
डिब्बाबंद खाद्य पदार्थों के ज्यादा सेवन से सेहत को नुकसान को देखते हुए भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआइ) ने चेतावनी लेबल के लिए ड्राफ्ट रेगुलेशन जारी कर दिया है। काफी सालों बाद यह ड्राफ्ट आया है जिसमें खाने-पीने की चीजों में रिस्क फैक्टर की पहचान कर ली गई है और लोगों से राय मांगी गई है। अब यह आपके हाथ में है कि आप कैसी नीति चाहते हैं ताकि आप जान सकें कि इनमें क्या कुछ हानिकारक है। ये खाद्य पदार्थ फैक्ट्रियों में बनते हैं। आम तौर पर इनमें चीनी, नमक व वसा की मात्रा ज्यादा होती है।
हालांकि, एफएसएसएआइ ने ड्राफ्ट पॉलिसी में एक ऐसा प्रावधान किया है जिससे फूड इंडस्ट्री को लोगों की सेहत से खिलवाड़ करने की छूट मिलने की आशंका है। ऐसे उत्पादों पर फ्रंट ऑफ पैक लेबल (एफओपीएल) चेतावनी वाले लेबल की मांग की जा रही थी। इसकी बजाय स्टार रेटिंग प्रणाली अपनाने की बात कही गई है। यह प्रणाली ऑस्ट्रेलिया में लागू की गई थी जो न सिर्फ विफल रही बल्कि उपभोक्ताओं को असमंजस में भी डालती है क्योंकि वे समझ नहीं पाते कि कौन-सा उत्पाद स्वास्थ्यकर है, कौन-सा अस्वास्थ्यकर। मसौदे के अनुसार स्टार रेटिंग को अनिवार्य बनाने के लिए फूड इंडस्ट्री को 4 साल का लंबा समय भी दिया जाएगा।
Updated on:
05 Oct 2022 09:54 pm
Published on:
05 Oct 2022 07:25 pm
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