
सुशासन के लिए नेताओं को संविधान का गहन अध्ययन करना चाहिए और अपने आचरण को भ्रष्टाचार मुक्त रखना चाहिए।
सर्वप्रथम, देश में व्याप्त भ्रष्टाचार पर कड़ी नकेल कसने के सकारात्मक प्रयास अत्यंत आवश्यक हैं। यह तभी संभव है जब राजनीतिक और प्रशासनिक इच्छाशक्ति में ईमानदारी झलके। पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए डिजिटलीकरण का उपयोग किया जा सकता है। भ्रष्टाचार में लिप्तता पर कठोर दंड का प्रावधान सुनिश्चित हो। अपराधियों और असामाजिक तत्वों को राजनेताओं और रसूखदारों का संरक्षण बंद होना चाहिए। न्यायपालिका को भी निष्पक्षता और ईमानदारी से अपने कर्तव्यों का पालन करना चाहिए।
सुशासन राष्ट्र को आदर्श बनाने के लिए सरकार और जनता के बीच विश्वास और सहयोग आवश्यक है। टिकाऊ मानव विकास, स्वस्थ लोकतंत्र और अवसरों की समानता जैसे पहलुओं पर जोर देना चाहिए। सरकार को ज्यादा पारदर्शी, जिम्मेदार और प्रभावी बनना होगा। सार्वजनिक सेवाओं को बेहतर करने और भ्रष्टाचार रोकने के लिए ठोस उपाय किए जाने चाहिए। मौजूदा भ्रष्टाचार विरोधी एजेंसियों को अधिक प्रभावी और सशक्त बनाना चाहिए।
सरकार को जनता की शिकायतों और समस्याओं का समाधान प्रभावी तरीके से करना चाहिए। ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से नागरिकों की शिकायतें सुनी जाएं। समय-समय पर योजनाबद्ध सर्वेक्षण करवाना और जनता और सरकार के संबंध मजबूत करना भी जरूरी है।
-जितेश कुमार शर्मा, दूदू
देश में सुशासन के लिए सभी सरकारी विभागों में तालमेल बनाकर जनता से जुड़ी समस्याओं का निवारण जल्द से जल्द करना चाहिए। सरकारी प्रक्रियाओं को भ्रष्टाचार मुक्त और निष्पक्ष बनाने की दिशा में ठोस प्रयास जरूरी हैं।
सरकार द्वारा बनाई गई नीतियों का सम्मान और जनता का सहयोग देश में सुशासन के लिए महत्वपूर्ण है। हर क्षेत्र जैसे चिकित्सा, शिक्षा, या राजनीति में जनता और सरकार के बीच बेहतर तालमेल होना चाहिए। युवाओं को भी राष्ट्र के विकास में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।
जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को अपने कर्तव्यों का निष्ठा और पारदर्शिता से पालन करना चाहिए। सरकारी तंत्र को सजग रहकर जनता की समस्याओं का समय पर समाधान करना चाहिए।
देश में सुशासन के लिए चुनाव प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाना होगा। चुनावों में धन के प्रयोग को समाप्त कर सोशल मीडिया और समाचार पत्रों के माध्यम से प्रचार की अनुमति होनी चाहिए।
सुशासन के लिए नेताओं को संविधान का गहन अध्ययन करना चाहिए और अपने आचरण को भ्रष्टाचार मुक्त रखना चाहिए। जनता का भरोसा जीतने के लिए कानून, न्याय और लोक कल्याणकारी प्रशासन का पालन जरूरी है।
-कृष्ण पाल मेघ, राजस्थान
संविधान में निहित कर्तव्यों पर नागरिकों का ध्यान नहीं है, लेकिन अधिकारों के लिए जबरन अशांति पूर्ण हड़तालें, धरने, प्रदर्शन, चक्काजाम, सरकारी सम्पत्ति की तोड़फोड़, झूठे आरोप, देश और तिरंगे का अपमान जैसे कृत्यों पर कठोरतम कानून का क्रियान्वयन और सजा होनी चाहिए। कट्टर साम्प्रदायिक नेताओं की भड़काऊ बयानबाजी पर रोक लगाने के लिए भी कठोरतम कानून लागू करना चाहिए। देश का प्रत्येक स्कूल, महाविद्यालय और विश्वविद्यालय सर्वधर्म और सर्वजाति के लिए होना चाहिए। आपातकाल के दौरान संविधान में किए गए असंवैधानिक संशोधन को हटाना चाहिए।
Updated on:
25 Dec 2024, 1:38 PM IST
Published on:
25 Dec 2024, 1:38 PM IST
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