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Leadership: कर्मयोग से समझें लीडरशिप

‘इंडियन थॉट ऑन ड्यूटी एथिक्स’ के अनुसार, किसी को अपने कार्य को तत्काल परिणाम पर आधारित नहीं करना चाहिए, बल्कि यह इस बात पर आधारित होना चाहिए कि क्या करना सही है या प्रदर्शन करने का कर्त्तव्य है। यह उन्हें दुविधाओं और अनिर्णय से मुक्त करता है।

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जयपुर

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Patrika Desk

Dec 18, 2022

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कर्मण्यवादाधिकारस्ते शब्द चार शब्दों के योग से बना हुआ शब्द है द्ग ‘कर्मण्ये’ जिसका अर्थ है कर्म (कर्त्तव्य), ‘एव’ जिसका अर्थ है ‘केवल’, ‘अधिकार’ जिसका अर्थ है ‘सही’, और ‘अस्ते’ जिसका अर्थ है ‘होना’। इस प्रकार इसका अर्थ है ‘अपना कर्त्तव्य करना ही आपका एकमात्र अधिकार है। इसी तरह, ‘मा फलेषु कदाचन’ का अर्थ है कि आपके कर्मों के ‘फल’ पर आपका कभी अधिकार नहीं है। अर्थात, यह श्लोक बताता है कि अपना कर्त्तव्य करना ही आपका एकमात्र अधिकार है, लेकिन फल पर कभी आपका अधिकार नहीं होता। न तो आपको केवल फल के लिए अपना कर्त्तव्य करना चाहिए, और न ही अपने कत्र्तव्य से विमुख होना चाहिए। ‘इंडियन थॉट ऑन ड्यूटी एथिक्स’ के अनुसार, किसी को अपने कार्य को तत्काल परिणाम पर आधारित नहीं करना चाहिए, बल्कि यह इस बात पर आधारित होना चाहिए कि क्या करना सही है या प्रदर्शन करने का कर्त्तव्य है। यह उन्हें दुविधाओं और अनिर्णय से मुक्त करता है।