
Chess Olympiad: पांच बार के पूर्व विश्व चैंपियन विश्वनाथन आनंद चेस ओलंपियाड में भारतीय पुरुष और महिला टीम के स्वर्ण पदक जीतने से बेहद खुश हैं। आनंद ने कहा कि यह उनके लिए बेहद भावुक पल है और ये भारतीय चेस इतिहास का सबसे सुनहरा पल भी है। आनंद का मानना है कि भारतीय महिला और पुरुष टीमों का चेस ओलंपियाड में स्वर्ण पदक जीतना कोई साधारण बात नहीं है, क्योंकि ऐसी चीजें हमेशा नहीं होतीं। खास बात यह है कि भारत ने पहली बार महिला और पुरुष वर्ग में स्वर्ण पदक जीता है।
आनंद ने कहा, यह वास्तव में एक अविश्वसनीय जीत है। यह लगातार दूसरा ओलंपियाड था, जिसमें हमारी महिला और पुरुष टीमें गोल्ड के लिए लड़ रही थीं। पिछली बार हम भले ही गोल्ड से चूक गए लेकिन इस बार दोनों ही सफल रहे। सच कहूं तो दोनों टीमों ने मेरी उम्मीदों से कही ज्यादा अच्छा प्रदर्शन किया है। खासतौर पर भारतीय पुरुष टीम ने जिस तरह से दबदबा कायम किया, वो अद्भुत था।
पिछली बार हम खिताब के करीब आकर चूक गए थे लेकिन इस बार हमने सोच लिया था कि पिछली गलतियों को दोहराना नहीं है। यह स्वर्ण पदक हम सभी के लिए बेहद मायने रखता है। मैं सभी का लक्ष्य व्यक्तिगत प्रदर्शन नहीं बल्कि एक टीम के तौर पर खेलना और स्वर्ण पदक जीतना था।- डी गुकेश, भारतीय खिलाड़ी।
भारतीय चेस आज जिस सुनहरे दौर में है, उसमें विश्वनाथन आनंद की अहम भूमिका रही है। आनंद ने 2021 में वेस्टब्रिज आनंद चेस एकेडमी की स्थापना की। इस एकेडमी के जरिए आनंद ने आर प्रग्गनानंदा उनकी बहन आर वैशाली, डी गुकेश, अर्जुन एरिगेसी, निहाल सरीन, रौनक साधवानी के अलावा कई युवा खिलाड़ियों को निखारा और विश्व स्तर पर पहचान दिलाई।
Published on:
24 Sept 2024 07:31 am
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