
आपकी बात: लोकतंत्र पर राजनीतिक रंजिश का क्या असर होगा?
समाज और देश के लिए घातक
राजनीतिक रंजिश हिंसा में बदल जाती है, जिसका लोकतंत्र पर गहरा असर पड़ता है। जनता में भी प्रतिशोध की भावना बढ़ती है, जो समाज और राष्ट्र के लिए घातक है। राजनीतिक रंजिशों से सबके निजी संबंध खराब हो जाते हैं। सोशल मीडिया पर भी हम इसे खूब देखते हैं। कभी-कभी यही रंजिश परिवारों में भी दिखने लगती है। पक्ष और विपक्ष दोनों की जिम्मेदारी होनी चाहिए कि वे राजनीति को स्वच्छ बनाएं और सौहार्दपूर्ण वातावरण का निर्माण करें। व्यक्तिगत राजनीतिक रंजिश को खत्म करके स्वस्थ लोकतंत्र का निर्माण ही देश हित में है।
-मधु भूतड़ा, जयपुर
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घातक है राजनीतिक रंजिश
राजनीतिक रंजिश समाज व लोकतंत्र दोनों के लिए घातक सिद्ध होगी। लोकतंत्र की मूल भावना में जनता का हित समाहित है। यदि आपस में राजनीतिक रंजिश रहेगी, तो विकास की बात करना काल्पनिक साबित होगी। इसलिए लोकतंत्र में राजनीतिक रंजिश होना अच्छी बात नहीं, क्योंकि इसका बुरा प्रभाव पड़ेगा
-बिहारी लाल बालान, लक्ष्मणगढ़, सीकर
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पैदा होती है कटुता
लोकतंत्र पर राजनीतिक रंजिश का प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। साम्प्रदायिक सद्भाव, भाईचारा और देश की एकता-अखंडता में खलल पैदा होगा। राजनीतिक रंजिश कटुता के भाव पैदा करेगी, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए घातक है। इससे बचना जरूरी है।
-शिवजी लाल मीना, जयपुर
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देश का हित नहीं
भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है। अगर राजनीतिक दल आपस में रंजिश रखते हैं, तो देश का नुकसान ही होगा। दुनिया में अपनी साख कम होगी। सभी दलों की प्राथमिकता देश का विकास व आमजन का हित ही होना चाहिए। विपक्ष और सरकार निजी हित को भूल कर ईमानदारी से अपनी भूमिका निभाएं।
-लता अग्रवाल चित्तौडग़ढ़
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लोकतंत्र के लिए घातक
भारत में राजनीतिक रंजिश आम हो गई है, जिसके चलते एक नेता दूसरे नेताओं एवं विरोधी पार्टियों पर अनर्गल आरोप-प्रत्यारोप लगाते रहते हैं। यह लोकतंत्र के लिए घातक है। इसी क्रम में विकास के मुद्दे को दरकिनार करते हुए जाति, धर्म एवं संप्रदाय में वोटरों की पहचान कर चुनावी जीत का फार्मूला तय किया जाता है। आपसी वैमनस्यता बढ़ने के साथ-साथ देश का विकास रुक जाता है।
-पंकज नेहरा,बासमूंदी, चूरू
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न करें विवाद
लोकतंत्र में राजनीतिक रंजिश का सबसे बड़ा असर सामाजिक प्रगति पर होता है। विवादों की वजह से विकासात्मक गतिविधियां प्रभावित होती हैं। नेताओं को चाहिए कि वे आपसी टांग खिंचाई की बजाय सुझाव दें और मिलकर लोकतंत्र को मजबूत बनाएं।
-रजनी वर्मा, श्रीगंगानगर
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बढ़ सकते हैं अपराध
राजनीतिक रंजिश से देश में भ्रष्टाचार और अपराध में बढ़ोतरी होगी। इसका खमियाजा आम जनता को भुगतना पड़ेगा। इसलिए किसी भी देश में राजनीतिक मनमुटाव को ज्यादा दिन तक नहीं चलने देना चाहिए।
-बालकिशन अग्रवाल, सूरत, गुजरात
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भंग होती है शांति
राजनीतिक रंजिश से समाज में राजनीतिक मतभेद की स्थिति उत्पन्न होती है। समाज की शांति व्यवस्था भंग होती है। इससे सही राजनीतिक पार्टी और उम्मीदवार का चयन नहीं हो पाता है।
-सुनीता , वाराणसी, उप्र
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फैलती है अराजकता
जिस तरह दीमक एक वृक्ष की जड़ों को खोखला कर देती है, उसी प्रकार राजनीतिक रंजिश भी लोकतंत्र की बुनियाद को कमजोर करती है। इससे अराजकता का माहौल पैदा होता है।
-शुभम वैष्णव, सवाई माधोपुर
Published on:
25 Feb 2022 03:26 pm
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