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पति-पत्नी के रिश्ते की गहराई को समझिए

आलोक जैन, एडवोकेट

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जयपुर

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Neeru Yadav

Jun 29, 2025

विवाह टूटने का अर्थ तलाक, बिना तलाक अलग रहना, विवाहेत्तर संबंधों का बढऩा, इसको लेकर होने वाली हत्याएं और आत्महत्याएं होने से कहीं अधिक है। एक-दूसरे के प्रति बढ़ती नापसंदगी, एक दूसरे के प्रति ही नहीं जीवन से ही प्रेम का निरंतर घटना, पति-पत्नी का पवित्र सबसे ज्यादा खुशी देने वाला रिश्ता केवल किसी तरह से बर्दाश्त करने भर का रह जाना, एक दूसरे से अधिकतम दूर रहना पसंद करने लगना,पारस्परिक असहमति, एक दूसरे को सहन नहीं कर पाने की घटनाओं का तेजी से बढऩा,जीवन से मधुर स्मृतियों का मिटने लगना केवल परस्पर क्रूर व्यवहार की कड़वी यादें दोहराते जाना आदि ऐसा वैवाहिक जीवन भी विवाह टूटने जैसा ही है।
यह सच है कि आदर्श पति पत्नी की केवल परिकल्पना भर की जा सकती है लेकिन पति-पत्नी के बीच खुशी और प्यार का ग्राफ यदि तेजी से गिर रहा है तो यह एक गंभीर चिंता का विषय है। मनोवैज्ञानिक शोध करेंगे तो निश्चित पाएंगे कि जीवन में हर स्तर पर गिरावट, अपराध, किसी भी तरह की चूक से होने वाली दुर्घटनाओं के पीछे भी बड़ा कारण दाम्पत्य खुशी और शान्ति का अभाव है निरंतर बढ़ रहा दाम्पत्य तनाव है।
पति पत्नी के रिश्ते को पोषण सिर्फ पति और पत्नी ही दे सकते हैं, केवल वे ही इसे सींच सकते हैं अन्य कोई नहीं। विवाह और इस रिश्ते की समझ नहीं होना ही इस रिश्ते के टूटने और विफल होने का सबसे बड़ा कारण है।
विवाह टूटने का एक बड़ा कारण उद्देश्यपरक संवाद, (ऐसा संवाद जो सचमुच एक दूसरे के, सबके हित के लिए ही है) का अभाव होना है, संवाद का नहीं होना है। आग्रहों-पूर्वाग्रहों रहित, निष्पक्ष, परस्पर प्रेम और समाधान के लिए किया जाने वाला संवाद जीवन को जानने-समझने और भली-भांति जीने में मदद करता है। आज वन-टू-वन, स्वतंत्र खुला और स्वस्थ संवाद कोई पसंद नहीं करता।
संवाद होता भी है तो आग्रह-पूर्वाग्रह, राग-द्वेष, पक्ष-विपक्ष संवाद को विपरीत दिशा में ले जाते हैं, ऐसे में संवाद का नहीं होना और गलत दिशा में होना भी विवाह टूटने का बड़ा कारण बन जाता है।
विवाह टूटने का एक और बड़ा कारण ज्ञान भीतर से, अपनी आत्मा से लेने की जगह बाहर से लेते रहना है। वहीं, पति पत्नी दोनों के पारस्परिक रिश्ते के अलावा के अन्य सभी रिश्तों की भी सही समझ नहीं होना भी बड़ी वजह है। पति और पत्नी दोनों, पति या पत्नी किसी के भी द्वारा दूसरे रिश्ते/रिश्तों की जायज-नाजायज सभी तरह की अपेक्षाओं/आकांक्षाओं को बिना समुचित विवेक का इस्तेमाल किए बहुत अधिक महत्त्व दिया जाना भी विवाह टूटने और विफल होने का एक बड़ा कारण होता है।
विवाह रूपी संस्था में विश्वास जमाना और बनाए रखना युगल दम्पती पर ही निर्भर करता है चाहे वे विवाह करने जा रहे हैं या विवाहित जीवन की चुनौती ले चुके हैं। कदम-कदम पर एकदम नए अहसास और नई अनुभूतियां होती हैं, परस्पर सहयोग भी होता है, विरोध भी होता है, लड़ाई-झगड़ा भी होता है, प्यार भी होता है। लगता है सहयोग, खुशी और आनन्द के लिए अभी बहुत कुछ बाकी है, खुद समझ नहीं पाते तो एक काउंसलर की जरूरत महसूस होती है, जिसे हम इस क्षेत्र का दोस्त कह सकते हैं। काउंसलर विवाह करने जा रहे/विवाहित युगल को विवाह के संबंध में सबकुछ जानने समझने में मदद करता है और अपने आप अपने निर्णय लेने में मदद करता है जिन पर विवाहित जीवन की नींव और खुशी दोनों ही टिकी है। आज विवाह को समझने और इसका आनंद लेने में मदद करने के लिए विवाह संस्था में विश्वास करने वाले युगलों को इस दिशा में शिक्षित करने की महत्ती आवश्यकता है, जिससे जो युगल विवाह जैसी पवित्र संस्था में विश्वास की जगह, ‘लिव इन रिलेशनशिप’ जैसे संबंधों को तरजीह देने लगे हैं, का भी विवाह रूपी संस्था में फिर से विश्वास जमे और भी प्रेम के इस पवित्र संबंध को अपनाने लगें।
स्त्रियों में से स्त्री को और पुरूषों में से पुरूष को कैसे प्रकट करें। यह आज का सबसे बड़ा प्रश्न है। परस्पर वर्चस्व की लड़ाई में उलझकर आज के युगल अपना वर्चस्व ही नहीं वजूद भी खत्म कर रहे हैं।