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आपकी बात…किशोरों में अपराध की प्रवृत्ति क्यों बढ़ रही है ?

पाठकों की मिलीजुली प्रतिक्रियाएं मिलीं, पेश है चुनींदा प्रतिक्रियाएं…

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जयपुर

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VIKAS MATHUR

May 10, 2024

youth

परिवारों में उचित संवाद की कमी
परिवारों में किशोरों को उचित प्रोत्साहन एवं उनसे निरंतर संवाद की कमी होती जा रही है। किशोरों के दिनचर्या पर अभिभावक उदासीन रहते हैं। किशोरों की खराब संगत, हार्मोनिक बदलाव के कारण उनके आचार-व्यवहार में बदलाव पर परिवार के सदस्यों को संज्ञान न लेने के कारण वे पथ भ्रमित होते जा रहे हैं। सोशल मीडिया से किशोरों के मस्तिष्क में नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है जिससे अपराध की प्रवृत्ति बढ़ रही है।
— सतीश उपाध्याय, मनेंद्रगढ़ एमसीबी छत्तीसगढ़
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गरीबी व बेरोजगारी से आपराधिक कृत्यों को मिलता है बढ़ावा
गरीबी व बेरोजगारी है जो कि किशोरों को आपराधिक कृत्यों की ओर धकेलती है। सोशल मीडिया पर भी लक्जरी लाइफ स्टाइल वाले शॉर्ट वीडियो देखकर किशोरों में भी वैसी ही दिखने की चाहत होती है। इससे उनमें नकारात्मक विचार पनपते हैं। जल्द ही अमीर बनने व गर्लफ्रेंड या बॉयफ्रेंड रखने की चाहत में अनायास ही किशोर अपराध कर बैठते हैं।

  • अशोक गहलोत,जोधपुर…………………………………………

पारिवारिक उपेक्षा व गलत संगति से अपराध की ओर रुख
किशोरों में अपराध की प्रवृत्ति के मुख्य कारण हैं पारिवारिक उपेक्षा, गलत संगति, सामाजिक-आर्थिक दबाव, शिक्षा की कमी, और मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं। इन समस्याओं का समाधान खोजने के लिए समाज और सरकार को साथ मिलकर काम करना होगा
—अतुल सर्राफ, रीवा मध्यप्रदेश
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किशोरों को नहीं मिल पा रही परिवार व समाज से सही दिशा
दिशाहीन और संस्कार विहीनता की वजह से किशोरों में स्वच्छंदता पनप रही है। परिणामस्वरूप अपराध की दुनिया मे किशोरों के कदम तेजी से बढ़ रहे है। मोबाइल पर अनैतिक तरीके के अनेक वीडियो सुलभ हैं। अपराध करने के तरीके भी सोशल मीडिया पर आसानी से उपलब्ध हैं। अच्छा साहित्य, परिवार और समाज ही उन्हें इस भटकाव से रोक सकता है।
— पवन कुमार जैन, जयपुर
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समाज में बढ़ रहा असंतुलन
किशोरों में अपराध का बढ़ना समाज में असंतुलन की स्थिति पैदा करता है। अशिक्षा, रोजगार के अवसरों की कमी, गरीबी और बढ़ती बेरोजगारी से उपजी हताशा भी बढ़ते अपराधों की वजह बन रही है।
राजन गेदर, सूरतगढ़ ,गंगानगर
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बेरोजगारी व पारिवारिक संघर्ष से किशारों में हताशा
किशोरों में अपराध की बढ़ती प्रवृत्ति के पीछे बेरोजगारी, धन की कमी, परिवार के संघर्ष, बदलते परिवेश, सामाजिक कुप्रभाव,शिक्षा की कमी, परिवार के संबंधों की कमजोरी, विभिन्न तंत्रों का उपयोग, मनोवैज्ञानिक और आर्थिक कारण हैं। साथ ही मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं, नशे और पारिवारिक लापरवाही भी अपराध की प्रवृत्ति को बढ़ाती हैं। इंटरनेट और सोशल मीडिया भी किशोरों को अपराध के नए नए तरीके सुझा रहा है।
— संजय माकोड़े, बैतूल
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प्रेम में धोखा व पढाई में पिछडने से उपेक्षित किशोर
सामाजिक अलगाव, परिवार के सीमित आर्थिक संसाधन, व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाएं, सोशल मीडिया के दुष्प्रभाव, अंसतोष, प्रेम में धोखा, मेहनत के बावजूद पढाई मेें अच्छे अंक न ला पाना आदि कारण हैं जो किशोरों को अपराध की ओर धकेलती हैं।

  • प्रहलाद यादव,महू,मध्यप्रदेश…………………………………………………..

परिवार वालों का किशोरों के विचारों को नहीं समझ पाना
पारिवारिक सदस्यों की व्यस्तता के चलते किशोरों का मोबाइल पर अधिक समय बिताते हैं। किशोरों का मानना है कि ​परिवार वाले उनके विचारों का सम्मान नहीं करते। इससे वे अकेले व चिडचिड़े हो जाते हैं। उनके स्वभाव में भी उग्रता दिखती है। समाज से भी उन्हें सही—गलत की दिशा नहीं मिल पाती। इससे वे अपराध की ओर अग्रसर हो जाते हैं।

  • हरीश निमङ (राजगढ़, चूरू)………………………………………………..

आसानी से उपलब्ध सोशल मीडिया के दुष्प्रभाव
वर्तमान मे किशोरव के अपराध एक गंभीर चुनौती है। इसका सबसे बड़ा कारण इंटरनेट, मोबाइल फोन आदि है। इंटरनेट पर आसानी से उपलब्ध होने वाली अश्लील सामग्री, अनैतिकता, मद्यपान, धूम्रपान से भरे चलचित्र आदि बच्चों में आपराधिक मानसिकता को जन्म देती है, जिससे बच्चे अवसाद के शिकार होकर अपराधों में लिप्त हो रहे हैं।
— प्रकाश भगत, कुचामन सिटी, नागौर
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पाश्चात्य संस्कृति का प्रभाव
पाश्चात्य संस्कृति का प्रभाव, नशे की लत, एकल परिवार, भौतिक वृत्ति तथा माता-पिता का वर्किंग होना। माता-पिता अपने बच्चों को पर्याप्त समय नहीं दे पाते हैं। बच्चों को दादा - दादी, चाचा- चाची का साथ भी नहीं मिलता है। ऐसे में बच्चे वात्सल्य विहीन होकर, बुरी संगत में पड़कर अपराध की तरफ बढ़ जाते हैं। पाश्चात्य संस्कृति के प्रभाव से भौतिक विलासिता बढ़ती जा रही है, अपनी विविध कामनाओं की पूर्ति के लिए किशोर अपराध करने लगते हैं। किशोरों में बढ़ते अपराधों को रोकने के लिए बच्चों के लिए माता-पिता को समय निकालना होगा, समाज को नैतिक मूल्यों के लिए जागरूक करना होगा।
— आजाद पूरण सिंह राजावत, जयपुर