
तालिबान सरकार को भारत मान्यता दे या नहीं?
लोकतंत्र के सिद्धांतों के खिलाफ
पिछले तालिबानी राज में महिलाओं एवं बच्चों पर अत्याचार हुए थे। अब फिर वही इतिहास दोहराया जाएगा, जो किसी भी रूप से स्वीकार्य नहीं होना चाहिए। भारत एक लोकतांत्रिक देश है एवं किसी भी लोकतांत्रिक देश का ऐसी सरकार का समर्थन करना लोकतंत्र के सिद्धांतों के खिलाफ ही माना जाएगा।
-देवेंद्र सिंह गहलोत, चौपासनी, जोधपुर
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जल्दबाजी ठीक नहीं
दुनिया में आज भी अनेक ऐसे देश हैं, जिन्हें दूसरे देशों ने मान्यता नहीं दी है। हमें भी तालिबान के मामले में इतनी जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए, क्योंकि जितने अधिक देश तालिबान को मान्यता देंगे उसका हौसला और मनोबल उतना ही बढ़ता जाएगा। हमें वेट एंड वॉच की नीति अपनाते हुए अन्य विकसित देशों से भी लगातार विचार विमर्श करते रहना चाहिए अथवा तालिबान को लेकर तटस्थ रहना ही ज्यादा उचित होगा।
-सिद्धार्थ शर्मा, गरियाबंद, छत्तीसगढ़
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समझदारी से काम ले भारत
तालिबान के बढ़ते वर्चस्व को देखते हुए भारत को समझदारी से काम लेना होगा। शांति शर्त पर तालिबान को ढील या मान्यता दी जा सकती है, जिससे भारत का अफगानिस्तान से व्यापार पटरी पर आए एवं अफगानिस्तान में लगाया गया धन व्यर्थ नहीं जा पाए।
-आवेश खान, इंदौर
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अभी इंतजार करे भारत
अफगानिस्तान में तेजी से हुए घटनाक्रमों के चलते तालिबान ने वहां सरकार बना ली है। यह भारत के लिए भी सुरक्षा की दृष्टि से चुनौतीपूर्ण है। तालिबान अभी एक घोषित चरमपंथी गुट है। चरमपंथ और रूढ़िवाद की समस्याओं के चलते सत्ता में आने पर उसकी सोच नहीं बदलेंगी, जो पूरी दुनिया के लिए खतरा है। उसे चीन और पाकिस्तान का समर्थन प्राप्त होने से आतंकवाद को बढ़ावा मिलने की भी ज्यादा संभावना लग रही है। अफगानिस्तान में अभी हिंसक घटनाएं जारी हैं। भारत को अभी शांतिपूर्ण वातावरण के बनने का इंतजार करना चाहिए.
-नरेश कानूनगो, बैंगलूरू, कर्नाटक
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सशर्त मान्यता दी जाए
भारत सरकार को तालिबान सरकार को इस शर्त पर मान्यता दे देनी चाहिए कि अफगानिस्तान की भूमि से वह किसी भी आतंकी संगठन को भारत के खिलाफ आतंकी कार्रवाई नहीं करने देगी।
-निर्मल कुमार शर्मा, गाजियाबाद, उप्र
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मान्यता दे, लेकिन सतर्क रहे भारत
किसी देश की स्वतंत्रता एवं स्वायत्तता से हमें छेड़छाड़ नहीं करनी चाहिए। किसी देश में राजतंत्र है, तो किसी में लोकतंत्र। लोकतांत्रिक देश होने के बाद भी हमने कभी राजतांत्रिक देशों का विरोध नहीं किया। सरकार किसकी बने और कैसे बने, इसमें हमारी दखलंदाजी नहीं होनी चाहिए। मान्यता तो हमें देनी चाहिए, पर अपनी सुरक्षा और शांति को लेकर थोड़ा और सजग हो जाना चाहिए, क्योंकि कुछ बाहरी ताकते ऐसी नवगठित सरकार का प्रयोग हमारे विरुद्ध कर सकती है।
शीतल कंवर
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तटस्थ रहे भारत
तालिबान में अंतरिम सरकार का गठन हो चुका है। सरकार में शामिल लोग आतंकवाद से प्रेरित हैं तथा शरिया कानून पर विश्वास करते हैं। ऐसे में भारत को इसे मान्यता न देकर तटस्थता की भूमिका अपनानी चाहिए। अच्छा आतंकवाद, बुरा आतंकवाद जैसी कोई अवधारणा नहीं होती। आतंकवाद तो आतंकवाद है, चाहे किसी भी रूप में हो। हमने हमेशा दूसरे देशों की संप्रभुता का सम्मान किया है। अन्य देशों की भेड़ चाल में चलकर भारत को अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं करना चाहिए, क्योंकि हमारे मूल्य ही हमारी धरोहर और पहचान हैं।
-एकता शर्मा, गरियाबंद, छत्तीसगढ
Published on:
09 Sept 2021 05:48 pm
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