
After two days of rain, the water level of Tapti river rises, there is no protection on the ghats
नगर नियोजन में त्रुटि
देश के कई शहरों में बारिश के कारण सामान्य जनजीवन बुरी तरह से प्रभावित है। शुरुआती बारिश से ही देश के कई शहरों में जल जमा होने लगता है, सड़कें जलमग्न हो जाती हैं, यातायात प्रभावित हो जाता है। निचली बस्तियों में पानी भर जाता है और घरों का सामान नदी बन चुकी सड़कों पर तैरने लगता है। शासन-प्रशासन कुछ नहीं कर पाते हैं, क्योंकि नगर नियोजन की त्रुटियों से देश का प्रत्येक नगर, महानगर, जिला, कस्बा सभी त्रस्त हैं।
सत्यपाल नरवाल, रायपुर, पाली
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हर बार यही हाल
हमारे देश में नगर नियोजन को लेकर गंभाीरता नहीं है। नगर नियोजन की त्रुटियों से देश का प्रत्येक नगर, महानगर, जिला मुख्यालय, कस्बा सभी त्रस्त हैं। थोड़ी सी बारिश भी बड़ी आफत बन जाती है। दिल्ली, एनसीआर जैसे शहरों में भी बारिश ऐसा उत्पात मचाती है कि हर कोई त्राहि-त्राहि करने लगता है।
-नरेश बिश्नोई, हेमागुड़ा, जालौर
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पानी पानी हुआ शहर
बारिश के कारण पानी-पानी हुए शहर ने नगर निगम के सफाई के दावों की पोल खोल दी। शहर में बारिश के पानी के कारण नाले व सड़क का फर्क ही मिट जाता है। इसलिए शहर में बारिश जनजीवन के लिए आफत बनती है।
-मनीष सैनी, चौमूं, जयपुर
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स्थानीय निकायों की अनदेखी
बारिश के मौसम को गंभीरता से लेते हुए स्थानीय निकाय उचित उपाय नहीं करते। इससे जुड़ी योजनाएं बनाने पर भी ध्यान नहीं देते। यही कारण है कि शहरों में बारिश का मौसम एक आफत के रूप में सामने आता है।
-बलवंत कुमार खंडेलवाल, बानसूर, अलवर
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बांधों-तालाबों तक नहीं पहुंच रहा पानी
शहरों के आस-पास बने बांधों-तालाबों के बहाव क्षेत्र में अतिक्रमण के चलते वहां पानी पहुंच ही नहीं पाता। जिन नदियों और प्राकृतिक बहाव क्षेत्र से वर्षा का पानी बांध तक पहुंचता था, वहां या तो एनीकट बना दिए गए या लोगों ने अतिक्रमण कर लिए या बहाव क्षेत्र को मिट्टी भरकर खत्म कर दी गई। फिर सरकारी स्तर पर कंक्रीट की सड़क बना दी गई है। इस कारण बांध तो सूखे रह जाते हैं और बरसात का पानी पूरे शहर भर में फैल जाता है।
-अशोक पहलाजाणी, पाली
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नहीं है वर्षा जल संरक्षण ढांचा
शहरों की पक्की सड़कें बारिश के पानी को सोखने में असमर्थ हैं। साथ ही गांवों की तरह वहां जगह-जगह वर्षा जल संग्रहण के लिए गहरे कुंए-तालाब नहीं होते। वर्षा जल संग्रहण का ढांचा अब भी शहरों से दूर है। जब तक इस तरफ ध्यान नहीं दिया जाएगा, बारिश आफत ही बनी रहेगी।
-खुशबू माहेश्वरी, अनूपगढ़, श्रीगंगानगर
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बढ़ जाता है बीमारियोंं का खतरा
शहरों में पानी निकासी की उचित व्यवस्था नहीं होने के कारण सड़कों और मोहल्लों में घंटों पानी भराव की समस्या बनी रहती है। सार्वजनिक जगहों पर नालियों के अवरूद्ध होने एवं सड़कों पर बने गड्ढों में बारिश का पानी भर जाने से शहरों में मौसमी बीमारियों का खतरा बना रहता है। इसलिए यह शहरों के लिए आफत का कारण बनती हैं।
-महेंद्र सिंह भाटी, बीकानेर
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उथले हो गए नाले
बढ़ता हुआ सीमेंटीकरण, घरों के सामने की मिट्टी से अलगाव, समय-समय पर नालियो की सफाई का नहीं होना जल भराव का मुख्य कारण है। शहरो के नाले उथले हो गए हैं, जिससे ड्रेनेज सिस्टम गड़बड़ा जाता है। फुटपाथों और सड़कों को पक्का करने का काम तेज गति से हुआ है। इससे मिट्टी की सौंधी महक शहर से नदारद हो गई।
-मिश्कात शकील निसार, देवास, मध्यप्रदेश
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अव्यवस्थित निकास
पहले शहरों में रास्ते के दोनों तरफ पानी निकासी के लिए नालियां होती थीं। वे नालियां नालो से जुड़ी होती थीं, नाले नहरों से नहरे तालाबों से जुडी होती थीं, लेकिन वर्तमान समय में नहरों पर या तो अतिक्रमण हो गया है या फिर उन्हें कचरे से पाट दिया गया है। इससे बारिश के पानी का निकास अव्यवस्थित हो जाता है। परिणामत: शहरों के लिये बारिश आफत बन जातीहै।
-कौशल्या टाक, जोधपुर।
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गलत नीतियों का परिणाम
हमारे शहर सरकार की गलत नीतियों का दंड भोग रहे हैं। हम किसी नगर प्लानिंग का अनुसरण नहीं करते। एक अधिकारी के तबादले के बाद उसकी योजना को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है। जल निकास कि उचित व्यवस्था न करना, जल संरक्षण की अहमियत को न समझना, हर जगह पक्का निर्माण कर जल के भूमि द्वारा अवशोषण के मार्गों को अवरूद्ध करना। जल निकास का काम अकुशल लोगों के द्वारा करवाना। ये ऐसे कारण हैं, जिससे बारिश शहरों के लिए आफत बन जाती है।
प्रभा पारीक, भरूच
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जल निकासी का स्थाई प्रबंध नहीं
बारिश के इस मौसम में जल भराव की समस्या आम बात हो गई है। इसके बावजूद जल निकासी का कोई स्थाई प्रबंध करने पर ध्यान नहीं दिया गया। यह स्थानीय निकायों की बड़ी चूक है। स्थानीय लोगों, दुकानदारों और रेहड़ी वालो को भी सड़कों पर अतिक्रमण से बचना होगा।
धर्मपाल देग, पुरबसर,हनुमानगढ़
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नहीं होती नियमित सफाई
शहरों के लिए थोड़ी सी बारिश ही उत्पात का रूप ले लेती है। निचले इलाकों में बने मकान पानी से भर जाते हैं तथा लोगों को परेशानी उठानी पड़ती है। जनजीवन अस्त-व्यस्त हो जाता है। सड़क किनारे बनी नालियों की नियमित रूप से सफाई नहीं होने के कारण उनमें जमा कचरे की वजह से नाले-नालियां जाम हो जाते हैं। जल निकासी बाधित हो जाती हैं तथा सड़क किनारे की बसाहट में पानी भर जाता है। मानसून पूर्व नालों की समुचित सफाई ना होना इस आफत को बढ़ावा देता है। सरकारें, जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी इस समस्या की अनेदखी कर रहे हैं। नगर नियोजन की त्रुटियों से देश का प्रत्येक नगर त्रस्त है।
ऋतु नागर, जयपुर
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गुम हो गए परंपरागत जल स्रोत
शहरों में थोड़ी बारिश के बाद ही बाढ़ के हालात बन जाते हैं। दूसरी तरफ कई इलाके पानी को तरस रहे हैं। असल में शहरों मेें तालाब जैसे जल स्रोत अतिक्रमण की चपेट में आ गए हैं। इससे बारिश के पानी को एकत्र होने की जगह ही नहीं मिलती। नालों की भी कमी है। फिर जो नाले हैं, उनकी सफाई भी ठीक से नहीं होती। इससे पानी रास्ते में भर जाता है।
-रमेश कुमार, चाम्पा, छत्तीसगढ़
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नहीं होता वादों पर अमल
जरा सी बारिश भी शहरवासियों के लिए मुसीबत बन जाती है। शहरों में बाढ़ जैसे हालात पैदा हो जाते हैं। हर साल बारिश के दौरान शासन-प्रशासन लंबे चौड़े वादे करता है, लेकिन बरसात का मौसम बीतने के साथ ही सारी बातें भुला दी जाती हैं। अगर हम राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की बात करें, तो दिल्ली में बरसाती पानी, नालों की सफाई, ड्रेनेज सिस्टम, सीवरेज और बाढ़ नियंत्रण का दायित्व 17 सरकारी एजेंसियों के पास है। विडंबना यह है कि 1976 के बाद दिल्ली के ड्रेनेज सिस्टम की समीक्षा करके कोई रिपोर्ट ही तैयार नहीं की गई।
-शोभन पारीक, जोगलसर
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नहीं हो पाती पानी की निकासी
शहरों में बारिश होने पर पानी की उचित निकासी नहीं हो पाती है। इस वजह से आमजन प्रभावित होता है। आवागमन ठप हो जाता है। लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। पानी की उचित निकासी ना होने के कारण कई बार बाढ़ के हालात भी बन जाते हैं। इसलिए पानी की उचित निकासी अति आवश्यक है
-सुदेश बिश्नोई, श्रीगंगानगर
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गलती तरीके से बनी सड़कों का परिणाम
शहरों में नालियों की नियमित साफ -सफाई नहीं हो पाती। गलत तरीके से सड़कें बनी होने के कारण बारिश के पानी का बहाव नहीं होता, जिससे जल भराव की स्थिति निर्मित होती है। दुकानदार और आम नागरिक कचरा आम रास्ते या नाली में फेंक देते हैं। सफाईकर्मी भी सड़क पर रखे कचरे को झाड़ू लगाकर नाली में गिरा देते हैं, जिससे नालियां कचरे से भर जाती हैं। शहर के आस-पास फोरलेन रोड शहर की सड़कों से ऊंची होने के कारण जल भराव की स्थिति निर्मित होती है।
-आलोक ब्यौहार, सिहोरा, मध्यप्रदेश
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जमीन के भीतर नहीं जा पाता पानी
शहरों में बारिश काफी मुश्किल पैदा कर देती है। आजकल शहर कंक्रीट के जंगल बन गए हैं, जिससे बारिश का पानी जमीन सोख नहीं पाती और वही पानी निकास अवरुद्ध होने के कारण जहां से भी जगह मिलती है, तबाही मचाते हुए अपना रास्ता बनाता है ।
-विमल कुमार शर्मा, मानसरोवर, जयपुर
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सरकार की लापरवाही
जल ही जीवन है। राजस्थान जैसे शुष्क प्रदेश में बारिश के पानी से ही जनता की प्यास बुझती है। मुश्किल यह है कि बारिश आने पर शहरों की हालत खराब हो जाती है। इसका कारण सरकार की लापरवाही है। सरकार को पानी के निकासी के लिए उचित व्यवस्था करनी चाहिए, लेकिन इस ओर ध्यान ही नहीं जाता।
रितु शेखावत, जयपुर
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घनी आबादी बड़ी वजह
शहरों में कई स्थानों पर मकान बहुत ही पास-पास बने होते है। गालियां भी बहुत तंग होती है तथा जल निकासी के भी पुख्ता इंतजाम नहीं होते। इसलिए थोड़ी सी बारिश में ही शहर जलमग्न हो जाते हैं। यही कारण है कि शहरों के लिए बारिश आफत बन जाती है।
कुशल सिंह राठौड़, कुड़ी भगतासनी, जोधपुर
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पॉलीथिन ने बढ़ाई समस्या
शहरों में बारिश आफत इसलिए बन जाती है, क्योंकि यहां की सभी मकान पक्के होते हैं। यहां तक कि नालियां भी सीमेंटेड रहती हैं। इस वजह से बारिश का पानी जमीन के अंदर नहीं जा सकता है और वह पानी वहां पर मौजूद पॉलीथिन और दूसरा कचार बहा ले जाता है। पॉलीथिन नाले में इकट्ठा होकर पानी को निकलने में अवरोध पैदा करती है, जिससे शहरों में जलभराव होता है।
मुनिशंकर पटेल, सागर, मध्यप्रदेश
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नालों पर बन गई बस्तियां
शहरो में नाले कचरो से भरे पड़े हैं। हर जगह अतिक्रमण है। कई लोगों ने नाले को पाटकर आशियाने बना लिए हैं। पानी निकासी के लिए जगह ही नही है। ऐसी स्थिति में बारिश आफत ही बनेगी। निचले सतह पर पानी भर जाता है
राम नरेश गुप्ता, सोडाला, जयपुर
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जमीन में नही जा पाता बारिश का पानी
पानी की निकासी की व्यवस्था नहीं होने के कारण जलभराव की समस्या उत्पन्न हो जाती है। न केवल सड़कों पर, बल्कि घरों-दुकानों में भी पानी भर जाता हैं। कच्ची सतह होने पर बरसाती पानी भूमि में चला जाता है, लेकिन शहर तो कंक्रीट का जंगल बन गया है। बारिश का पानी जमीन में नहीं जा पाता और जलभराव की समस्या पैदा होती है।
-नेहा गौतम एसवाई माधोपुर
Updated on:
20 Aug 2020 05:19 pm
Published on:
20 Aug 2020 05:15 pm
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