
आपकी बात: भारत में हेट स्पीच के मामले क्यों बढ़ रहे हैं?
बवाल ज्यादा, कार्रवाई कम
बोलकर, लिखकर, इशारों से या किसी भी तरीके से हिंसा भड़काने की कोशिश होती है, तो ऐसा करना अपराध है। इसे ही 'हेट स्पीच' समझा जाता है। 2017 में लॉ कमीशन ने 267वीं रिपोर्ट पेश की थी। इस रिपोर्ट में लॉ कमीशन ने कहा था, 'हेट स्पीच कोई भी लिखा या बोला हुआ शब्द, इशारा, कोई प्रस्तुति हो सकता है जिसे देखकर या सुनकर डर पैदा हो या हिंसा को बढ़ावा मिले।Ó हेट स्पीच के मामलों में देश में बवाल ज्यादा और कार्रवाई कम नजर आती है। पिछले 7 साल में हेट स्पीच के मामले 7 गुना बढ़ गए हैं, लेकिन सजा बहुत ही कम मामलों में ही हुई है। संसद को हेट स्पीच के मामले में कड़ी सजा का प्रावधान करना चाहिए।
-इम्तियाज हुसैन, अलवर
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विवादास्पद बयानबाजी
देश मे हेट स्पीच के मामले इसलिए बढ़ रहे हैं, क्योंकि छोटी-छोटी बातों पर नेता और आम लोग तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हैं। क्रिया-प्रतिक्रिया में हेट स्पीच का पूरा नेटवर्क तैयार हो जाता हे। अगर वाणी पर संयम रखा जाए, तो हेट स्पीच मामले कम हो सकते हैं।
लता अग्रवाल चितौडग़ढ़
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घातक है हेट स्पीच
धर्म, जाति और सम्प्रदाय के नाम पर की जा रही बयानबाजी हो या व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति, यह खतरनाक है। अगर समय रहते हेट स्पीच पर अंकुश के प्रयास नहीं हुए, तो सांप्रदायिक उन्माद फैलेगा। यह देश की एकता-अखंडता के लिए घातक है।
-शिवजी लाल मीना, जयपुर
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कानून की पालना नहीं
हमारे देश में कानून तो खूब बने हुए हैं, लेकिन उनकी पालना नहीं करवाई जा रही। इसका फायदा लोग उठाते हैं। लोग अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की आड़ में हेट स्पीच करते हैं। यह निंदनीय है।
-बालकिशन अग्रवाल, सूरत, गुजरात
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विकृत राजनीति का परिणाम
हेट स्पीच के मामले बढ़ते जा रहे हैं। इसका मुख्य कारण अज्ञानता और विकृत राजनीति है। राजनीति से प्रेरित सभाओं और रैलियों में धर्म और जाति पर बोलने पर पाबंदी होनी चाहिए।
-राकेश मेनारिया, चित्तौडग़ढ़
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भावनाएं भड़काते हैं नेता
नेता लोगों की भावना भड़काने वाले भाषण देते हैं। उनकी भावना भड़का कर सामाजिक और धार्मिक भेद-भाव को बढ़ाते हैं।
-गोपाल लाल पंचोली, शाहपुरा
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बढ़ रही है सांप्रदायिकता
कट्टरपंथी हिंसा फैलाने वाली हरकतें कर रहे हैं। सांप्रदायिकता और नफरत फैलाने वाली बातें कही जा रही हैं। ये लोग भारत के सेक्युलर स्टेट की इमेज को हिंदू स्टेट में बदलना चाहते हैं। नेताओं ने भी इसको बढ़ावा दिया है। वे भड़काऊ भाषण देते हंै। इन पर अंकुश जरूरी है।
-संजना प्रजापत, नरैना
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अपराध है हेट स्पीच
पिछले कुछ सालों में भारत में हेट स्पीच के मामले बढ़े हैं। यह एक चिंताजनक विषय है, जिस पर सरकार और जनता को चिंतन करने की आवश्यकता है। भारत में कट्टरपंथी अब हिंसा फैलाने वाली हरकतें कर रहे हैं। नफरत फैलाने वाली बातें कही जा रही हैं। हमें यह समझना होगा कि लोगों को एक-दूसरे के खिलाफ भड़काना देश के खिलाफ एक अपराध है ।
-प्रिया राजावत, जयपुर
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अधिकार का गलत इस्तेमाल
भारतीय संविधान नागरिकों को अपने विचार व्यक्त करने का अधिकार प्रदान करता है। ये मौलिक अधिकारों की श्रेणी में आता है। इसी का फायदा उठाकर लोग हेट स्पीच देने से बाज नहीं आते हैं। हेट स्पीच की आड़ मे लोग अपना उल्लू सीधा करते हंै।
-अशोक कुमार शर्मा, जयपुर
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नफरत फैलाने का अधिकार
हेट स्पीच इंसानी समाज को आपस में बांट कर नफरत पैदा करने का हथियार है। इसका उद्देश्य आपसी सौहार्द को बिगाड़ कर अपने हितों को साधना होता है। हेट स्पीच देने वालों को किसी प्रभावी व्यक्ति की शह होती है।
हारून रशीद
Published on:
22 Feb 2022 02:12 pm
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