
बोलपुर। वो कहावत तो सुनी होगी जाको राखे साइयां मार सके न कोई, ऐसा ही कुछ पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले के बोलपुर क्रीड़ा केंद्र में हुआ। क्रीड़ा केंद्र में एक युवा तीरंदाज लड़की फजिला खातून गले के दाएं हिस्से में तीर लगने के बावजूद मात्र एक मिलीमीटर के अंतर से मौत के मुंह में जाने से बच गई। फजिला खातून नाम की 14 बर्षीय तीरंदाज को गले में धंसे तीर के साथ तत्काल एक निजी स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां से उसे फिर बोलपुर अस्पताल ले जाया गया। बोलपुर अस्पताल में सफल ऑपरेशन किया गया और वह खतरे से बाहर बताई जाती है।
अभ्यास के दौरान हुई घटना
इस लड़की के साथ यह घटना अभ्यास के दौरान हुई। बोलपुर क्रीड़ा केंद्र में तीन तीरंदाज अभ्यास कर रहे थे। तीरंदाज ज्वैल शेख ने अपना निशाना साधा, लेकिन तभी फजिला खातून अचानक बीच में आ गई और तीर उसकी गर्दन में लग गया। वह भाग्यशाली थी कि यह तीर उनकी सांस नली से होकर नहीं गुजरा, नहीं तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते थे। फजिला खातून अब खतरे से बहार है।
साई निदेशक ने दिए जांच के आदेश
ये घटना एक बार फिर भारतीय खेल प्राधिकरण की लापरवाही को दर्शाता है। इस घटना से अंदाज़ा लगाया जा सकता है की क्रीड़ा केंद्र में खिलाड़ियों की सुरक्षा को ले कर क्या प्रबंध है। साई के क्षेत्रीय निदेशक एमएस गोइंडी ने घटना की विस्तृत जांच के आदेश देते हुए कहा, निशाना लगाने को लेकर कडे़ निर्देश दिए गए हैं कि जब तीरंदाज तीर एकत्रित करने गया हो तब कोई निशाना नहीं लगाएगा। तीरंदाज के वापस अपनी जगह पर लौटने के बाद ही अगले दौर के निशाने लगाए जाएंगे। लेकिन मैं नहीं जानता कि यह कैसे हुआ? उन्होंने कहा कि आगे ऐसा नहीं होगा। गोइंडी ने कहा, सभी कोच इस घटना के जवाबदेह हैं मैं पूरी जांच करवाऊंगा कि क्या हमारी तरफ से कोई चूक हुई है। मैं यह सुनिश्चित करूंगा कि भविष्य में ऐसी कोई घटना ना हो।
Published on:
30 Oct 2017 10:42 pm
बड़ी खबरें
View Allअन्य खेल
खेल
ट्रेंडिंग
