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शरीर ही ब्रह्माण्ड Podcast: सृष्टि यज्ञ में अत्रि दर्पण है

Gulab Kothari Article Sharir Hi Brahmand: नर-मादा का प्रथम यज्ञ शरीर संयोग से होता है। दूसरा यज्ञ रज में अरणिमंथन से अग्नि प्राणों की उत्पत्ति एवं इस अग्नि में रेतस् की आहुति है। रेतस् स्वयं बीज नहीं है। बीज का संग्राहक है। रेतस् में शुक्राणु और रज में अण्ड रहते हैं, इनका संयोग तीसरा यज्ञ है। पुंभ्रूण का स्त्री भू्रण से योग चतुर्थ यज्ञ है।... 'शरीर ही ब्रह्माण्ड' शृंखला में सुनें पत्रिका समूह के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी का यह विशेष लेख- सृष्टि यज्ञ में अत्रि दर्पण है

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जयपुर

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Nitin Kumar

Jul 28, 2023

शरीर ही ब्रह्माण्ड Podcast

शरीर ही ब्रह्माण्ड Podcast

Gulab Kothari Article शरीर ही ब्रह्माण्ड: "शरीर स्वयं में ब्रह्माण्ड है। वही ढांचा, वही सब नियम कायदे। जिस प्रकार पंच महाभूतों से, अधिदैव और अध्यात्म से ब्रह्माण्ड बनता है, वही स्वरूप हमारे शरीर का है। भीतर के बड़े आकाश में भिन्न-भिन्न पिण्ड तो हैं ही, अनन्तानन्त कोशिकाएं भी हैं। इन्हीं सूक्ष्म आत्माओं से निर्मित हमारा शरीर है जो बाहर से ठोस दिखाई पड़ता है। भीतर कोशिकाओं का मधुमक्खियों के छत्ते की तरह निर्मित संघटक स्वरूप है। ये कोशिकाएं सभी स्वतंत्र आत्माएं होती हैं।"
पत्रिका समूह के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी की बहुचर्चित आलेखमाला है - शरीर ही ब्रह्माण्ड। इसमें विभिन्न बिंदुओं/विषयों की आध्यात्मिक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से व्याख्या प्रस्तुत की जाती है। गुलाब कोठारी को वैदिक अध्ययन में उनके योगदान के लिए जाना जाता है। उन्हें 2002 में नीदरलैन्ड के इन्टर्कल्चर विश्वविद्यालय ने फिलोसोफी में डी.लिट की उपाधि से सम्मानित किया था। उन्हें 2011 में उनकी पुस्तक मैं ही राधा, मैं ही कृष्ण के लिए मूर्ति देवी पुरस्कार और वर्ष 2009 में राष्ट्रीय शरद जोशी सम्मान से सम्मानित किया गया था। 'शरीर ही ब्रह्माण्ड' शृंखला में प्रकाशित विशेष लेख पढ़ने के लिए क्लिक करें नीचे दिए लिंक्स पर -




















नारी सौम्या, स्त्री (योषा) आग्नेय है
जीवन अमृत-मृत्यु रूप है
ब्रह्म : जगत प्रतिष्ठा
बाहर प्रवृत्ति, भीतर निवृत्ति
कर्म ही प्रकृति की पहचान