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आपकी बात, शादी समारोहों में खर्च करने की प्रवृत्ति लगातार बढ़ क्यों रही है?

पत्रिकायन में सवाल पूछा गया था। पाठकों की मिलीजुली प्रतिक्रियाएं आईं, पेश हैं चुनिंदा प्रतिक्रियाएं।

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Patrika Desk

Mar 29, 2023

आपकी बात, शादी समारोहों में खर्च करने की प्रवृत्ति लगातार बढ़ क्यों रही है?

आपकी बात, शादी समारोहों में खर्च करने की प्रवृत्ति लगातार बढ़ क्यों रही है?

उच्च वर्ग की देखा देखी
शादी समारोह में विभिन्न प्रकार के कार्यक्रमों का चलन बढ़ता ही जा रहा है। उच्च वर्ग में यह सबसे अधिक है। लेकिन इसका सीधा असर मध्यमवर्गीय परिवारों पर भी पड़ता है। आज जो चलन शादियों का समाज में चल रहा है कहीं न कहीं उसका कारण दिखावा ही करना होता है। इस दिखावे के कारण मध्यमवर्गीय परिवारों की जीवन भर की पूंजी का एक बहुत बड़ा हिस्सा एक शादी में लग जाता है। ये चलन बड़े शहरों के संपन्न घरों से आज समाज के मध्यम वर्ग तक आ पहुंचा है। जहां रस्मों के पीछे एक उद्देश्य हुआ करता था, उसकी जगह दिखावे के उत्सवों ने ले ली है। एक—दो दिन के समारोह पर भारी धन खर्च करने की बजाय यह राशि भविष्य के लिए सुरक्षित रखनी चाहिए
नटेश्वर कमलेश, चांदामेटा, मध्य प्रदेश

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दिखावे की प्रवृत्ति
शादी समारोह में खर्च करने की प्रवृत्ति झूठी शान—शौकत दिखाने के लिए होती है। शादी समारोह में लाखों रुपए पानी की तरह बहाए जाते हैं। जेब में पैसा हो या न हो फिर भी हम झूठे दिखावे के लिए जमकर तारीफ बटोरने के लिए मनमाना खर्च करते हैं। शादी समारोह में फिजूलखर्ची को रोकने के लिए कानून बनना चाहिए जिससे गरीब परिवार को शादी में कठिनाइयों का सामना न करना पड़े।
—विजया शर्मा, कोटा
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दिखावे की मानसिकता
शादी समारोह में ज्यादा खर्च करने की प्रवृत्ति बढ़ती ही जा रही है। यह सब समाज में अपनी शान दिखाने के लिए किया जाता है। शादी समारोह मे झूठी शान दिखाने के लिए भारी धन खर्च करने की बजाय अगर जरूरतमंद की मदद कर दी जाए तो सबका भला होगा।
—लता अग्रवाल चित्तौडग़ढ़
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ताकि कर्ज का भार न बढ़े
दिखावा, फैशन, बदली लाइफस्टाइल के चले शादी पर खर्च बढ़ा है। आज समाज का हर वर्ग अच्छा करने के चक्कर में कर्ज के बोझ तले दब रहा है। यह प्रवृत्ति बदलनी चाहिए, ताकि एक गरीब भी समाज में शान से अपनी बेटी या बेटे के हाथ पीले कर सके।
- देवेन्द्र जारवाल, जयपुर
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अपने आपको ऊंचा दिखाने की मानसिकता
शादी समारोह में लगातार खर्चों की वृद्धि होने का कारण मुख्य रूप से समारोह में अपने आप को ऊंचा दिखाने की मानसिकता है; चाहे इसके लिए कर्जा लेना पड़े या जमीनी ही क्यों ना बेचनी पड़े, लेकिन दिखावा करना जरूरी है।
हरिश चंद्र डामोर, सागवाड़ा, डूंगरपुर
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प्रदर्शन का उत्सव
भारत में शादी में खर्च को इज्जत से जोड़ लिया जाता है। झूठी शान और स्वयं को सर्वश्रेष्ठ समझने के कारण लोग शादी पर खूब खर्च करते हैं। आपस में अघोषित प्रतिस्पर्धा बढ़ती जा रही। इसी कारण विवाह समारोह का व्यय बढ़ता जा रहा। लोग अपनी झूठी शान को बनाए रखने के लिए भले ही ऋण के जाल में फंस जाएं, मगर शादियों में पानी की तरह पैसा बहाएंगे जरूर।
—विपुल जैन, उदयपुर
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लोक दिखावा
शादी समारोहों में खर्च की प्रवृत्ति दिनों दिन बढती जा रही हैं। लोक दिखावा अधिक हो रहा है। हर कोई अपने आपको किसी से कम नहीं समझ रहा है। उधार लेकर, घर, मकान, जमीन जायदाद, पत्नी के गहने बेचकर भी आज का इंसान अपनी शानो शौकत दिखा रहा है, जो किसी मूर्खता से कम नहीं हैं। चंद पूंजीपतियों और दो नंबर के पैसे वालों की देखा देखी में आम नागरिक शादी समारोह में अनाप—शनाप खर्च कर इस गलत होड़ में सम्मिलित होकर लोक दिखावा कर बर्बादी की राह पर चल रहा है।
सुनील कुमार माथुर, जोधपुर
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युवा वर्ग भी आगे
शादी समारोह में बेहिसाब खर्च का बड़ा कारण दिखावा है। युवा वर्ग भी शामिल है इस झूठी शान शौकत में।कुछ सलाहकारों के कारण वे पानी की तरह पैसा बहाते हैं।
—शिवशंकर व्यास, नागौर
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शादी समारोहों में बढ़ते खर्चे के पीछे का कारण पश्चिमी संस्कृति का नकारात्मक प्रभाव है। यह सामाजिक पहचान का रूप ले रहा है। अर्थात जिसने शादी समारोह में जितना ज्यादा खर्च किया, उसका सामाजिक ओहदा उतना ही बढ़ जाता ह़ै। इसके कारण मध्यम या निम्न वर्ग को दिखाने के लिए ऋण लेना पड़ता है और उनका आगे का जीवन उसी ऋण को चुकाने में लग जाता है
— हितेश चौहान, सिरोही