
आपकी बात, लोकतंत्र की रक्षा में राजनीतिक दलों की क्या भूमिका है?
लोकतंत्र में राजनीतिक दलों की भूमिका
लोकतंत्र की रक्षा में राजनीतिक दलों की महत्वपूर्ण भूमिका है, क्योंकि राजनीतिक दल लोकतंत्र का अभिन्न अंग हैं। राजनीतिक दलों से जुड़े लोग ही संसद और विधानसभा में जाकर लोकतंत्र को मजबूत करने का काम करते हैं। वे ही नीति निर्माता बनते हैं। इसलिए राजनीतिक दलों की लोकतंत्र में भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। राजनीतिक दलों से जुड़े लोग साफ सुथरी छवि के हों, तो लोकतंत्र मजबूत होता है।
-नरेन्द्र शोभागमल मेघवाल, कोटा
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भड़काऊ बयानबाजी न करें
लोकतंत्र में अभिव्यक्ति की आजादी है, परन्तु राजनीतिक दल इसका फायदा उठाकर एक-दूसरे पर अमर्यादित शब्दों की बौछार करते हैं। जनता के बीच भड़काऊ भाषण और गलत बयानबाजी करते हैं, जिससे लोकतंत्र अपमानित होता है। लोगों के बीच फूट डालने और हिंसा करवाने से तो देश की एकता और शांति भंग होती है। विकास अवरुद्ध हो जाता है। एक-दूसरे पर छींटाकशी करने से न उनका भला होगा और न ही देश का। अत: राजनीतिक दलों को आपसी मतभेद को किनारे कर एकजुट होकर देशहित के लिए कार्य करना चाहिए, तभी लोकतंत्र की रक्षा हो सकती है। वे लोकतंत्र को मनमानी का तंत्र बनाने का प्रयास न करें।
-विभा गुप्ता, मैंगलोर
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सत्ता ही लक्ष्य
लोकतंत्र की रक्षा राजनीतिक दल नहीं कर रहे हैं। राजनीतिक दल लोकतंत्र का मजाक बना रहे हैं। जुगाड़ से सरकारें बनाना लोकतंत्र की हत्या ही है। जन प्रतिनिधियों की बाड़ा-बंदी से लोकतंत्र जिंदा नहीं रह सकता। राजनीतिक दलों को केवल सत्ता चाहिए। किसी भी कीमत पर सत्ता हथियाना ही उनका उद्देश्य रह गया है।
- रणजीत सिंह भाटी,, मंदसौर, मप्र
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विपक्षी दलों के प्रयास
राजनीतिक दल विकास के वादे करके सत्ता में आते हैं। विपक्षी दल उनके गलत कार्यों पर अंकुश लगाकर लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए प्रयासरत रहते हैं।
-सुरेन्द्र कुमार राजपुरोहित, बीकानेर
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क्षेत्रवाद से खतरा
लोकतांत्रिक देश के लिए बहुदलीय राजनीतिक प्रणाली वरदान के रूप में है, लेकिन आजकल गठबंधन की राजनीति लोकतंत्र पर हावी हो गई है। इसमें उत्तरदायित्व का अभाव साफ-साफ दिखाई देता है। साथ ही आजकल यह क्षेत्रवाद का जामा अधिक ओढ़े बैठी है। राजनीतिक दलों का क्षेत्रवाद की और झुकान अनेक समस्याओं को जन्म दे रहा है। यह प्रवृत्ति संकीर्ण मानसिकता और विघटनकारी शक्तियों को जन्म दे रही है।
-एकता शर्मा, जयपुर
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संयम की जरूरत
राजनीतिक दल ही सत्ता की बागडोर संभालते हैं। इसलिए उनका लोकतंत्र को बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका है। इसके लिए चुनाव आयोग को सशक्त करना होगा। लोगों का जागरूक करना होना। राजनीतिक दलों का संयम से काम करना चाहिए।
-रुचिका अरोड़ा, चूरू
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स्वार्थ की राजनीति
बदलते परिवेश में राजनीतिक दल केवल अपने स्वार्थ की राजनीति करना जानते हैं। लोकतंत्र से उन्हें कोई मतलब नहीं हैं। वे इसका उपयोग सत्ता हासिल करने के लिए ही करते हैं। अगर देश में लोकतंत्र का कोई चीरहरण कर रहे हैं, वे राजनेता ही हैं। वे ही प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से भारतीय लोकतंत्र रूपी वट वृक्ष की जड़ें काटने में लगे हुए हैं।
-सी. आर. प्रजापति, जोधपुर
Published on:
04 Jul 2022 03:26 pm
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