड़ नहीं, बल्कि धरती के नीचे ग्रेनाइट की चट्टान को काटकर बनाया गया है। इसे भी मौर्यकालीन गुफा के तौर पर जाना जाता है। देश में इन गुफाओं के निर्माण से ही प्रेरणा लेकर कालांतर में पश्चिम भारत में अनेक चैत्य गृहों का निर्माण हुआ। इसीलिए बराबर और नागार्जुन की गुफाओं का बहुत महत्व है। यह स्थान बिहार की राजधानी पटना से बोधगया के रास्ते में पड़ता है। जब कभी बिहार की यात्रा करें, इस स्थान का भ्रमण अवश्य करें।