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प्रसंगवशः गोडावण संरक्षण के प्रयासों को उचित दिशा मिलना बाकी

विद्युत लाइनों का भूमिगत नहीं हो पाना गोडावण की संख्या कम होने की सबसे बड़ी वजह बन रही है

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Patrika Desk

Jul 15, 2022

प्रतीकात्मक चित्र

प्रतीकात्मक चित्र

खबर पड़ोसी राज्य गुजरात की है, लेकिन राजस्थान की चिंता से भी जुड़ी है। राजस्थान के राज्य पक्षी गोडावण की घटती संख्या के बीच गुजरात ने अपने यहां इस प्रजाति के संरक्षण की उम्मीद छोड़ दी है। इसीलिए कच्छ में लाला-परजन अभयारण्य में अब जो चार मादा गोडावण रह गए हैं, उन्हें गुजरात सरकार शिफ्ट करने की तैयारी कर रही है। राजस्थान में गोडावण संरक्षण की दिशा में पिछले सालों में काफी प्रयास हुए हैं, इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता। शायद यही वजह है कि देश भर में सबसे ज्यादा गोडावण अब राजस्थान में और खास तौर से जैसलमेर जिले में हैं। गोडावण संरक्षण में आशानुकूल सफलता हासिल नहीं करने की जो वजह गुजरात में रही है, वही कमोबेश राजस्थान में बनते देर नहीं लगने वाली। सब जानते हैं कि बिजली के तार गोडावण के सबसे बड़े दुश्मन हैं। हाईटेंशन लाइनों के संपर्क में आकर गुजरात में भी कई गोडावणों ने जान गंवाई है। दरअसल गोडावण उड़ान भरते वक्त जब पानी की तलाश में नीचे उतरते हैं, तो बिजली के तारों की चपेट में आ ही जाते हैं। वन्यजीव प्रेमियों का आरोप है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बावजूद न तो गुजरात और न ही राजस्थान में गोडावण के रहवास क्षेत्र में बिजली की लाइनों को भूमिगत करने में रुचि दिखाई गई। मोटे अनुमान के अनुसार राजस्थान में भी वर्ष 2017 से अब तक सात गोडावण इन्हीं विद्युत लाइनों की चपेट में आकर अपनी जान गंवा बैठे।

खास बात यह है कि पिछले चार साल से राज्य में गोडावण पक्षी की गणना हुई ही नहीं। सिर्फ जैसलमेर के सुदासरी स्थित प्रजनन केन्द्र व रामदेवरा वनक्षेत्र में छह नए गोडावण सामने आने के आधार पर ही यह अनुमान लगाया जा रहा है कि गोडावण कुनबे के साथ क्षेत्र में विचरण कर रहे हैं। जैसलमेर का डेजर्ट नेशनल पार्क भले ही गोडावण को संरक्षित करने के लिए बनाया गया हो, लेकिन गोडावण संरक्षण के प्रयासों को उचित दिशा मिलना बाकी है। क्षेत्रवासियों के गोडावण से लगाव का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वर्ष २०२० में बिजली के तारों की चपेट में आकर मरे मादा गोडावण के लिए तीन माह पहले ही ग्रामीणों ने बाकायदा दुनिया का पहला गोडावण स्मारक बनवा दिया। गोडावण संरक्षण की याद की दिशा में यह अनूठा प्रयास हो सकता है, लेकिन सरकार को राज्य पक्षी के संरक्षण पर खास ध्यान देना होगा। (ह.पा.)