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Tokyo Olympic 2020 : टोक्यो ओलंपिक भारत के लिए नए प्रतिमान

tokyo olympic 2020 : आधुनिक ओलंपिक खेलों में अपनी हिस्सेदारी के 100 साल के इतिहास में भारत ने पहली बार किसी एथलेटिक्स मुकाबले में स्वर्ण पदक जीता है।

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Indian team in Tokyo Olympics

Indian team in Tokyo Olympics

Tokyo Olympic 2020 : इस बार के ओलंपिक खेल भारत के लिए गौरव, गर्व और गतिशीलता की दृष्टि से अद्भुत अवसर साबित हुए। हमारे खिलाडिय़ों ने 7 पदक जीत कर इतिहास रच दिया। इस इतिहास में उस स्वर्ण पदक की आभा भी है, जो भाला फेंक में नीरज चोपड़ा Neeraj Chopra ने हासिल किया। आधुनिक ओलंपिक खेलों में अपनी हिस्सेदारी के 100 साल के इतिहास में भारत ने पहली बार किसी एथलेटिक्स मुकाबले में स्वर्ण पदक जीता है। इससे पहले दो महान एथलीट मिल्खा सिंह Milkha Singh और पी.टी. उषा P.T. Usha इस पदक से चूक गए थे।

ओलंपिक के एथलेटिक्स मुकाबलों में शुरू से अमरीका, रूस, चीन, जापान, ब्रिटेन, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया आदि देशों का दबदबा रहा है। टोक्यो ओलंपिक में पहली बार संकेत मिले कि भारत भी इन मुकाबलों में चुनौती दे सकता है। वैसे सबसे सुखद संकेत राष्ट्रीय खेल हॉकी को लेकर मिले हैं। ओलंपिक में कभी भारतीय हॉकी की तूती बोलती थी। देश ने ओलंपिक खेलों में सबसे ज्यादा 8 स्वर्ण पदक हॉकी में ही जीते, लेकिन 1980 के बाद हमारी हॉकी टीम ओलंपिक-दर-ओलंपिक कांस्य पदक तक से दूर थी। यह सूखा 41 साल बाद टोक्यो ओलंपिक में खत्म हुआ।

भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने कांस्य जीत कर राष्ट्रीय खेल के प्रति हमारी संभावनाओं में संजीवनी डाल दी है। महिला हॉकी टीम भले कांस्य पदक जीतने से चूक गई, उसने भी संभावनाओं के नए द्वार खोले हैं। भारतीय हॉकी की अंतरराष्ट्रीय हॉकी की पहली पंक्ति में बहाली के लिए टोक्यो ओलंपिक को हमेशा याद रखा जाएगा। भारतीय खिलाडिय़ों की नई नस्ल ओलंपिक में देश के इतिहास को नए सिरे से लिखने को तत्पर नजर आती है।

प्रेम की तरह ओलंपिक पदक भी धन या प्रलोभन से हासिल नहीं होते। हमारे पदक विजेताओं की महान उपलब्धि ने पूरे राष्ट्र को गौरवान्वित तो किया ही है, खेलों के प्रति नई पीढ़ी में प्रेरणा का संचार भी किया है। इस प्रेरणा के साथ प्रोत्साहन भी जुड़ जाए तो देश में खेल संस्कृति के विकास के नए रास्ते खुल सकते हैं। मैदान में अपने कौशल और हौसले से हमारे उन खिलाडिय़ों ने भी बेहतर भविष्य की मुनादी की है, जिनके नाम पदक सूची तक नहीं पहुंच पाए। सरकार के साथ-साथ देश के सभी समृद्ध क्षेत्रों को खेलों के चहुंमुखी विकास के लिए दीर्घकालीन नीतियां बनाने पर ध्यान देना चाहिए। देश में जिस तरह का विकास क्रिकेट का हुआ है, सभी खेलों के उसी तरह के विकास की दरकार है। अगले ओलंपिक में भारत को टोक्यो ओलंपिक से आगे ले जाने के भगीरथ प्रयास अभी से शुरू हो जाने चाहिए।