
पदमचंद्र महाराज
पदमचंद्र महाराज
सकारात्मक ऊर्जा का मतलब है पुण्य कर्म के फल देने की शक्ति। नकारात्मक ऊर्जा यानी पाप कर्म के फल देने की शक्ति। पुण्य कर्म अच्छे और पाप कर्म बुरे फल देता है। जब जीव के अशुभ कर्म उदय में आते हैं, तो व्यक्ति स्वयं अपने आप के लिए दु:खदायी बन जाता है।
व्यक्ति के मन में दिन भर में न जाने कितने शुभ और अशुभ भाव आते हैं। जब अशुभ भाव आ जाएं, तो तुरंत चिंतन करें कि यदि पाप कर्म करके धन संचय किया, तो कर्मों को भोगते समय कोई भी निकट नहीं आएगा। इसलिए हर समय साधक को सजग और सतर्क रहना चाहिए।
अपने आपको शुभ परिणामों (भावों) में रखना चाहिए। पुण्यानुबंधी पुण्य व्यक्ति को धर्म से जोड़ेगा और धर्म आराधना से पुण्य की सहज में वृद्धि होगी। आत्मा में शुभता और शुद्धता आने पर सकारात्मक ऊर्जा का संचार होगा।
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