7 जनवरी 2026,

बुधवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

catch_icon

प्लस

epaper_icon

ई-पेपर

profile_icon

प्रोफाइल

टोक्यो का शहरीकरण मॉडल दुनिया के लिए बना नजीर

शहरीकरण में पिछले 75 सालों के दौरान दोगुनी से अधिक अनुपातिक वृद्धि के साथ त्वरित बदलाव देखने को मिला है। यह बदलाव मूलत: बड़े शहरों में हुआ है। दुनिया में पिछले 50 वर्षों के दौरान 1 करोड़ से अधिक आबादी वाले शहरों की संख्या चौगुनी से अधिक बढ़कर 33 हो गई है और यह निरंतर वृद्धि की ओर है।

3 min read
Google source verification

जयपुर

image

Opinion Desk

Jan 07, 2026

-डॉ. विवेक एस. अग्रवाल, सामाजिक सरोकारों से जुड़े मामलों के जानकार

वर्ष 2025, इस दौरान घटित विशिष्ट घटनाओं के साथ शहरीकरण में हुए बदलाव के लिए भी स्मरण किया जाएगा। हाल ही संयुक्त राष्ट्र द्वारा जारी विश्व शहरीकरण परिदृश्य रिपोर्ट 2025 के अनुसार लगभग सात दशक तक सर्वाधिक जनसंख्या के साथ शीर्ष पर स्थापित टोक्यो शहर, इंडोनेशिया के जकार्ता एवं बांग्लादेश के ढाका के बाद तीसरे स्थान पर खिसक गया। इसके पीछे जकार्ता और ढाका में बढ़ती अनियंत्रित आबादी के साथ टोक्यो द्वारा शहरी घनत्व को कम करने के लिए उठाए गए सार्थक कदम उत्तरदायी रहे हैं। यह परिवर्तन यकायक आया हो ऐसा नहीं है, इसके लिए जापान ने कठोर एवं दूरगामी यत्न कर शहरों को जीने लायक बनाने के उद्देश्य से सोची समझी रणनीति के तहत टोक्यो शहर के विकास संबंधी कदम उठा स्थिरता हासिल की है।

उल्लेखनीय तथ्य यह भी है कि मिस्र के काहिरा के अतिरिक्त सर्वाधिक आबादी वाले दस शहरों में भारत के दिल्ली एवं कोलकत्ता समेत 9 शहर एशिया महाद्वीप के हैं। शहरीकरण में पिछले 75 सालों के दौरान दोगुनी से अधिक अनुपातिक वृद्धि के साथ त्वरित बदलाव देखने को मिला है। यह बदलाव मूलत: बड़े शहरों में हुआ है। दुनिया में पिछले 50 वर्षों के दौरान 1 करोड़ से अधिक आबादी वाले शहरों की संख्या चौगुनी से अधिक बढ़कर 33 हो गई है और यह निरंतर वृद्धि की ओर है। बड़े शहर आबादी के मामले में घने होते जा रहे हैं तो छोटे कस्बों से आबादी कम होती जा रही है। संभवतया शहरों की चकाचौंध कस्बों से शहरों के मध्य हो रहे संक्रमण के लिए उत्तरदायी है। गांवों से कस्बों और कस्बों से बड़े शहरों की ओर आबादी लगातार पलायन कर रही है। यदि यही गति चलती रही तो वह दिन दूर नहीं जब गांव वीरान हो जाएंगे और शहर में पांव रखने की भी जगह नहीं होगी।

सत्तर वर्षों तक अधिकतम आबादी का बोझ ढोने वाले टोक्यो शहर ने भविष्य की आशंकाओं एवं अनुपलब्धताओं के मद्देनजर अनुकरणीय प्रयासों के जरिए संक्रमण पर विराम लगाते हुए शहरों से दूर बसने पर प्रोत्साहन योजनाओं को मूर्तरूप दिया। उदाहरण के तौर पर शहर छोड़ गांवों में बसने वाले परिवारों को सरकार की ओर से प्रति बच्चे 10 लाख जापानी येन तक प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाती है। आवासीय ही नहीं, वाणिज्यिक गतिविधियों को भी टोक्यो शहर की सीमा से दूर पुनस्र्थापित करने के लिए कर राहत, कम दरों पर भूमि समेत वित्तीय अनुदान भी प्रदान किए गए। सरकार ने प्रोत्साहन राशि की नीति लागू करने से पूर्व आधारभूत संरचना को सुदृढ़ करने का कार्य किया। सर्वप्रथम, टोक्यो शहर की परिधि से दूर तक ट्रांजिट त्वरित रेल नेटवर्क की स्थापना की गई ताकि रोजगार या व्यवसाय के लिए आने-जाने हेतु सुगम यातायात सुलभ हो। रेल नेटवर्क के साथ-साथ भूमिगत पैदल पथों का जाल भी बुना गया ताकि पदयात्री सुगमता से चल सकें। शहरी प्रदूषण की समस्या पर निजात पाने के लिए भी कारगर कदम उठाते हुए हरित क्षेत्र विकास प्रोत्साहन को प्रभावी रूप से क्रियान्वित किया गया। इस कारण से विस्थापित होने वाले आवासियों को उचित पुनर्भरण करते हुए उचित स्थलों पर पुनस्र्थापित किया गया।

संभवतया, जापान विशेषकर टोक्यो दुनिया की उन चुनिंदा जगहों में है जहां वाहन रखना और उसमे परिवहन अत्यंत महंगा है, ताकि भरोसेमंद सार्वजनिक परिवहन का अधिकतम उपयोग किया जाए। इन सबके साथ ही, परिधि क्षेत्र स्थित स्टेशन को मिश्रित उपयोग यथा आवासीय, व्यावसायिक, रिटेल क्षेत्र के रूप में विकसित किया गया, ताकि आबादी का ठहराव हो सके, अन्यथा हर कार्य का केंद्र टोक्यो तक ही सीमित था। प्रचलित गति से अगले 25 वर्षों में 20 लाख आबादी की घटत के साथ शीर्ष पर रहने वाला टोक्यो विश्व की सबसे अधिक आबादी वाले शहरों की सूची में वर्तमान तीसरे से सातवें स्थान पर आ जाएगा। यह तथ्य नकारा नहीं जा सकता कि शहरीकरण समय की आवश्यकता है, किंतु विकास एवं घनत्व का गिने चुने स्थानों पर केंद्रित होना किसी भी रूप में उचित नहीं है। भारत में बढ़ते शहरीकरण के चलते आबादी के घनत्व को परिधि क्षेत्र में बांटा जाना समय की बड़ी मांग है, ताकि बेहतर वातावरण के साथ जीवनयापन हो सके।