20 जनवरी 2026,

मंगलवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Patrika Opinion: दूर तक होगी घोषणा पत्र की कामयाबी की गूंज

यह घोषणा पत्र भारत की ऐसी कूटनीतिक जीत है जिसकी गूंज अंतरराष्ट्रीय मंचों पर दूर तक और देर तक सुनी जाएगी। इस कूटनीतिक जीत का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और हमारी विदेश नीति के चाणक्यों की टीम को जाता है।

2 min read
Google source verification

image

Nitin Kumar

Sep 10, 2023

Patrika Opinion: दूर तक होगी घोषणा पत्र की कामयाबी की गूंज

Patrika Opinion: दूर तक होगी घोषणा पत्र की कामयाबी की गूंज

आम तौर पर शिखर सम्मेलनों में घोषणा पत्र सबसे आखिर में जारी होते हैं। नई दिल्ली में जी-20 शिखर सम्मेलन के पहले ही दिन सभी देशों की सहमति से साझा घोषणा पत्र जारी होना इस दिशा में काफी अहम कहा जा सकता है। रूस-यूक्रेन युद्ध पर जी-20 के बड़े देश जिस तरह से बंटे हुए हैं उसे देखते हुए दो दिन पहले तक यह सवाल बड़ी पहेली बना हुआ था कि साझा घोषणा पत्र पर सभी की सहमति बन पाएगी या नहीं? पिछले साल बाली (इंडोनेशिया) में जी-20 शिखर सम्मेलन के आखिरी दिन कशमकश के बाद साझा घोषणा पत्र जारी तो हो गया पर रूस और चीन ने इससे किनारा कर लिया था। उस घोषणा पत्र में यूक्रेन पर हमले के लिए रूस की कड़ी निंदा दोनों देशों को रास नहीं आई थी।

रूस-यूक्रेन युद्ध का मुद्दा दिल्ली घोषणा पत्र में भी प्रमुखता से शामिल किया गया है। हां, इसकी भाषा ऐसी रखी गई कि न रूस की सहमति में दिक्कत आई और न ही चीन ने कोई अड़ंगा लगाया। यह घोषणा पत्र भारत की ऐसी कूटनीतिक जीत है जिसकी गूंज अंतरराष्ट्रीय मंचों पर दूर तक और देर तक सुनी जाएगी। इस कूटनीतिक जीत का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और हमारी विदेश नीति के चाणक्यों की टीम को जाता है। रूस-यूक्रेन के मुद्दे पर इस टीम ने एक तरफ अमरीका और यूरोपीय संघ को साधा, तो दूसरी तरफ घोषणा पत्र पर रूस और चीन की सहमति भी जुटा ली। रूस-यूक्रेन युद्ध पर भारत ने शुरू से तटस्थ रुख रखा। पश्चिमी देश लगातार भारत पर दबाव बना रहे थे कि यूक्रेन को भी जी-20 शिखर सम्मेलन में बुलाया जाए। भारत ने दबाव से बचकर जो रणनीति अपनाई, उससे भी रूस और चीन की सहमति की राह आसान हो गई। सम्मेलन की यह भी बड़ी उपलब्धि है कि जी-20 के सभी देश भारत की इस अवधारणा से सहमत हैं कि 21वीं सदी शांति और वैश्विक समुदाय के समग्र विकास का युग है। दुनिया को एक परिवार के रूप में एकजुट होना चाहिए। इसीलिए दिल्ली घोषणा पत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संदेश ‘यह समय युद्ध का नहीं है’ को भी शामिल किया गया।

उम्मीद की जानी चाहिए कि यह घोषणा पत्र सभी देशों को दुनिया में शांति की स्थापना की पहल के लिए प्रेरित करेगा। घोषणा पत्र में यह भी संदेश देने की कोशिश रही कि अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में विकासशील देशों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। सभी देश टिकाऊ विकास के लक्ष्य पर काम करेंगे, तभी दुनिया में बेहतरी के रास्ते खुलेंगे। शिखर सम्मेलन में भारत ने ‘एक धरती, एक परिवार, एक भविष्य’ का मंत्र देकर नई संभावनाओं का शंखनाद कर दिया है।