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आपकी बात, पारिवारिक विवादों में बढ़ोतरी क्यों हो रही है?

पाठकों की मिलीजुली प्रतिक्रियाएं आईं। पेश हैं चुनिंदा प्रतिक्रियाएं।

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Gyan Chand Patni

Feb 20, 2024

आपकी बात, पारिवारिक विवादों में बढ़ोतरी क्यों हो रही है?

आपकी बात, पारिवारिक विवादों में बढ़ोतरी क्यों हो रही है?

परिवार के वरिष्ठ अपनी भूमिका निभाएं

अहंकार परिवार को तोड़ रहा है। कहीं जमीन तो कहीं जोरू के कारण झगड़े हो रहे हैं। यही नहीं रिश्तों के बिखराव और टूटन का सबसे बड़ा जिम्मेदार सोशल मीडिया है। एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर आम हो गए हैं। बढ़ती इच्छाएं, अभिलाषाएं समस्या का रूप ले रही हैं। लोभ और लालच ही नहीं अतृप्त कामवासना भी विवाद का कारण बन रही है। संस्कारों के अभाव में कहीं भाई से भाई झगड़ रहा है तो कहीं पिता से पुत्र। पति-पत्नी में तो झगड़ा सामान्य बात है। समय रहते अपने रिश्तों को समय और संस्कार दें, सच्ची संपत्ति वही है। पुत्र पिता की ही परछाई होता है। अत: घर का माहौल परिवार के वरिष्ठ जनों पर निर्भर करता है।

-एकता शर्मा, जयपुर

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समन्वय की कमी

परिवार व्यक्ति की प्रथम पाठशाला मानी जाती है। एकल परिवारों में विवाद ज्यादा होते हैं। आजकल पारिवारिक विवादों का मुख्य कारण आपसी प्रेम और आपसी समन्वय की कमी ही है

-शुभम वैष्णव ,सवाई माधोपुर

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संवाद की कमी से होते हैं विवाद

परिवार के लोगों के बीच तालमेल ठीक नहीं होता, जिससे विवाद होते हैं। परिवार के सदस्यों के बीच संवाद की कमी रहती है। सब अपने-अपने काम में व्यस्त रहते हंै या फिर मोबाइल में लगे रहते है। कोई भी सदस्य अपनी परेशानी साझा नहीं करता जिससे समस्या का निदान नहीं होता और कलह होती है। धन के पीछे भागने से भी परिवार में विवाद उत्पन्न हो रहे हंै।

-दिलीप शर्मा, भोपाल, मप्र

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छोटे-बड़े का लिहाज कम

बदली जीवन शैली और बढ़ती हुई अभिलाषाओं की वजह से व्यक्ति अपने रिश्तों की उपेक्षा करने लगता है। दूसरों की बात सुनने का धैर्य समाप्त हो गया है। जवाब देने में भी असंतुलन पैदा हो गया है। छोटे-बड़े का लिहाज खत्म होने से पारिवारिक सदस्यों में विवाद बढ़ रहे हैं। -हेमन्त पाण्डे, जयपुर

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मोबाइल भी है कारण

परिवार के लोगों को अब एक साथ बैठकर हंसने खिलखिलाने का वक्त नहीं है। वे दिन-रात मोबाइल में ही डूबे रहते हैं। इस कारण से परिवार के सदस्यों के बीच दूरियां पैदा हो जाती हैं। परिवार के लोगों में एक दूसरे का ध्यान रखने की भावना हो तो झगड़े हों ही नहीं। - उमराव सिंह वर्मा, बेमेतरा, छत्तीसगढ़ बढ़ गई स्वार्थ की प्रवृत्ति पारिवारिक विवाद बढ़ रहे हंै। आजकल पैसों को ज्यादा महत्त्व दिया जा रहा है। घर में सभी अपनी - अपनी चलाना चाहते हंै। दूसरों का ध्यान ही नहीं रखते। स्वार्थ की प्रवृत्ति बढ़ गई है। कोई किसी के लिए त्याग नहीं करना चाहता। इसलिए छोटी-छोटी बातों पर झगड़ा होता है, जो कई बार गंभीर रूप ले लेता है।

-गोपाल अरोड़ा, जोधपुर