
Bangladesh Violence
मनिष दाभाडे थिंकटैंक द इंडियन फ्यूचर के संस्थापक, जेएनयू में कूटनीति के एसोसिएट प्रोफेसर
बांग्लादेश का घटनाक्रम चौंकाने वाला है। हालात इस कदर बिगड़े कि प्रधानमंत्री शेख हसीना को इस्तीफा देना पड़ा और देश छोड़ दिया। भारत से उन्होंने अनुरोध किया था जिस पर उन्हें 'सुरक्षित मार्ग' की पेशकश की गई। आने वाले दिनों में वे लंदन या अन्य किसी देश में शरण मांग सकती हैं। अमरीका में रह रहे उनके पुत्र सजीब वाजेद जॉय कहते हैं कि उनकी मां ने देश की काया पलट दी। जब उन्होंने सत्ता संभाली थी, तब यह देश विफल राष्ट्र के रूप में जाना जाता था।
आज यह देश एशिया की उच्च विकास वाली अर्थव्यवस्थाओं में माना जाता है।' सजीब वाजेद जॉय ने यह भी कहा कि वे अब फिर कभी राजनीति में नहीं आएंगी। दूसरी ओर, बांग्लादेश के सेना प्रमुख ने सत्ता संभाल ली है और उन्होंने जल्द ही अंतरिम सरकार गठित किए जाने की घोषणा भी कर दी है। राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने शेख हसीना की सबसे प्रमुख राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी पार्टी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी की अध्यक्ष और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया को रिहा करने का आदेश दिया है। कई मामलों में दोषी ठहराए जाने के बाद खालिदा घर में नजरबंद हैं। किसी को जरा भी यह आभास नहीं था कि बांग्लादेश के राष्ट्रपिता माने जाने वाले शेख मुजीबुर्रहमान की एकमात्र उत्तराधिकारी 76 वर्षीय हसीना अपने पिता की स्टैच्यू को तोड़े जाने की गवाह बनेंगी। इस साल जनवरी में शेख हसीना ने अवामी लीग के लिए रेकॉर्ड 5वीं और लगातार चौथी बार जीत हासिल की थी। बांग्लादेश को दक्षिण एशिया में एक उभरती आर्थिक शक्ति के रूप में देखा गया। विशेषकर दुनिया में गारमेंट्स के दूसरे सबसे बड़े निर्यातक देश के रूप में। उनके कार्यकाल में पिछले दशक में प्रति व्यक्ति आय बढ़कर तीन गुना हो गई। हसीना को सैन्य शासन के खिलाफ कट्टर लोकतंत्र समर्थक और धर्मनिरपेक्षता की प्राचीर का निर्माण करने वाले के रूप में देखा गया। उन्होंने इस्लामी कट्टरपंथियों पर कड़ी कार्रवाई की थी। भारत में उन्हें विश्वसनीय रणनीतिक साझेदार और विकास में सहयोगी माना जाता था।
दरअसल, विपक्ष को दबाने के लिए हसीना ने अपने प्रतिद्वंद्वियों को जेल में डालने की रणनीति अपनाई। यह भी आरोप है कि उन्होंने देश को एक पार्टी तंत्र में बदल दिया और सरकारी नौकरियों में अंधाधुंध तरीके से पार्टी सदस्यों को पदस्थापित करा दिया। सरकारी तंत्र भ्रष्टाचार व्याप्त हो गया। पुलिस राज और उससे जुड़ी ज्यादतियों का बढऩा आम बात थी। उच्च बेरोजगारी और मुद्रास्फीति दर 18 फीसदी के आसपास रहने और कोविड से उबरने के बाद की चुनौतियों ने हसीना के प्रति नाराजगी बढ़ गई। एक महत्त्वपूर्ण तथ्य यह भी है कि हसीना को बांग्लादेश में भारत समर्थक और पीएम मोदी की प्रबल समर्थक के रूप में देखा जाने लगा। उन पर बांग्लादेश में रह रहे हिन्दू अल्पसंख्यकों पर नरम रुख अपनाने का भी आरोप लगा।
हसीना का सत्ता से बाहर होना भारत के लिए कई मोर्चों पर झटका है। सबसे महत्त्वपूर्ण है दक्षिण एशिया में भरोसेमंद साझेदार को खोना। अस्थिरता और हिंसा से भरा बांग्लादेश भारत के लिए पूर्वोत्तर क्षेत्र में सिरदर्द बढ़ा देगा। चीन, बांग्लादेश और पाकिस्तान को रक्षा आपूर्ति करता है। आइएसआइ निश्चित रूप से अपनी मौजूदगी और गतिविधियां बढ़ाने की कोशिश करेगी जो भारतीय हितों के खिलाफ है। इस राजनीतिक हिंसा और आर्थिक अनिश्चितता से भारत में घुसपैठ बड़ी चुनौती बन सकती है।
Published on:
07 Aug 2024 09:49 pm
बड़ी खबरें
View Allओपिनियन
ट्रेंडिंग
