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‘इंडिया फर्स्ट’ नीति ने बदल दी देश की नियति

आत्मविश्वासी और आत्मनिर्भर राष्ट्र के रूप में उभरा भारत जो नेतृत्व भी करता है और प्रेरणा भी देता है अतीत में, 'वसुधैव कुटुम्बकम्' महज एक नारा बन गया था। पीएम मोदी ने दिखा दिया कि भारत न सिर्फ अपने प्राचीन संतों के ज्ञान और अपने प्राचीन ग्रंथों में निहित इस कहावत में विश्वास करता है, बल्कि इसे जीता भी है।

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Patrika Desk

Jun 10, 2022

प्रतीकात्मक चित्र

प्रतीकात्मक चित्र

अनुराग सिंह ठाकुर

लेखक भारत के केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण तथा खेल एवं युवा कार्य मंत्री हैं


राजनीति में सात दिन का समय एक लंबी अवधि हो सकती है, पर किसी देश के इतिहास में आठ साल का समय बहुत कम होता है। इस कम समय में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत की वैश्विक प्रोफाइल को बड़े पैमाने पर ऊपर उठाया है और विश्वगुरु के रूप में राष्ट्र के खोए हुए गौरव, प्रतिष्ठा और गरिमा को बहाल करने का काम किया है। राष्ट्रीय हित को पारंपरिक भू-राजनीति से ऊपर रखने की पीएम की 'इंडिया फर्स्ट' नीति ने निस्संदेह विश्व में भारत के उदय को प्रेरित किया है। हार्ड और सॉफ्ट पावर प्रोजेक्शन का एक निपुण संयोजन, प्रौद्योगिकी में भारत की विशेषज्ञता व इस्तेमाल यह तय करेगा कि चौथी औद्योगिक क्रांति के दौरान हम कोई मौका नहीं गवाएंगे। भारत की सभ्यतागत विरासत और इसकी संस्कृति को बेरोक-टोक बढ़ावा दिए जाने से 'इंडिया फर्स्ट' नीति को ताकत मिली है।

पिछली सरकारों ने भारत की सॉफ्ट पावर को प्रोजेक्ट करने की कोशिश की, पर उन प्रयासों का सीमित प्रभाव पड़ा। पर्यटन से संबंधित बुनियादी ढांचे पर ध्यान केंद्रित किए बिना पर्यटन को बढ़ावा देना, या भारत की बहुरंगी छवि को केवल एक स्मारक तक सीमित करना ऐसे ही प्रयास रहे। अब केन्द्र सरकार ने इस दृष्टिकोण में व्यापक बदलाव लाते हुए कैनवस को बड़ा किया है। उदाहरण के लिए, इस प्राचीन भूमि से दुनिया को एक उपहार के रूप में योग अब दुनिया भर में प्रचारित है। संयुक्त राष्ट्र द्वारा 21 जून को 'अंतरराष्ट्रीय योग दिवस' घोषित किया यगा। अतीत में, 'वसुधैव कुटुम्बकम्' एक खाली नारा बन गया था। लेकिन पीएम मोदी ने यह दिखा दिया कि भारत न केवल अपने प्राचीन संतों के ज्ञान और अपने प्राचीन ग्रंथों में निहित इस कहावत में विश्वास करता है, बल्कि इसे जीता भी है। इसलिए, जब विकसित दुनिया ने कोविड-19 वैक्सीन के साथ दूसरों की मदद करने में अनिच्छा दिखाई, तो भारत ने पड़ोसियों के साथ-साथ दूर के देशों की भी मदद के लिए कदम बढ़ाया। केवल महामारी सहायता ही नहीं, भारत पहला देश था जिसने नेपाल में भूकम्प के दौरान आपदा राहत पहुंचाई। ऐसे समय में जब श्रीलंका अशांत समय से गुजर रहा है, भारत ने संकट से निपटने में मदद के लिए कदम बढ़ाया है। काबुल के पतन और तालिबान के उदय के बाद दुनिया ने अफगानिस्तान से मुंह फेर लिया है। सुरक्षा निहितार्थों के बावजूद, भारत ने अफगानिस्तान के लोगों को खाद्य राहत प्रदान करना चुना है। घरेलू स्तर पर अपरिहार्य कारणों से गेहूं के निर्यात पर रोक लगाते हुए भी भारत ने यह अच्छी तरह स्पष्ट कर दिया है कि जिन देशों को गेहूं की जरूरत है उन्हें गुणावगुण के आधार पर गेहूं उपलब्ध कराया जाएगा। इस निर्णय के पीछे यह गहरा नैतिक विचार है कि यदि विश्व एक परिवार है तो खाद्य सुरक्षा अकेले भारत के लिए नहीं हो सकती।

'डिजिटल इंडिया' की कहानी फिर से बताने की जरूरत नहीं। हमारे पास बेहतरीन यूपीआइ में से एक है जिसने डिजिटल भुगतान को अन्य देशों की तुलना में कहीं अधिक लोकप्रिय बना दिया है। दुनिया के सबसे बड़े कोविड-19 टीकाकरण अभियान का प्रबंधन और निगरानी डिजिटल रूप से की गई। डिजिटल समावेशन केंद्र सरकार की 'डिजिटल इंडिया' नीति की आधारशिला रहा है। दूसरे देशों के विपरीत, हम प्रौद्योगिकी साझा करने के इच्छुक हैं।
हमारे खिलाड़ी 'यंग इंडिया' के बेहतरीन उदाहरणों में उत्कृष्ट हैं और वे ट्राफियां ला रहे हैं जिनका हम पहले केवल सपना देख सकते थे। हमारे बेहद प्रतिभाशाली फिल्म उद्योग ने विश्व स्तर की विषय-सामग्री का निर्माण करने के लिए रचनात्मकता, संस्कृति और प्रौद्योगिकी को संयोजित करने के लिए आगे कदम बढ़ाया है जो विश्व स्तर पर सर्वश्रेष्ठ के साथ प्रतिस्पर्धा कर सकता है। मनोरंजन मीडिया और प्रौद्योगिकी ने भारत को दुनिया भर में सामग्री उत्पादकों के लिए एक आदर्श मंच के रूप में स्वीकार किया है। भारत विषय-सामग्री का सबसे बड़ा उपभोक्ता और उत्पादक दोनों बनने की ओर अग्रसर है। हाल ही में, भारत को कान्स में इस साल के 'कंट्री ऑफ ऑनर' के रूप में नामित किया गया है।
भारत की विशालता - और इस महान राष्ट्र के बारे में दुनिया को अभी तक क्या पता चला है - इसका उदाहरण पीएम मोदी द्वारा विश्व के नेताओं के लिए दिए गए उपहारों से है। कोई भी दो उपहार एक जैसे नहीं होते, कोई भी दो उपहार एक ही जगह से नहीं आते। प्रत्येक अद्वितीय है, प्रत्येक अपने सच्चे अर्थों में भारत की सॉफ्ट पावर के महान मोजेइक के एक छोटे-से टुकड़े का प्रतीक है, प्रत्येक एक सभ्यतागत राष्ट्र के रूप में भारत की ऊंचाइयों और उपलब्धियों की महानता का जश्न मनाता है।

भारत आज मंगल और चंद्रमा पर मिशन भेज सकता है, भारत सुपरसोनिक मिसाइल और एयरक्राफ्ट कैरियर बना सकता है, भारत बेहतरीन रचनात्मक चिंतन पैदा कर सकता है, भारत बुनियादी ढांचे की कमी को तेजी से पूरा कर सकता है, भारत अन्य देशों की तुलना में एक महामारी का बेहतर प्रबंधन कर सकता है और अपनी अर्थव्यवस्था को अन्य देशों की तुलना में तेजी से पुन: आगे बढ़ा सकता है।
जैसा कि भारत अपनी स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगांठ मना रहा है, यह माना जाना चाहिए कि इन आठ वर्षों में पीएम मोदी ने आने वाले दशकों के लिए भारत के बेरोक-टोक उत्थान की नींव रखी है। भारत अपने घरेलू मोर्चे पर स्वत: समृद्ध होता रहेगा और राष्ट्रों के समूह में भारत का कद बढ़ता रहेगा। एक प्राचीन सभ्यता के रूप में आज की दुनिया में अपना सही स्थान पा रहे भारत को विश्व गुरु के रूप में स्वीकार किया जाएगा - एक ऐसा आत्मविश्वासी और आत्मनिर्भर राष्ट्र, जो नेतृत्व और प्रेरणा देता है। पीएम मोदी ने सचमुच और निस्संदेह भारत की नियति को बदलने का काम किया है।