13 जनवरी 2026,

मंगलवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

आपकी बात, मणिपुर में हिंसा रोकने के लिए सरकार को क्या करना चाहिए?

पत्रिकायन में सवाल पूछा गया था। पाठकों की मिलीजुली प्रतिक्रियाएं आईं, पेश हैं चुनिंदा प्रतिक्रियाएं।

2 min read
Google source verification

image

Patrika Desk

May 08, 2023

आपकी बात, मणिपुर में हिंसा रोकने के लिए सरकार को क्या करना चाहिए?

आपकी बात, मणिपुर में हिंसा रोकने के लिए सरकार को क्या करना चाहिए?

ठोस कदम उठाए सरकार
मणिपुर में हिंसा को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे। आपातकालीन सेवाओं पर खास ध्यान देना होगा। लोग खाने-पीने और चिकित्सा जैसी सुविधाओं के लिए परेशान न हों। शांति के लिए हरसंभव प्रयास होने चाहिए।
-निर्मला देवी वशिष्ठ, राजगढ़, अलवर
...........

बातचीत से निकाला जाए हल
मणिपुर में हिंसा का विस्फोट दशकों की उपेक्षा, भेदभाव, आपराधिक-राजनीतिक गठजोड़ और हिंसक उग्रवाद का नतीजा है। सरकार को मैतेई समुदाय तथ नगा और कुकी समुदाय समेत दूसरे आदिवासी समुदाय से बातचीत करके सर्वसम्मत हल निकालना चाहिए।
- प्रांजल चारण, जोधपुर
........

अविश्वास के कारण टकराव
मणिपुर में हिंसा के लिए अवैध रूप से रह रहे लोग भी जिम्मेदार हैं। राज्य के निवासियों के बीच अविश्वास टकराव का मुख्य कारण है। सरकार को देश, राज्य एवं समाज हित में आवश्यक निर्णय लेना चाहिए। साथ ही स्थानीय समुदायों के सांस्कृतिक एवं सामाजिक मूल्यों का संरक्षण करना चाहिए
-शिव कुमार कुमावत भीलवाड़ा
.......

जरूरी है समस्याओं का स्थाई हल
भारत सरकार को म्यांमार के सैन्य शासन से बातचीत कर वहां के नागरिकों का भारत की ओर आना रोकना होगा। शांति से ही विकास संभव है। जातीय तनाव से उपजी समस्याओं का स्थायी हल आवश्यक है।
-कमलेश कुमार, चितौडग़ढ़
.....

आपसी समन्वय आवश्यक
मणिपुर के मौजूदा हालात से निपटने के लिए केंद्र और राज्य सरकारें आपस में समन्वय रखें। आरक्षण के मुद्दे का सर्वसम्मत हल खोजने का प्रयास किया जाए। सरकार को शांति और व्यवस्था बहाल करने पर ध्यान देना चाहिए।
-प्रकाश भगत, कुचामन सिटी, नागौर
..............

सेना से नहीं निकलेगा हल
विभिन्न समुदायों के बीच पनपी नफरत में मणिपुर जल रहा है। गलतफहमियों को दूर करने के लिए सरकार को अपना रवैया बदलना होगा। सेना के बल पर हिंसा रुकने की संभावना कम नजर आती है। सेना देखकर लोग और अधिक उत्तेजित होते हैं। सभी समुदायों के नेताओं को एक मंच पर इक_ा कर, उचित हल निकालने के प्रयास सफल साबित हो सकते हैं।
-नरेश कानूनगो, देवास, म.प्र.
...............

जातीय धु्रवीयकरण का नतीजा
मणिपुर में हुई हिंसा राजनीति के लिए जातीय धु्रवीयकरण का नतीजा है। आरक्षण का आधार जाति न होकर आर्थिक ही होना चाहिए। सरकार को इस मुद्दे पर सार्वजनिक चर्चा करने के साथ मणिपुर में सभी वर्गों के साथ चर्चा कर समस्या का निराकरण करना चाहिए।
-हरिप्रसाद चौरसिया, देवास, मध्यप्रदेश