
आपकी बात, भारत-म्यांमार सीमा पर बाड़ लगाने का विरोध क्यों हो रहा है?
सहमति बनाकर ही आगे बढ़े सरकार
भारत की केंद्र सरकार ने पूर्वोत्तर से लगी म्यांमार की सीमा पर भी बांग्लादेश की तर्ज पर कंटीले तारों की बाड़ लगाने का फैसला किया है। पूर्वोत्तर राज्यों के कुछ मुख्यमंत्रियों और आदिवासी संगठनों के भारी विरोध के कारण केंद्र की यह कवायद आसान नहीं नजर आ रही है। केंद्र को इस मामले में सभी पक्षों के साथ बातचीत करके सहमति बना कर ही आगे बढऩा चाहिए।
डॉ.अजिता शर्मा, उदयपुर
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जनजातीय समुदाय कर रहे हैं विरोध अवैध गतिविधियां बढ़ जाने के कारण भारत-म्यांमार सीमा पर बाड़़ लगाई जा रही है। इससे जनजाति समुदायों को परेशानी भी होगी। सीमा के दोनों तरफ रह रहीं जनजातियों जैसे मिजो, कुकी, नगाओं का आपस में संपर्क है। बाड़ बनने से इन लोगों का संपर्क टूट जाएगा, जिससे वे डरे हुए हैं।
-अरविंदर सिंह, कोटपुतली
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आसान नहीं है राह
भारत सरकार ने म्यांमार से लगी 1643 किलोमीटर लंबी सीमा पर बाड़ लगाने का फैसला किया है। इस पर अमल आसान नहीं है। घने जंगलों से ढंके पहाड़ी इलाके, जहां पगडंडियों से भी नहीं पहुंचा जा सकता है, वहां बाड़ कैसे लगाई जा सकेगी? निगरानी का काम भी चुनौतीपूर्ण होगा। सीमा पर बाड़ लगाने का विरोध भी हो रहा है।
-नरेश कानूनगो, देवास, म.प्र.
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फैसले पर अमल किया जाए
भारत-म्यांमार सीमा पर बाड़ लगाने का विरोध वे लोग कर रहे हैं जो अनैतिक और अवैध गतिविधियों में लिप्त हैं। इसलिए सरकार को सख्ती से सीमा पर बाड़ लगाने का काम करना चाहिए।
-हरिप्रसाद चौरसिया, देवास, मप्र
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जुड़े हैं दोनों देशों के नागरिक
भारत-म्यांमार सीमा पर बाड़ लगाने का विरोध इसलिए हो रहा है, क्योंकि दोनों तरफ से आवाजाही रुक जाएगी। दोनों देशों के सीमावर्ती लोग आपस में जुड़े हुए हैं। बाड़ लग जाने से उनका आपसी संपर्क खत्म हो जाएगा। इसलिए पूर्वोत्तर राज्यों के नागरिक नहीं चाहते कि यहां बाड़ लगाई जाए।
-संजय माकोड़े, बैतूल, मप्र
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मिजोरम सरकार भी विरोध में
भारत और म्यांमार ने वर्ष 2018 में मुक्त आवाजाही की नीति अपनाई। इसके तहत दोनों देशों के लोग एक दूसरे देशों की सीमा में प्रवेश कर सकते हैं। अवैध गतिविधियों के बढऩे से भारत सरकार ने अब सीमा पर बाड़ लगाने का निश्चय किया है। कुछ संगठनों के साथ मिजोरम सरकार भी इसका विरोध कर रही है।
- रेखा परिहार, मथानियां,जोधपुर
Published on:
29 Feb 2024 05:23 pm
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