
भिलंगना नदी का उद्गम है आकर्षक खतलिंग ग्लेशियर
संजय शेफर्ड
ट्रैवल राइटर और ब्लॉगर
पहाड़ मुझे आकर्षित तो करते हैं, लेकिन कभी-कभी रहस्य सरीखे जान पड़ते हैं। यह न जाने कितनी विविधताओं को खुद में समेटे हुए हैं। ग्लेशियर भी उन्हीं रहस्यों में से एक हंै। टिहरी जनपद में स्थित खतलिंग ग्लेशियर उन्हीं में से एक है, जो कि मेरा सबसे पसंदीदा ग्लेशियर है। इसलिए, सोचा क्यों न इस बार की यात्रा इसे एक्सप्लोर करने के लिहाज से की जाए। घनसाली तहसील में स्थित खतलिंग ग्लेशियर उत्तराखंड के पांच बड़े ग्लेशियरों में से एक है। इसके अलावा पहले स्थान पर गोमुख, दूसरे पर मिलम, तीसरा पिंडारी और नामिक चौथे स्थान पर है। समुद्र तट से काफी ऊंचाई पर स्थित होने की वजह से यह ग्लेशियर ट्रैकर्स के आकर्षण का केंद्र रहता है। इस जगह पर हर साल सैकड़ों सैलानी आते हैं।
दिल्ली या फिर देश के किसी अन्य हिस्से से इस जगह पर पहुंचना बहुत ही आसान है। इस जगह पर आने के लिए ऋषिकेश से 75 किमी दूर टिहरी पहुंचना होता है। टिहरी से 20 किमी की दूरी पर धुत्तू नामक गांव है। इसी जगह से भील सरोवर के लिए पैदल यात्रा प्रारम्भ होती है। 10-10 किमी की दूरी पर रीह व गंगी नामक दो स्थान आते हैं। ट्रैकर्स गंगी से आगे भील गंगा नदी के किनारे-किनारे चलते हुए खतलिंग ग्लेशियर तक पहुंच जाते हैं। खतलिंग ग्लेशियर के पास ही में भील सरोवर नामक विशाल झील है। यह झील भिलंगना नदी का उद्गम स्रोत है, जो कि भागीरथी की सहायक नदी मानी जाती है। यह खतलिंग ग्लेशियर टिहरी से निकलकर गणेश प्रयाग में भागीरथी से मिलती है। भिलंगना की सहायक नदियों में मेदगंगा, दूधगंगा, बालगंगा का नाम आता है, परंतु सबसे प्रमुख बालगंगा नदी है। इसकी भी एक सहायक नदी है, जो कि धर्म गंगा के नाम से जानी जाती है। यह बूढ़ा केदार में बाल गंगा से मिलती है। खतलिंग ग्लेशियर अपने उच्च, शांत और सुंदर पहाडिय़ों के लिए जाना जाता है। भिलंगना नदी के स्रोत के कारण गढ़वाल हिमालय का खतलिंग ग्लेशियर एक बहुत महत्त्वपूर्ण ग्लेशियर बन जाता है। ग्लेशियर के आसपास हिमालय की मोटी बर्फ की कई चोटियां विद्यमान हैं, जिन्हें जोगिन समूह, स्पिस्टल प्रिसर्ट, बार्टा कौर, कीर्ति स्तम्भ और मेरु के नाम से जाना जाता है। इस जगह पर जो लोग जाना चाहते हैं उन्हें पता होना चाहिए कि खतलिंग ग्लेशियर का ट्रैक धुत्तु से शुरू होता है। धुत्तु में ठहरने के लिए एक पीडब्ल्यूडी निरीक्षण घर और एक पर्यटक विश्रामगृह उपलब्ध है। ट्रैकर्स इन्हीं दोनों में से किसी एक जगह पर ठहरते हैं, नहीं तो अपना खुद का टेंट लगाकर कैम्पिंग करते हैं। हम लोग भी पर्यटक विश्रामगृह में ठहरे हुए थे, ताकि सुबह जल्दी ट्रैकिंग शुरू कर सकें।
इस ट्रैक पर अन्य महत्त्वपूर्ण स्थान रीह, गंगी, कल्याणी और भीम की गुफा हैं। रीह और गंगी में भी पर्यटक विश्राम गृह उपलब्ध हैं। गंगी दूरस्थ अंतिम गांव है, जिसके बाद किसी भी तरह की सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। इससे आगे के ट्रैक में अपनी व्यवस्था स्वयं ही करनी होती है। खतलिंग ग्लेशियर का शिखर सबसे शानदार और आकर्षक है। यहां से मसाड ताल 7 किमी दूर है। इसी मार्ग में आगे वासुकीताल है, जहां से केदारनाथ तक जाया जाता है। यह ट्रैक गढ़वाल के छोटे गांवों एवं खरसों के जंगलों के मध्य से गुजरता है, जिससे यह रोमांचकारी और ज्ञानवर्धक सिद्ध होता है।
Published on:
13 Sept 2022 09:10 pm
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