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ट्रैवलॉग : दिल्ली के नगरीय जीवन की पहली कड़ी राय पिथौरा किला

बताया यह जाता है कि जहां अभी किला राय पिथौरा है वहां पहले लाल कोट नामक प्राचीन नगर हुआ करता था।

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Patrika Desk

Aug 10, 2021

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- संजय शेफर्ड, ट्रैवल ब्लॉगर, मुश्किल हालात में काम करने वाले दुनिया के श्रेष्ठ दस ब्लॉगर में शामिल

दिल्ली कितनी ही बार उजड़ी, कितनी ही बार बसाई गई। कई बार इसकी खूबसूरती को रौंदने की कोशिश हुई, यह हर बार पहले से ज्यादा खूबसूरत रूप में जिंदा हो उठी। अब भी यह शहर कई तरह के रहस्यों में लिपटा दिखाई देता है। इसके इतिहास की कई परतें हैं । दिल्ली एक नहीं, बल्कि सात शहरों से मिलकर बना है। ये शहर अलग-अलग समय पर अलग-अलग शासकों ने अलग-अलग हिस्सों में बसाए थे, जिनकी कडिय़ां खंडहरों के रूप में अब भी अपने जीवंत रूप में मौजूद हैं।

अगर आप घुमक्कड़ी के शौकीन हैं और इतिहास को जानने-समझने की दिलचस्पी रखते हैं तो दिल्ली के मालवीय नगर मेट्रो स्टेशन के पास दिल्ली की यह प्राचीन विरासत आपको काफी अच्छी लगेगी। इस जगह पर कम लोग पहुंचते हैं, परन्तु इतिहास के पन्नों में इसका बहुत ही खास महत्त्व है। दरअसल, हम बात कर रहे हैं किला राय पिथौरा की। हालांकि अब किले के नाम पर यहां कुछ खास मौजूद नहीं है। कुछ अवशेष बचे हैं । साथ ही बची है बहुत ही लम्बी चौड़ी और मोटी दीवार, जो हमें दिल्ली के अतीत की स्मृतियों में ले जाती है। मैं उसी अतीत की स्मृतियों को खंगालने का प्रयास कर रहा हूं। जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है कि किला राय पिथौरा का निर्माण राय पिथौरा यानी पृथ्वीराज चौहान ने कराया था।

बताया यह जाता है कि जहां अभी किला राय पिथौरा है वहां पहले लाल कोट नामक प्राचीन नगर हुआ करता था। हालांकि इस बात को लेकर कोई एक मत नहीं है। कुछ लोग कहते हैं कि लालकोट एक अलग नगर था। कुछ लोगों का यह भी मानना है कि इसी लालकोट को पृथ्वीराज चौहान ने विस्तार देकर नया शहर किला राय पिथौरा बनाया था। वास्तविकता कुछ भी हो, पर जब भी इस किले का जिक्र होता है, तो किसी न किसी बहाने से लालकोट का जिक्र आ ही जाता है।

इस तरह देखा जाए, तो बिना लालकोट के जिक्र के किला राय पिथौरा का इतिहास अधूरा है। सच्चे अर्थों में लालकोट ही वह नगर है, जो इस शहर को पूरा करता और इसे दिल्ली का प्रथम नगर होने का गौरव दिलाता है।

किला राय पिथौरा के अवशेष सिर्फ मालवीय नगर ही नहीं, बल्कि अब भी दिल्ली के साकेत, महरौली, किशनगढ़ और वसंत कुंज क्षेत्रों में देखे जा सकते हैं। इस किले में कभी कुल 28 बुर्ज हुआ करते थे, जो कि वर्तमान में नष्ट से हो चुके हैं। अब इसमें किले के नाम पर कुछ बुर्ज और दीवारें ही बची हैं।

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