
सभी प्राणी स्थूलता के साथ-साथ सूक्ष्म स्तर पर जीव रूप होते हैं। यही जीवन के आदान-प्रदान का मूल आधार है। हमें लगता है कि हम शरीर के माध्यम से जुड़े रहते हैं। शरीर तो पशु है। यहां तक कि स्थानीय मेघ तो वर्षण तत्त्व को भी नहीं जानता। मध्य स्थानीय इन्द्र इसका यथार्थ जानता है। इसने सूर्य में निहित वृष्टि को देखा है। अन्तरिक्ष माता है, जिसमें प्राणी जन्म लेते हैं। योनि प्रदेश है। उत्पन्न हुए प्राणियों को यहां अवकाश प्राप्त होता है। इसी प्रकार मेघ गरजता नहीं है, विद्युत गर्जन करती है। विद्युत का ही सूक्ष्म भाग प्रकाश पैदा करता है।
ईश्वर प्रजापति रूप है, यज्ञ रूप है। इसकी सम्पूर्ण सृष्टि यज्ञ रूप ही है। अग्नि में सोम की आहुति एक यज्ञ है। अग्नि में भीतर सोम है, सोम में भीतर अग्नि भी है। अर्थात् यज्ञ के भीतर एक यज्ञ और भी है। अत्यन्त सूक्ष्म में पुन: तीसरा यज्ञ अग्नि-सोमात्मक होगा, पहले वाले यज्ञ की दिशा में। वहीं पर ईश्वर की स्थिति है। इसीलिए सभी प्राणी समान होते हैं।
Updated on:
05 Aug 2022 09:23 pm
Published on:
05 Aug 2022 05:28 pm
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