
वैक्सीन पासपोर्ट बनेंगे विवाद की नई वजह
मोली रॉबट्र्स (स्तम्भकार) द वाशिंगटन पोस्ट
वैक्सीन पासपोर्ट के बारे में एक तथ्य जानना जरूरी है कि यह पासपोर्ट नहीं है, बल्कि स्मार्टफोन कोड के रूप में एक प्रकार का प्रमाण पत्र है जो बताता है कि अमुक पासपोर्ट धारक को कितनी बार वैक्सीन के इंजेक्शन लग चुके हैं और जिसे स्कैन किया जा सकता है। दूसरा जरूरी तथ्य यह कि अभी तक ये अस्तित्व में नहीं आए हैं, कम से कम सराहनीय स्तर पर तो नहीं। वाइट हाउस कुछ कंपनियों के साथ मिल कर संभावित उत्पादों के लिए मानदंड विकसित करने की तैयारी कर रहा है। लेकिन सरकार ऐसी कोई छोटी ब्लू बुक तैयार नहीं कर रही, जिस पर एन-95 मास्क लगाए सुनहरे रंग का ईगल अंकित हो और सभी नागरिक इसे कहीं भी जाते वक्त अपने साथ रखें।
वैक्सीन पासपोर्ट का ताल्लुक अंतरराष्ट्रीय यात्राओं से कुछ खास नहीं है, बल्कि वहां से है जहां हम हैं, वहां की जगहों जैसे रेस्टोरेंट, बॉलपार्क से है और व्यापार के उन केंद्रों से है जो जनता के लिए फिर से अपने दरवाजे खोलना चाहते हैं, वह भी संक्रमण का शिकार हुए बिना। वाशिंगटन पोस्ट में हाल ही प्रकाशित एक रिपोर्ट में कहा गया था कि कोविड प्रमाण पत्र के 17 नमूनों पर काम चल रहा है। इससे लगता है कि समस्या नागरिकों की केंद्रीकृत निगरानी से कहीं अधिक नियमों के असमंजस को लेकर है, जिन्हें लागू करना मुश्किल कार्य होगा।
वैक्सीन पासपोर्ट को लेकर अगली अहम जानने लायक बात यह है कि इनके चलते जंग छिडऩा तय है, जैसी कि इन दिनों डॉनल्ड ट्रंप जूनियर और कुछ डेमोक्रेट्स के बीच ट्विटर पर छिड़ी है। बात '1940 के नाजी जर्मनीÓ से निकल कर 'उदारवाद की तुलना में लेनिनवाद की ओर बाइडन के रुझान' तक आ पहुंची। बहस जारी है कि ये पासपोर्ट निजता का उल्लंघन करेंगे या नहीं अथवा ये अनिवार्य हैं या नहीं। परन्तु कहीं न कहीं सब इतना तो मानते है कि ये हमें महामारी से बचाएंगे। न तो सरकार, न कांग्रेस इन्हें अनिवार्य करेगी और न ही प्रत्येक व्यक्ति का वैक्सीन स्टेटस ट्रैक किया जाएगा। निजी कंपनियों की दिलचस्पी यह पता लगाने में अधिक रहेगी कि हमें इंजेक्शन लगा है कि नहीं ताकि अंतत: वे उतनी कमाई कर सकें जितनी कि आम तौर पर वे करती रही हैं। यहां असमानता संबंधी चिंताएं भी उभर कर सामने आएंगी, जब तक कि मताधिकार से वंचित और कम संख्या में स्मार्टफोन वाले वर्ग को कम शॉट मिलेंगे। इसी तरह, हालांकि यह सही है कि वैक्सीन के लिए साइन-अप करना वैकल्पिक होगा लेकिन यदि दुनिया में हर खुशी देने वाली बात का सीधा जुड़ाव इस साइन-अप से हो, तो विकल्प की अवधारणा अर्थहीन है। यह तो एक तरह से दबाव बनाना है।
फिलहाल यह तय नहीं है कि कब, कहां और किसके समक्ष यह पासपोर्ट दिखाना होगा, इसलिए लोग यही कयास लगाने में जुटे हैैं कि उनके लिए क्या उचित होगा? लोगों को आशंका है कि वैक्सीन पासपोर्ट के अभाव में हो सकता है उनका प्रवेश हर जगह प्रतिबंधित कर दिया जाए, उन्हें अगले दिन के नाश्ते का सामान खरीदने के लिए ग्रोसरी स्टोर में प्रवेश न करने दिया जाए या किसी पंक शो के प्रवेश द्वार से लौटा दिया जाए।
वैक्सीन पासपोर्ट अब मास्क जितने ही अनिवार्य हैं या यूं कहें कि ये मास्क का नया रूप हैं। आप कहां हैं, क्या पढ़ते हैं और कैसे वोट करते हैं, इस आधार पर ये या तो तानाशाह का बैज होगा या फिर ऐसा बैज जिसे धारण करने वाला न्याय परायण होगा। या तो ये हर समस्या का हल साबित होंगे या किसी का भी नहीं। अब ये ही नया लॉकडाउन हैं, ये ही नया क्वारंटीन: भले ही हम में से अधिकांश सेमी-आइसोलेटिड हैं, पर ये दोनों शब्द ही हमारी मौजूदा स्थिति को परिभाषित करते हैं। बीच का रास्ता कोई नहीं अपनाना चाहता। वैक्सीन पासपोर्ट फिलहाल अस्तित्व में नहीं हैं, लेकिन अमरीका जैसे विभाजित देश में इसका विवाद का विषय बनना तय है।
Published on:
01 Apr 2021 09:27 am
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