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Leadership: उभयदक्षता के चरणों को समझें

नए विचारों को अपनाना, सहयोग करना और उदाहरण पेश करना हैं सफलता की कुंजी

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Nitin Kumar

Nov 27, 2023

Leadership: उभयदक्षता के चरणों को समझें

Leadership: उभयदक्षता के चरणों को समझें

प्रो. हिमांशु राय
निदेशक, आइआइएम इंदौर
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किसी भी संगठन में नए विचारों और प्रयोगों के लिए खुलापन रखना, यानी अन्वेषण, और उपलब्ध संसाधनों का उचित प्रयोग कर पाना अर्थात प्रयोजन - दोनों भूमिकाओं में संतुलन होना उभयदक्षता से लैस नेतृत्व शैली का आधार है। अब सवाल यह है कि ‘एम्बीडेक्सट्रस लीडरशिप’ नामक इस शैली की दोनों भूमिकाओं को निभाने के लिए जरूरी संतुलन कैसे प्राप्त किया जाए। इसका उत्तर देती है व्यावहारिक चरणों की एक शृंखला -
स्पष्ट लक्ष्य व उद्देश्य निर्धारित करना: इस नेतृत्व शैली में स्पष्टता बहुत अहम है। जरूरी है कि लीडर स्वयं व सबके लिए लक्ष्य व उद्देश्य स्पष्ट परिभाषित करें। सटीक दृष्टिकोण स्थापित करें ताकि सभी समझें कि वे संगठन को कहां, किस दिशा में ले जाना चाहते हैं। यह दृष्टि मार्गदर्शक के रूप में कार्य करती है, और हर कदम, निर्णय, अन्वेषण और प्रयोजन के दोहरे आयामों की ओर उन्मुख करती है।
क्रॉस-फंक्शनल टीमों की स्थापना: उभयदक्षता में संतुलन के लिए जरूरी है कि एक संगठन में क्रॉस-फंक्शनल टीमों की स्थापना हो यानी ऐसी टीमें जिनमें विभिन्न कार्यात्मक विशेषज्ञता वाले कर्मचारी शामिल हों और यह समूह एक ही लक्ष्य की ओर काम करे। इन प्रतिभाओं का सामंजस्य ही नवाचार को प्रेरित करता है, लक्ष्य में दक्षता सुनिश्चित करता है और अन्वेषण और प्रयोजन दोनों को एक साथ संभव करने वाली संस्कृति को बढ़ावा देता है।
प्रयोग अपनाने, उससे सीखने को प्रोत्साहित करना: एक उभयदक्षता शैली वाले लीडर को निरंतर प्रयोग करने और सीखने के लिए अपनी टीमों को प्रोत्साहित करना चाहिए। यह ऐसी यात्रा है जो नेतृत्व के पारंपरिक प्रतिमानों से परे है। इसमें परिवर्तन को अपनाना व यथास्थिति को चुनौती देना प्रतिष्ठित गुण हैं।
नियमित रूप से रणनीतियों की समीक्षा और समायोजन: इस नेतृत्व शैली में रणनीतियां लचीली होती हैं, जो निरंतर मूल्यांकन व समायोजन के अधीन होती हैं। लीडरों को तय लक्ष्यों की निरंतर समीक्षा करनी चाहिए। यह सतर्कता सुनिश्चित करती है कि संगठन उभरते परिदृश्य के प्रति उत्तरदायी बना रहे।
उदाहरण के आधार पर आगे बढ़ना: लीडरों को अपने संगठनों में उन सिद्धांतों को स्वयं अपनाना चाहिए, जिन्हें वे स्थापित करना चाहते हैं। स्वयं कार्य निष्पादित कर के, और सिद्धांतों को अपना कर उदाहरण पेश कर के नेतृत्व करना ही उभयदक्षता का आधार है।
इन चरणों को समझकर और इनके आधार पर अपना कौशल विकसित कर के लीडर एक मार्गदर्शक के रूप में निरंतर नवाचार और स्थिरता के लिए अपना और अपने अधीनस्थों का मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं।