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आपकी बातः सरकारी अभियानों के बावजूद गंगा साफ क्यों नहीं हो पाई?

पत्रिकायन में सवाल पूछा गया था। पाठकों की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं प्राप्त हुईं। उनमें से चुनिंदा यहां दी जा रही हैं।

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Gyan Chand Patni

Dec 10, 2020

गंगा सफाई अभियानों की विफलता के कारण

आपकी बातः सरकारी अभियानों के बावजूद गंगा साफ क्यों नहीं हो पाई?

कारण राजनीतिक दलों के निजी स्वार्थ

सरकार कई सालों से सरकारी अभियानों के तहत गंगा साफ करने का दावा करती रही है, लेकिन ऐसा नहीं हो पाने की वजह राजनीति में पक्ष और विपक्ष के निजी स्वार्थ हैं। स्वार्थसिद्धि, धन का प्रलोभन, देशहित की अनदेखी और वोट बैंक की राजनीति जब तक आगे रहेंगे, गंगा की सफाई पीछे छूटती ही जाएगी।

-सुरेंद्र बिंदल ‘सुबी’, मॉडल टाउन, जयपुर

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धराशायी हो रहे सारे प्रयास

सरकारी अभियानों के बावजूद गंगा में स्वच्छ जल स्तर नहीं बढ़ पाया है। इसका कारण सीवरेज, फैक्ट्रियों का कचरा आदि का गंगा में बहाना। नमामि गंगे परियोजना में भी एकबारगी कार्य युद्धस्तर पर हुआ परंतु अंततः सारे प्रयास धराशायी नजर आ रहे हैं। लोगों में जागरूकता का भी अभाव है। विभिन्न कारणों से प्रदूषण का स्तर बढ़ता जा रहा है और स्वच्छ जल की कमी उभरती जा रही है।

-सपना बिश्नोई, हनुमानगढ़, राजस्थान

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गंगा पुण्यसलिला है, इसे लोग समझें

गंगा पुण्यसलिला, पापहारिणी और जीवनदायिनी है इसे लोग नैतिक रूप से स्वीकार करें। केवल सरकारी अभियानों से गंगा साफ अर्थात प्रदूषण मुक्त नहीं हो सकती। जब तक सरकारी अभियानों को आमजन स्वतः का अभियान नहीं समझेगा, गंगा साफ नहीं रह सकती। सरकारें संसाधन जुटा सकती हैं, लेकिन गंगा की स्वच्छता का नैतिक उत्तरदायित्व आमजन का ही है। -कामेशवर खण्डूड़ी, जबलपुर, मध्यप्रदेश

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अभियान के प्रति उदासीनता

सरकार की ओर से अभियान चलाए जाने मात्र से परिवर्तन सुनिश्चित नहीं किया जा सकता। अभियान का धरातल पर भी प्रभावी रूप से सक्रिय होना आवश्यक है। यही कारण है कि सरकारी अभियान के बावजूद गंगा साफ नहीं है। इसके अतिरिक्त आम नागरिक व प्रशासन स्वयं भी इस अभियान के प्रति उदासीनता लिए जिम्मेदार हैं क्योंकि वह इस अभियान की महत्ता को समझ नहीं रहे हैं।

-आयुषी मीणा, प्रतापगढ़

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स्थानीय प्रशासन की उदासीनता

पिछले कुछ वर्षों की तुलना में गंगा में थोड़ी साफ-सफाई देखी जा रही है किंतु आंतरिक दृष्टि से देखें तो पाएंगे कि अभी भी कई शहरों के सीवरेज, कारखानों के गंदा पानी, अधजली लाशों का गंगा में प्रवाह और मवेशियों को गंगा में स्नान कराना जारी है। तीर्थस्थलों पर प्लास्टिक तथा साबुन का अत्यधिक इस्तेमाल भी एक कारक है। स्थानीय प्रशासन को समय रहते इन उत्पादों का प्रयोग गंगा के तटों पर वर्जित करना चाहिए तथा और अधिक जुर्माने का प्रावधान करना चाहिए।

-एकता शर्मा, गरियाबंद, छत्तीसगढ़

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सहायक नदियों की भी हो सफाई

सारे प्रयास करने के बाद भी गंगा इसलिए साफ नहीं हो पाई क्योंकि गंगा को साफ करने के साथ-साथ उसकी सहायक नदियों को भी साफ करने की जरूरत है। गंगा को साफ करने में तभी सफलता मिल सकती है।

-शैलेंद्र गुनगुना, झालावाड़

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नदियों की पवित्रता का भी रखें ध्यान

‘न निर्मल, न अविरल नदियां’ समस्त देशवासियों को यह चेतावनी देती हैं, यदि समय रहते हम सावधान नहीं हुए तो हमारी पवित्र नदियां, जिनका सीधा सम्बन्ध हमारी आस्था से है, एक दिन जहर उगलती नदियों में तब्दील हो जाएंगी। हम लोग अपने निजी स्वार्थों में यह भूल जाते हैं कि जल का स्वच्छ रहना भी उतना ही जरूरी है जितना हमारे पापों का धुलना। प्राचीन काल से ही हम नदियों को देवताओं की तरह पूजते हैं, क्या हमारा यह कर्तव्य नहीं है कि इनकी स्वच्छता का भी पूरा ध्यान रखें। आस्था की केंद्र इन नदियों की स्वच्छता की जिम्मेदारी जितनी सरकार की है उतनी देश के प्रत्येक नागरिक की भी है। आवश्यकता है तो कंधे से कंधा मिलाकर स्वच्छता अभियान को सफल बनाने की। प्रत्येक व्यक्ति यदि अपने स्तर पर स्वयं के कर्तव्य का पालन करे तो क्या नहीं कर सकता। पत्रिका ने समय-समय पर अपने लेखों के माध्यम से आम जनता में जागरूकता का प्रसार किया है, इसके लिए जितनी भी सराहना की जाए कम है।

-डॉ. अजिता शर्मा, उदयपुर

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आम जन जागृत हो

सरकारी अभियान गंगा को साफ करने के लिए तो चलाया जाता है परंतु कुछ अभियान कागज तक ही सिमट के रह जाते हैं, और जो अभियान चलाया भी जाता है उसमें पूर्ण रूप से जनता का सहयोग नहीं मिल पाता। अगर हर इंसान गंगा की पवित्रता को समझे और वह जान सके कि गंगा का साफ होना जन मानस के लिए कितना जरूरी है, साथ ही गंगा को मलिन न करने का संकल्प ले तो निश्चित रूप से गंगा साफ हो सकती है।

-दिलीप शर्मा, भोपाल, मध्यप्रदेश

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एक पक्ष जागरूक नहीं, दूसरा उदासीन

सरकारी अभियानों के बावजूद गंगा नदी के साफ न होने के पीछे आम लोगों की जागरूकता और सहभागिता के अभाव के साथ-साथ नगर निकायों और ग्राम पंचायतों की उदासीनता भी है। नगरों के कल-कारखानों द्वारा छोड़े जाने वाले प्रदूषित जल पर जब तक कठोर कार्यवाही नहीं होती, तब तक गंगा साफ नहीं हो पाएगी।

-हरिप्रसाद चौरसिया, देवास, मध्यप्रदेश

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कर्त्तव्य भुलाना अहम कारण

सरकार के अभियान कागजों पर अधिक और धरातल पर कम प्रभावी होते हैं। गंगा सफाई अभियान से जुड़े नेताओं और कर्मचारियों का भ्रष्टाचार और कर्त्तव्य के प्रति उदासीनता ही उचित परिणाम नहीं मिलने की वजह है। साथ ही लोगों में गंगा मां के प्रति श्रद्धा तो बहुत है लेकिन सफाई के प्रति ध्यान की कमी है। कर्त्तव्यों को भूलकर सारी जिम्मेदारी सरकार पर थोपने की आदत ही गंगा सफाई अभियान की विफलता के लिए जिम्मेदार है।

-कैलाश सैनी, हरिपुरा, बूंदी