
आपकी बात, जलवायु परिवर्तन के क्या-क्या दुष्प्रभाव हो रहे हैं?
बड़ा खतरा
धरती का तापमान बढ़ने से विनाश की स्थिति आ सकती है। तापमान में 1.5 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि होने पर दुनिया अपने आधी पर्वतीय ग्लेशियरों को खो देगी। उत्तर पश्चिम और पूर्वी भारत में हल्की बारिश और ओलावृष्टि ने जिस तरह गेहूं की फसल को बर्बाद किया इस भयावह स्थिति को देखकर कहा जा सकता है जलवायु परिवर्तन खाद्य सुरक्षा को भी प्रभावित कर रहा है। नीति निर्माताओं के लिए यह चेतावनी भी है।
सतीश उपाध्याय, मनेंद्रगढ़, छत्तीसगढ़
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बढ़ रही है गर्मी
जलवायु परिवर्तन के कारण कहीं बेतहाशा गर्मी बढ़ रही है, तो कहीं बेमौसम बरसात व बर्फ पड़ रही है। बढ़ती गर्मी से हरे-भरे जंगल भी खाक हो रहे हैं। इसकी वजह से पृथ्वी का पूरा पारिस्थितिकी तंत्र गड़बड़ाता जा रहा है। कई जीव-जंतुओं की प्रजातियां खत्म होने की कगार पर हैं। समद्र के जल स्तर में वृद्धि होने से कई शहरों पर डूबने का खतरा मंडरा रहा है। इसमें कहीं न कहीं मानव ही दोषी है। जंगलों की अंधाधुंध कटाई की जा रहीं है।
-डॉ. विनोद कुमार शांडिल्य, हिण्डौन सिटी, करौली
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पेरिस समझौते की पालना की जाए
जीवाश्म ईंधन के बढ़ते प्रयोग से बढ़े वैश्विक तापमान से जलवायु परिवर्तन का दुष्प्रभाव देखा जा रहा है, जिनमें ग्लेशियर पिघलना, चक्रवातों की संख्या में वृद्धि, कनाडा के जंगलों में आग लगना, कैलिफोर्निया में बाढ़, इटली में बाढ़, वर्षा की अनियमितता, अतिवृष्टि, अल्पवृष्टि, हीटवेव का प्रकोप, अल नीनो-ला नीनो का प्रभाव, जैव विविधता का नुकसान जैसे प्रभाव देखे जा रहे हैं। इनको नियंत्रित करने का एकमात्र उपाय पेरिस समझौते का पालन करते हुए तापमान को पूर्व औद्योगिक समय से 1.5 डिग्री तक नियंत्रित करना है।
- डॉ. राजीव कुमार, शोधार्थी, राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर
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मानव जीवन पर नकारात्मक प्रभाव
वैश्विक तापमान बढ़ रहा है। जलवायु परिवर्तन का प्राणियों के स्वास्थ्य एवं वनस्पति पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है। मानव का स्वास्थ्य बिगड़ रहा है। वायु के अशुद्ध होने से वातावरण में जहरीली गैसों के कारण अनेक सांस की बीमारियां हो रही हंै। अनेक प्रकार की विषम रोग उत्पन्न हो रहे हैं। बीमारियों का स्वरूप बदल रहा है। बीमार लोगों की संख्या बढ़ रही है। अनेक प्रजातियों में अनुवांशिक बदलाव आ रहा है ।कुछ प्रजातियां लुप्त होती जा रहे हैं। मनुष्य अपने विनाश की ओर अग्रसर हो रहा है, क्योंकि जलवायु परिवर्तन का मानव पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।
-मोदिता सनाढ्य, उदयपुर
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तूफानों की तीव्रता बढ़ी
जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभाव बड़े व्यापक हैं। प्रत्यक्ष रूप से बर्फ पिघलना, समुद्र का जल स्तर बढऩा, मौसम में व्यापक परिवर्तन, तापमान में वृद्धि , तूफानों की संख्या और तीव्रता में वृद्धि आदि दिखते हैं।
-विवेक रंजन श्रीवास्तव, भोपाल
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बिगड़ गया मौसम चक्र
जलवायु परिवर्तन का सबसे बड़ा प्रभाव तो यह पड़ा है कि अब मौसम बहुत ही अनिश्चित हो गया है। कभी तेज गर्मी, अचानक वर्षा तो कभी आद्रता, आंधी, तूफान तो कभी मौसम सुहावना। अचानक मौसम का पैटर्न बदल रहा है। यही नहीं जिन क्षेत्रों में जून के माह में भारी वर्षा होती थी, वहां अब सूखा पड़ रहा है और वे राज्य जहां इस मौसम में भीषण गर्मी पड़ती थी, वहां भारी बारिश और बाढ़ देखने को मिल रही है। अलनीनो जो कभी 6-7 सालों में एक बार आता था, अब हर साल आने लगा है। तापमान में वृद्धि से समुद्री जल स्तर बढ़ गया है। ग्लोबल वार्मिंग, कार्बन उत्सर्जन से अनेक पर्यावरणीय प्राकृतिक आपदाएं भूस्खलन, भूकंप, बाढ़ जैसी आपदाएं आ रही हैं। अब तो मौसम कब बदल जाए पता ही नहीं चलता?
-एकता शर्मा, जयपुर
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आ रहे हैं भीषण चक्रवात
जलवायु परिवर्तन के कारण ही प्रकृति व तापमान में अवांछनीय परिवर्तन हो रहे हैं, जिसके कारण बाढ़, सूखा, खाद्य पदार्थों की असुरक्षा व वायु की गुणवत्ता में कमी आदि समस्याएं उत्पन्न हो रही हंै। बिपरजॉय जैसे चक्रवात भी जलवायु परिवर्तन के कारण ही आते हैं।
-बजरंग सिंह कुड़ी, खंडेला, सीकर
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खाद्य उत्पादन में कमी
जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम के खराब होने की समस्या लगातार बढ़ती जा रही है। बाढ़, सूखा तथा आंधी जैसी आपदाओं में वृद्धि होने से खाद्य उत्पादान में कमी, भुखमरी और कुपोषण का कारण बन रही है, जिससे मनुष्य के स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है
- प्रियंका महेश्वरी, जोधपुर
Published on:
05 Jul 2023 04:57 pm
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