
'अंत्योदय' और 'एकात्म मानववाद' के दर्शन ने दी नई दिशा
नरेंद्र सिंह तोमर, केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री
महान चिंतक, प्रखर राष्ट्रवादी, पथ प्रदर्शक पंडित दीनदयाल उपाध्याय के 'अंत्योदय' और 'एकात्म मानववाद' के दर्शन ने भारतीय राजनीति और सामाजिकता को एक नई दृष्टि दी है। इसी दृष्टि का नतीजा है, हाल ही में भारत की संसद से पारित 'नारी शक्ति वंदन विधेयक'। करीब तीन दशक से अटका महिला आरक्षण का मामला आगे बढ़ गया है। पं. दीनदयाल उपाध्याय जब सामाजिक समरसता की बात करते थे तो महिला सशक्तीकरण उसका एक अनिवार्य अंग होता था। उनका मानना था कि महिलाओं को मुख्यधारा में लाए बिना राष्ट्र की अपेक्षित प्रगति संभव नहीं है।
महिला सशक्तीकरण की दिशा में पंडित दीनदयाल के संकल्पों को सिद्ध करने के लिए केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा प्रारंभ किए गए 'दीनदयाल अंत्योदय योजना, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन' की सफलता भी एक उल्लेखनीय अध्याय है। इस मिशन के तहत आज देश की 10 करोड़ महिलाएं स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से आजीविका से जुड़कर आत्मनिर्भर भारत का निर्माण कर रही हैं। उज्ज्वला योजना के अंतर्गत 9.58 करोड़ घरों को धुएं से मुक्ति दिलाने के लिए गैस कनेक्शन उपलब्ध कराने के पीछे भी कहीं न कहीं अंत्योदय का ही भाव है। पंडित दीनदयाल उपाध्याय का स्पष्ट मत था कि ग्राम विकास से ही राष्ट्र विकास की कल्पना की जा सकती है। उन्हीं की प्रेरणा से वर्ष 2014 में प्रारंभ की गई दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना के तहत गांवों में स्किल डवलपमेंट की बुनियाद रखते हुए अब तक 14 लाख से अधिक युवाओं को प्रशिक्षित किया गया है जिनमें से करीब 8.५ लाख युवा निजी कंपनियों में रोजगार प्राप्त कर चुके हैं। देश में गरीबी रेखा के नीचे जीवनयापन करने वालों की संख्या 22 प्रतिशत से घटकर 10 प्रतिशत तक आ गई है और अत्यंत गरीबी रेखा की दर एक प्रतिशत से भी नीचे जा पहुंची है। पं. दीनदयाल उपाध्याय ने हमेशा गरीबों की भलाई पर जोर देने की बात कही।
विगत एक दशक में 'सबका साथ-सबका विकास' के जिस मूलमंत्र को आत्मसात करके केंद्र सरकार ने कार्य किया, उसी का परिणाम है कि आज 13 करोड़ से अधिक ग्रामीण घरों में नल से शुद्ध पेयजल पहुंच रहा है। साढ़े 11 करोड़ से अधिक शौचालयों के निर्माण से आज ग्रामीण भारत में स्वच्छता कवरेज सौ फीसदी है। 3.31 लाख गांव ओडीएफ प्लस का दर्जा हासिल कर चुके हैं। प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना के अंतर्गत हर आवासहीन ग्रामीण का अपनी पक्की छत का सपना पूरा हो, इसके लिए अब तक 2.41 करोड़ मकान बनाए जा चुके हैं। शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों को जोड़ लें तो यह आंकड़ा चार करोड़ आवासों से ज्यादा है। रोजगार के सशक्तीकरण एवं निम्न वर्ग को आजीविका से जोडऩे के लिए प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के माध्यम से 43 करोड़ से अधिक ऋण स्वीकृत किए गए हैं। ग्रामीणों को उनके मकान का अधिकार अभिलेख देकर सशक्त बनाने के लिए स्वामित्व योजना के तहत अब तक सवा करोड़ से अधिक परिवारों को संपत्ति कार्ड दिए जा चुके हैं। पं. दीनदयाल उपाध्याय कृषि एवं उससे जुड़ कार्यों को विकास की धुरी मानते थे। उसी दिशा में अग्रसर होते हुए कृषि क्षेत्र के विकास और किसानों के कल्याण के लिए सरकार ने जो कदम उठाए, वे अपूर्व हैं।
किसानों को आर्थिक रूप से संबल प्रदान करने के लिए प्रारंभ की गई प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की अब तक 14 किस्तें जारी कर दी गई हैं। इसके तहत देश के 12 करोड़ रुपए से अधिक किसानों के बैंक खातों में लगभग ढाई लाख करोड़ रुपए से अधिक की राशि हस्तांतरित की जा चुकी है। किसानों को आपदा में राहत प्रदान करने के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का कवच भी एक बड़ा कदम है। इस योजना के अंतर्गत किसानों के अब तक 29 हजार करोड़ रुपए प्रीमियम रूप में जमा हुए, जबकि 1.41 लाख करोड़ रुपए मुआवजे के रूप में दिए गए हैं।
Published on:
25 Sept 2023 10:07 pm
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