19 जनवरी 2026,

सोमवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

आत्म-दर्शन : तकनीक और अध्यात्म

हमारे भौतिक और तकनीकी विकास को लेकर कोई संदेह नहीं, पर यह पर्याप्त नहीं है।

less than 1 minute read
Google source verification
आत्म-दर्शन : तकनीक और अध्यात्म

आत्म-दर्शन : तकनीक और अध्यात्म

दलाई लामा, बौद्धधर्म गुरु

विज्ञान और तकनीक ने कई क्षेत्रों में चमत्कारिक कार्य किए हैं, पर मनुष्य की मूलभूत समस्याएं बनी हुई हैं। साक्षरता का स्तर बढ़ा है, फिर भी लगता नहीं कि मौजूदा शिक्षा व्यवस्था ने अच्छाई को बढ़ावा दिया हो, अपितु इसके स्थान पर मानसिक अशांति और असंतोष में ही बढ़ोतरी हुई है। हमारे भौतिक और तकनीकी विकास को लेकर कोई संदेह नहीं, पर यह पर्याप्त नहीं है। इसकी वजह यह है कि अभी तक हम शांति और सुख प्राप्ति या पीड़ाओं पर काबू पाने में सफल नहीं हुए हैं। साफ है कि हमारे कथित विकास में कोई गंभीर चूक हुई होगी।

यदि हमने समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया, तो विनाशकारी परिणाम होंगे। मैं विज्ञान और तकनीक के विरोध में नहीं हूं, पर यदि हम विज्ञान और तकनीक पर बहुत अधिक बल देंगे, तो हमारा मानवीय ज्ञान और समझ के उन अंगों से संपर्क टूटने का खतरा है, जो ईमानदारी और परोपकार के लिए प्रेरित करते हैं। विज्ञान और तकनीक में भौतिक सुख उपलब्ध कराने की क्षमता है, पर यह आध्यात्मिक तथा मानवीय मूल्यों का स्थान नहीं ले सकते।