
आत्म-दर्शन : क्या है महासमाधि ?
सद्गुरु जग्गी वासुदेव
महासमाधि वह अवस्था है, जिसमें व्यक्ति अपनी इच्छा से अपना शरीर छोड़ देता है। जीवनचक्र पूरा हो जाता है। अब पुनर्जन्म का कोई सवाल ही नहीं उठता। ये पूरी तरह से विसर्जन है। आप कह सकते हैं कि ये व्यक्ति वास्तव में अब नहीं है। हम जब मुक्ति, निर्वाण या मोक्ष की बात करते हैं, तो यही होता है - अस्तित्व के बोझ से ही मुक्ति। वह आखिरी आजादी है, अंतिम मुक्ति, क्योंकि जब तक आपका अस्तित्व है, तब तक आप एक या दूसरी तरह से बंधे हुए होते हैं। अगर आप भौतिक रूप से, शारीरिक रूप से हैं, तो ये एक तरह का बंधन है।
अगर आप भौतिक शरीर छोड़ देते हैं और किसी दूसरी तरह से रहते हैं, तो ये फिर भी दूसरी तरह का बंधन है। हर वह चीज जो अस्तित्व में है, वह किसी न किसी नियम से बंधी है। मुक्ति का मतलब है कि आपने सभी नियमों को, कायदों को तोड़ दिया है और सभी नियम तभी तोड़े जा सकते हैं, जब आपका अस्तित्व ही नहीं रहता। निर्वाण ज्यादा सही, ज्यादा उपयुक्त शब्द है, क्योंकि निर्वाण का मतलब है - अस्तित्व न होना। जब कोई अस्तित्व ही नहीं है, तब आप मुक्ति से भी मुक्त हैं, क्योंकि मुक्ति भी एक तरह का बंधन है।
Published on:
08 Jul 2021 11:16 am
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