
दलित होने के कारण हिमा को मिले मात्र 50 हजार, जानें सोशल मीडिया पर फैल रहे इस मैसेज की हकीकत
नई दिल्ली। असम की महिला धावक हिमा दास ने पिछले महीने अंडर-20 आईएएएफ चैम्पियनशिप में भारत के स्वर्ण पदक जीत इतिहास रचा था। हिमा ने राटिना स्टेडियम में 51.46 सेकेंड का समय निकालते हुए 400 मीटर दौड़ में जीत हासिल की थी। इसी के साथ वह इस चैम्पियनशिप में सभी आयु वर्गो में स्वर्ण जीतने वाली भारत की पहली महिला बन गई थी। ‘धींग एक्सप्रेस’ के नाम से मशहूर हिमा के जीतते ही उनके बारे में गूगल पर जो चीज़ सबसे पहले सर्च की गई, वह थी उनकी जाति और इस जाती के साथ शुरू हुआ अफवाहें फैलाने का सिलसिला।
जाती को ढाल बना कर सोशल मीडिया पर फैलाया जा रहा है झूठ
इन दिनों सोशल मीडिया पर तरह-तरह के झूट बड़ी ही आसानी से फैला दिए जाते हैं। ऐसा ही कुछ हिमा के साथ हुआ उनकी जाती को ढाल बनाकर सोशल मीडिया पर तस्वीर के जरिए एक झूठ फैलाया जा रहा है। इस तस्वीर पर लिखा था कि " भारत का नाम पूरी दुनिया में रोशन करने वाली हिमा दस को भारत सरकार सिर्फ 50,000 रूपए का इनाम दे रही है। कौन कहता है जातिवाद नहीं होता इस देश में, अगर कि जगह कोई स्वर्ण खिलाडी होती तो पांच करोड़ कि राशि और रहने को घर भी मिलता।" बता दें वायरल हो रही ये तस्वीर गलत है हिमा को सिर्फ 50 हज़ार नहीं बल्कि इस से कहीं ज्यादा इनाम राशि मिली है। दरअसल ओलंपिक्स में पदक की संख्या बढ़ाने के लिए मिनिस्ट्री ऑफ़ यूथ अफेयर्स ने TOPS (Target Olympics Podium Scheme) नाम की एक योजना शुरू की है जिसके तहत खिलाड़ी को सरकार की ओर से अंतरराष्ट्रीय स्तर की कोचिंग उपलब्ध कराई जाती है, साथ ही खेल से जुड़ा सामान खरीदने की सुविधा, पर्सनल ट्रेनर और अन्य सुविधाएं दी जाती हैं। इसी स्कीम के तहत हिमा को 50,000 रूपए प्रति महीना Out of Pocket Allowance (OPA) दिया जाएगा।
किसने दिया कितना पैसा
इतना ही नहीं हिमा को केंद्रीय सरकार के अलावा असम सरकार से लेकर कर्नाटक सरकार तक सभी ने इनाम दिया है। असम सरकार ने उन्हें 50 लाख रूपए देने की घोषणा की है साथ ही उन्हें असम का स्पोर्ट्स एंबेसडर भी बनाया जाएगा। इतना ही नहीं असम के पूर्व पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई और पूर्व मंत्री गौतम रॉय ने हिमा को 1-1 लाख रूपए देने की घोषणा की है। असम एथलेटिक्स एसोसिएशन और असम ओलंपिक एसोसिएशन ने भी हिमा को 2-2 लाख रूपए का इनाम देगा। कर्नाटक के उप-मुख्यमंत्री जी.परमेश्वर ने भी 10 लाख रूपए देने की घोषणा की है।
बहुत आसान है फेक न्यूज़ फैलाना
स्वर्ण पदक जीतने के बाद हिमा पर लगातार धन की बारिश हो रही है। लेकिन आज कल बहुत आसान हैं किसी भी बात को तोड़ मरोड़ कर सोशल मीडिया पर फैला देना कब सच्ची न्यूज़ अफ़वाज में तब्दील हो जाती है आप को पता भी नहीं लगता वाट्सऐप मैसेंजर और फेसबुक के ज़रिए ये फेक न्यूज़ तेजी से फ़ैल जाती है। आज भारत पोस्ट ट्रुथ वर्ल्ड में जी रहा है जहां आसानी से तथ्यों को तोड़मरोड़ कर पेश किया जाता है।
Published on:
24 Jul 2018 12:23 pm
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