
महिलाओं के आत्मबल का साक्षी बनेगा यह वर्ष
ऋतु सारस्वत
समाजशास्त्री और स्तंभकार
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वर्ष 2024 का आगाज हो चुका है। बीता वर्ष एक अमिट कहानी लिखकर गया है। चंद्रयान-3 के सफल प्रक्षेपण ने भारत का मस्तक विश्व पटल पर ऊंचा कर दिया। बीते वर्ष ने उस मिथक को भी एक बार फिर से ध्वस्त कर दिया कि भारतीय महिलाएं विज्ञान के क्षेत्र में कमतर हैं। नया वर्ष कैसा होगा, भविष्य के गर्भ में छुपे इस प्रश्न के उत्तर का प्रारूप 2023 लिख गया है। अतीत के पन्ने भविष्य की कथाओं को गढ़ते हैं। सफलताएं एक लंबा रास्ता तय करके ही प्राप्त होती हैं।
वर्ष 2023 उन कथानकों को लिख गया है जो वर्तमान में साकार होंगे। अंतरिक्ष की दुनिया में जब भारत विश्व भर में सुर्खियां बटोर रहा था तो उस सफलता के नायकों में आधी दुनिया का प्रतिनिधित्व करने वाली महिला वैज्ञानिक भी थीं, जो 2024 में सौर वातावरण का अध्ययन करने के लिए गए अंतरिक्ष यान आदित्य-1 पर अपनी नजरें गड़ाए बैठी हैं। महिला वैज्ञानिकों को शामिल करने के भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के रेकॉर्ड से यकीनन यह वर्ष विज्ञान के क्षेत्र में महिला वैज्ञानिकों के लिए नवीन आयाम स्थापित करेगा।
‘अंतरिक्ष’ को देश की आधी आबादी ने सिर्फ वैज्ञानिक बनकर ही नहीं भेदा है। विश्व में सर्वाधिक देश की 15 प्रतिशत महिला पायलट आज आसमान का सीना चीर रही हैं। उल्लेखनीय यह है कि उनके प्रशिक्षण के लिए सरकारी स्तर पर कोई योजना एवं सुविधाएं प्रस्तावित नहीं हैं। वे अपने आत्मबल और दृढ़ इच्छाशक्ति से यह सिद्ध कर चुकी हैं कि पितृसत्तात्मक समाज में उनको अपना अस्तित्व खोजने के लिए किसी सीढ़ी की आवश्यकता नहीं है। निश्चित ही वर्ष 2024 अधिक संख्या में महिला पायलटों को आसमान में उड़ते हुए देखेगा।
महिलाओं की क्षमता को स्थापित करने के लिए लिखी गई सशक्तता की परिभाषा इस वर्ष और अधिक विस्तार लेगी। सशस्त्र बलों में महिलाओं ने बीते वर्ष नवीन आयाम स्थापित किए और यह वर्ष महिला अग्निवीरों से लेकर उच्च पदस्थ महिला सेना अधिकारियों की साहस की गाथा लिखेगा। वर्ष 2024 उस पल पर भी हस्ताक्षर करने को तत्पर है जिसमें कर्नल के पद पर पदोन्नति के लिए पुरुष और महिला अधिकारियों के लिए एक सामान्य चयन बोर्ड शुरू होगा। कुछ निश्चित परिधि तक सीमित किए जाने वाली पेशेवर दुनिया की कठोर दीवारें 2024 में दरकेंगी। वीरता पुरस्कार प्राप्त करने से लेकर लड़ाकू इकाई में प्रमुख भूमिका निभाने की परंपरा वर्ष 2024 में भी यथावत रहेगी।
आम से लेकर खास तक सभी के मन में यह संशय व्याप्त है कि यह वर्ष लैंगिक बाधाओं के व्यापक नकारात्मक प्रभावों को कैसे संबोधित करेगा। परंतु यह संशय निराधार है क्योंकि लैंगिक समानता की प्रथम और अनिवार्य शर्त नेतृत्व प्राप्ति की गहरी खाई १९ सितंबर २०२३ को पाट दी गई। संविधान (१२८वां संशोधन) विधेयक 2023 संसद के विशेष सत्र में पारित हुआ और राजनीति के सर्वोच्च पायदान पर महिला आरक्षण की घोषणा ने नेतृत्व की समानता के लिए देश के प्रयासों को प्रतिबिंबित किया।
यह वर्ष साक्षी बनेगा महिलाओं के आत्मबल का, नेतृत्वशीलता का, क्योंकि अब आधी आबादी आश्वस्त है कि उन्हें राजनीति में हाशिए पर धकेलने के प्रयास विफल होंगे, ठीक उसी तरह जैसे पंचायतीराज व्यवस्था में प्राप्त महिला आरक्षण के पश्चात हुए थे।
गांवों की तस्वीर महिला नेतृत्व के चलते बदल रही है। यह तय है कि वर्ष 2024 में महिलाएं अधिक मुखर होगीं, उनके अधिकारों की बात होगी, उनसे संबंधित योजनाएं अब केंद्र और राज्य सरकार की प्राथमिकताएं होंगी। बीते दशकों के चुनावों में महिला मतदाताओं ने यह सिद्ध कर दिया है कि वे अपने हितों से भलीभांति परिचित भी हैं और अपने अधिकारों के प्रति सजग भी। यह सर्वविदित सत्य है कि जब भी महिलाएं नेतृत्व की भूमिका में होती हैं तो सामाजिक मुद्दों पर गंभीरता से विचार करती हैं। उनके दृष्टिकोण की व्यापकता, रचनात्मकता और समस्या समाधान की उनकी क्षमता वर्ष 2024 के लिए निर्णायक सिद्ध होंगी।
लैंगिक समानता की अपरिहार्य शर्त आर्थिक सुदृढ़ता है। आर्थिक संबलता निर्णय लेने की क्षमता का विस्तार करती है। कॉरपोरेट जगत से लेकर कृषि क्षेत्र तक संलग्न महिलाएं भारत की अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ कर रही हैं और यह निरंतरता 2024 में यथावत बनी रहेगी। भारतीय न्याय संहिता 2023 में महिलाओं के विरुद्ध अपराधों से संबंधित प्रावधानों की प्राथमिकता, कार्यस्थल पर महिलाओं को एक बेहतर और सुरक्षित वातावरण मुहैया कराएगी। बीता वर्ष जी-20 सम्मेलन में अगर दो आदिवासी महिलाओं को विश्व को संबोधित करने के लिए बुलाता है तो इसके मायने स्पष्ट हैं कि यह वर्ष महिलाओं द्वारा लिखा जाएगा।
Published on:
04 Jan 2024 11:12 pm
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