
आत्म-दर्शन : हमें कई मुसीबतों से बचाती है खामोशी
अधिक बोलना जहां कई तरह की परेशानियों का कारण बन जाता है, वहीं चुप्पी, मौन और खामोशी हमें कई मुसीबतों से बचाती है। इस्लामी शिक्षा में मौन या कहें कि खामोशी को अहमियत दी गई है। इंसान का खामोश रहना उसे इबादत का सवाब दिलाता है। किसी बात पर बिना सोचे-समझे बोलने से अच्छा होता है खामोश रहना। मौन से कलह मिटती है
इस्लाम कहता है कि बोलो तो अच्छा बोलो वरना खामोशी बेहतर है। पैगंबर मुहम्मद (ईश्वर की रहमतें हों उन पर) ने फरमाया- 'जो शख्स खामोश रहा, उसने कामयाबी पाई।' पैगंबर मुहम्मद साहब ने कहा, 'जो कोई भी ईश्वर और अंतिम दिन पर यकीन करता है, उसे चाहिए वह बोले तो अच्छा बोले, अन्यथा चुप रहे।'
पैगंबर मुहम्मद साहब ने फरमाया कि सबसे ज्यादा नुकसानदेह चीज जबान है। अच्छी बात खामोशी से बेहतर है और बुरी बात से खामोशी बेहतर है। खामोश रहने से इंसान चिंतन की ओर बढ़ता है।
Published on:
27 Aug 2021 12:51 pm
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