
हाल ही में पेरिस ओलंपिक खेलों में चीन ने बैडमिंटन में दो स्वर्ण और तीन रजत के साथ कुल पांच पदक जीते। आखिर चीन बैडमिंटन सहित अन्य खेलों में महाशक्ति कैसे बना? इसका बड़ा उदाहरण भारत की 13 वर्षीय शटलर तन्वी पात्री हैं, जिन्होंने हाल ही में एशिया अंडर-15 का खिताब जीता। ओडिशा की रहने वाली तन्वी ने फाइनल में वियतनाम की हुईन गुयेन को हराया और अपना पहला अंतरराष्ट्रीय खिताब जीता। खास यह है कि तन्वी की इस सफलता में चीन का भी अहम योगदान है।
तन्वी के पिता रविनारायन पात्री एक साफ्टवेयर कंपनी में काम करते हैं। कंपनी की तरफ से उन्हें 2015 में चीन जाने का मौका मिला। वह अपने परिवार को लेकर चीन के जियांग्सू प्रांत में रहने लगे। रविनारायन को भी बैडमिंटन खेलने का काफी शौक है और इसी कारण उन्होंने तन्वी को शटलर बनाने का फैसला किया।
तन्वी ने जियांग्सू में ही ट्रेनिंग करना शुरू कर दिया। रविनारायन ने बताया कि आखिर भारत और चीन में खिलाडिय़ों की जो ट्रेनिंग होती है, उसमें कितना बड़ा अंतर हैं।
1. शुरुआती छह महीने सिर्फ फुटवर्क और खेल की बारीकियों पर ध्यान दिया गया। बच्चे कड़ाई से अनुशासन का पालन करते हैं।
2. प्रतिदिन 200-300 सर्विस का अभ्यास करना पड़ता था क्योंकि इस खेल की शुरुआत ही यही से होती है।
3. चीन में युवा प्लेयर्स को स्मैश करना सिखाया जाता है, जिससे शरीर लचीला होता है और डिफेंस भी मजबूत होता है।
रविनारायन ने कहा, चीन में कोच तो खिलाड़ी पर ध्यान देते ही हैं, लेकिन साथ ही वह परिवार को भी बच्चों के साथ शामिल होने पर जोर देते हैं। इस कारण मुझे भी अपने अपार्टमेंट तन्वी के लिए नेट लगवाना पड़ा, जिससे वह घर में भी लगातार अभ्यास कर सके।
तन्वी के पिता ने कहा चीन में बच्चों के खेलने के लिए ओलंपिक स्तर के स्टेडियम की भरमार है। उन्होंने कहा, हमारे अपार्टमेंट के पास विशाल स्टेडियम था, जिसमें सिंथेटिक ट्रैक और फुटबॉल का मैदान था। यहां हर बच्चा खेल की ट्रेनिंग करता है और सभी सुविधाएं फ्री में मिलती है।
2020 में कोरोना महामारी के कारण तन्वी अपने परिवार के साथ वापस ओडिशा लौट आईं। वह अब बेंगलुरु स्थित प्रकाश पादुकोण एकेडमी में ट्रेनिंग कर रही हैं। तन्वी का लक्ष्य देश के लिए ओलंपिक खेलों में प्रतिनिधित्व करना और स्वर्ण पदक जीतना है।
Updated on:
28 Aug 2024 05:19 pm
Published on:
28 Aug 2024 10:41 am

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