
नई दिल्ली। बड़ी कामयाबी का कोई शॉर्टकट नहीं है। गोल्फर अदिति अशोक इस बात को अच्छी तरह समझती हैं। तभी तो पढ़ाई के साथ-साथ गोल्फ खेलने का भी 12 साल का अनुभव शानदार रहा। वो भी तब, जब अदिति को गोल्फ विरासत में नहीं बस किस्मत से मिली है। गोल्फर के तौर पर पहला सीजन ओलंपिक में नेक्स्ट बिग थिंग का टैग लेने के बाद अदिति अशोक ने लगातार 4 टूर्नामेंट्स में टॉप 10 फिनिश दिए। अदिति इस साल की सबसे उदीयमान खिलाड़ी के रूप में 'रूकी प्लेयर ऑफ द ईयर अवॉर्ड जीतने की दौड़ में हैं। अपने पहले ही साल में अदिति की रैंकिंग 132 है और जिस तरह से वो खेल रही हैं, भारत के लिए गर्व की बात है।
गोल्फ रैंकिंग में टॉप 100 में शामिल
भारतीय गोल्फ खिलाड़ी अदिति अशोक को हाल ही में लेडीज यूरोपीय टूर की साल की उभरती हुई खिलाड़ी चुना गया है। इसके साथ वे गोल्फ रैंकिंग में टॉप 100 में पहुंचने वाली पहली भारतीय महिला बन गई हैं। एक साल के अंदर अदिति ने अपने खेल में बहुत ऊंचाई को छुआ है, जो कबिले तारीफ है। भारत को अदिति जैसे और खिलाडिय़ों की जरूरत है। रियो ओलंपिक में गोल्फ टूर्नामेंट के पहले दो दिन अदिति गोल्ड की रेस में थीं। दूसरे दिन तो एक बार पहले नंबर भी आ गई थीं। ओलंपिक में अदिति टॉप 10 फिनिश नहीं कर पाईं, लेकिन गोल्फ की दुनिया में भारत में ही नहीं, ग्लोबल गोल्फ के सीन में नेक्स्ट बिग नेम बन गईं।
2011 में खबरों में नाम आया
भारत में पहली बार अदिति सितंबर 2011 में खबरों में आईं। 13 वर्ष की उम्र में बैंगलोर इंडियन ओपन प्रो चैंपियनशिप में भारत की सबसे बड़ी गोल्फर सिम्मी मेहरा को हराकर इंडियन गोल्फ की दुनिया में तहलका-सा मचा दिया था। गोल्फ में आप सीधे बड़े टूर्नामेंट्स नहीं खेलते। इसके लिए क्वालिफाइंग टूर्नामेंट्स होते हैं, जिन्हें क्यू-स्कूल या क्वालिफाइंग स्कूल कहते हैं। 2016 में अदिति के प्रोफेशनल करियर की शुरुआत हुई। भारतीय गोल्फर अच्छा तो कर रहे थे, लेकिन जीत तक नहीं पहुंच पा रहे थे। इंडियन ओपन जीतकर अदिति अशोक ने न जीत सकने की मानसिक दीवार भी तोड़ दी।
हमेशा रहीं कम उम्र की खिलाड़ी
अदिति जब 9 साल की थीं, तब अपना पहला टूर्नामेंट जीत लिया और 12 साल की उम्र में टीम इंडिया के लिए खेलने लगीं। २०१६ रियो ओलंपिक में भी अदिति सबसे कम उम्र की खिलाड़ी थीं। 13 वर्ष की उम्र में बैंगलोर इंडियन ओपन प्रो-चैंपियनशिप में भारत की स्टार गोल्फर सिम्मी मेहरा को हराकर, अदिति पहली बार सितंबर 2011 में खबरों में आईं थी। उसके बाद सबसे कम उम्र में एशियन यूथ गेम्स, यूथ ओलंपिक और इंचॉन एशियन गेम में खेलने वाली खिलाड़ी बनीं। लेकिन प्रोफेशनल बनने के लिए उन्हें इंतजार करना पड़ा। 17 साल की अदिति अशोक ने सबसे कम उम्र में लेडीज यूरोपियन टूर लाला एइचा टूर स्कूल जीतीं। इस जीत के साथ वो क्वालिफाइंग स्कूल जीतने वाली पहली भारतीय गोल्फर बन गई। कुल मिलाकर अदिति ने जो भी कारनामा किया है, वो सबसे कम उम्र में किया है।
एलपीजीए क्वालीफाई करने वाली दूसरी भारतीय महिला
अदिति ने हमेशा से गोल्फ के सबसे बड़े गढ़ अमरीका में खेलने का सपना देखा था। उनका यह सपना पेशेवर करियर के पहले ही साल में अमरीका के लेडीज प्रोफेशनल गोल्फ एसोशिएशन (एलपीजीए) के लिए क्वालिफाई कर पूरा हुआ। अदिति ने क्वालिफाइंग टूर्नामेंट में 2 ओवर में 358 का स्कोर बनाया और 24वें स्थान पर रहीं। पहले 20 खिलाडिय़ों को एलपीजीए की फुल मेंबरशिप और 21 से 45वें स्थान पर रहने वाले खिलाडिय़ों को आंशिक मेंबरशिप दी जाती है। वे सिम्मी मेहरा के बाद एलपीजीए में क्वालिफाई करने वाली दूसरी भारतीय महिला हैं।
किताबें पढऩा और गाना सुनना है पसंद
अदिति बेंगलूरु के फ्रैंक एंथोनी पब्लिक स्कूल से 12वीं पास हैं। आगे की पढ़ाई जारी रखना चाहती हैं, लेकिन व्यस्तता के चलते समय नहीं निकाल पा रही हैं। वे किताबें भी बहुत पढ़ती हैं। उन्हें गाना सुनना पसंद है। अदिति का मानना है कि गाना सुनने से उनकी एकाग्रता बढ़ती है।
पांच साल की उम्र में शुरू सफर
एक दिन अदिति का परिवार बेंगलूरु के किसी होटल में खाना खाने गया था। खाने के बाद जब सब होटल से निकले, तब अदिति के पिता अशोक गुदलमणि की नजर होटल के ठीक सामने बने कर्नाटक गोल्फ एसोशियसन के बोर्ड पर पड़ी। डीटेल पढऩे के अशोक वहां पहुंचे, तो लोगों को शॉट लगाते हुए देख उनके मन में भी बेटी को खिलाने की इच्छा हुई। इसके बाद ही उन्होंने सिर्फ साढ़े 5 साल की उम्र में अपनी बेटी को गोल्फ क्लब गोल्फ की छड़ी पकड़ा दी।
अदिति के नाम की जर्सी पहनते हैं उनके पिता
अदिति के पिता बेटी के लिए कैडी का काम खुद करते हंै। कैडी अपने गोल्फर के नाम की जर्सी पहनता है। इसलिए अदिति के पापा अशोक भी हर मैच में बेटी के नाम की जर्सी पहनते हैं। इसको पहनकर उन्हें गर्व महसूस होता है। कहते हैं कि बहुत कम पेरेंटस को यह सौभाग्य मिलता है कि अपने बच्चों की वजह से पहचाने जाएं। अशोक ने बताया कि जब अदिति ओलंपिक खेलने के रियो पहुंचीं, तो उन्हें रोना आ गया था। बचपन में हम ओलंपिक जाने का सपना देखते हैं। अदिति मुझे यहां तक लेकर आई है। मुझे यह मौका देने के लिए मैं पूरी जिंदगी उसका कर्जदार रहूंगा।
Updated on:
17 Nov 2017 05:45 pm
Published on:
16 Nov 2017 11:32 pm
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