
मेहनत का फल जरूर मिलता है और इसका बड़ा उदाहरण इंग्लैंड की 29 वर्षीय साइक्लिस्ट अना मौरिस हैं, जिन्होंने डॉक्टर बनने के बाद ट्रैक पर उतरने का फैसला किया। हाल ही में आयोजित विश्व साइक्लिंग चैंपियनशिप में दो स्वर्ण पदक जीतने वाली अना मौरिस ने 20 साल की उम्र में फैसला किया कि वह साइक्लिस्ट बनेंगी। दरअसल, मौरिस को एथलीट बनने की प्रेरणा 2020 टोक्यो ओलंपिक खेलों से मिली। इसके बाद उन्होंने सिर्फ तीन साल की तैयारी के बाद खेलों की दुनिया में अपना नाम ऊंचा किया।
मौरिस ने कहा, मैं ग्लोस्टरशायर के एक अस्पताल में ट्रेनी डॉक्टर थी। वहां काम के दौरान मैं टोक्यो ओलंपिक गेम्स भी देखा करती थी। हालांकि मैंने कालेज के दिनों में साइकिल चलाई थी लेकिन ओलंपिक खेलों के बाद मैंने सोचा कि मुझे कुछ नया करना चाहिए। मेरे अंदर एथलीट बनने की भावनाएं जागृत हो गईं और फिर मैंने नई शुरुआत करने का फैसला कर लिया।
मौरिस स्कूल और कालेज टाइम में साइकिल चलाती थीं। ऐसे में जब उन्होंने ट्रेनिंग शुरू करने का फैसला किया, तो उन्हें ज्यादा परेशानी नहीं हुई। मौरिस ने 2021 में कार्डिफ में अपने घर के पास स्थित मैंडी वेलोड्रोम में ट्रेनिंग करना शुरू कर दिया। कड़ी मेहनत का जल्द ही उन्हें फायदा मिला और ट्रायल में जीत हासिल कर उन्होंने 2022 बर्मिंघम कामनवेल्थ खेलों की टीम में जगह बना ली। हालांकि वह यहां पदक नहीं जीत सकीं।
कॉमनवेल्थ खेलों का अनुभव मौरिस के बेहद काम आया। यूरोपियन चैंपियनशिप में पदक जीतने के बाद उन्हेंं देश की राष्ट्रीय साइक्लिंग फेडरेशन ने सालाना अनुबंध दिया। मौरिस ने कहा, इससे मुझे काफी सहारा मिला। मेरा लक्ष्य अब ओलंपिक खेल में भाग लेना और पदक जीतना था। मैंने इसके लिए कड़ी तैयारी शुरू कर दी थी। मैंने डॉक्टरी छोड़ दी और पूरा ध्यान सिर्फ तैयारी पर लगाया।
राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने के बाद आखिरकार मौरिस को पेरिस ओलंपिक खेलों के लिए राष्ट्रीय टीम में जगह मिल गई। उन्होंने ओलंपिक में शानदार प्रदर्शन किया और टीम स्पर्धा में कांस्य पदक जीता। मौरिस ने कहा, हमारी टीम ने जब कांस्य पदक जीता तो उसकी खुशी शब्दों में व्यक्त करना आसान नहीं था। तीन साल पहले मैं दूसरों को ओलंपिक पदक जीतते हुए देख रही थी और अब मैं खुद ओलंपिक पदक विजेता था। यह किसी सपने के सच होने जैसा था।
Published on:
27 Oct 2024 08:37 am
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