विश्व महिला मुक्केबाजीः सातवें गोल्ड मेडल पर होंगी मैरी कॉम की नजरें

विश्व महिला मुक्केबाजीः सातवें गोल्ड मेडल पर होंगी मैरी कॉम की नजरें

Manoj Sharma Sports | Updated: 12 Oct 2019, 11:02:42 AM (IST) अन्य खेल

विश्व महिला मुक्केबाजी चैम्पियनशिप के सेमीफाइनल में पहुंच चुकी हैं मैरी कॉम

उलान उदे (रूस)। भारत की दिग्गज महिला मुक्केबाज एमसी मैरी कॉम विश्व महिला मुक्केबाजी चैम्पियनशिप में 51 किलोग्राम भारवर्ग के सेमीफाइनल में पहुंच गई हैं। शनिवार को होने वाले सेमीफाइनल में मैरी की नजरें इस टूर्नामेंट में अपने रिकार्ड सातवें स्वर्ण पर होंगी।

मैरी इस बार बदले हुए भारवर्ग में खेल रही हैं। 48 किलोग्राम भारवर्ग में उन्होंने विश्व चैम्पियनशिप में छह स्वर्ण अपने नाम किए हैं। अगर मैरी फाइनल में पहुंच जाती हैं तो वह इस चैम्पियनशिप में अपना दूसरा रजत पदक पक्का कर लेंगी।

मैरी ने विश्व चैम्पियनशिप में इकलौता रजत 48 किलोग्राम में जीता है। खास बात यह है कि 51 किलोग्राम भारवर्ग में मैरी ने ओलम्पिक में कांस्य और एशियाई खेलों में स्वर्ण और कांस्य पदक जीते हैं लेकिन विश्व चैम्पियनशिप में पदक उनके नाम नहीं था।

सेमीफाइनल में जगह बनाते ही उन्होंने विश्व चैम्पियनशिप में इस भारवर्ग में अपना पहला पदक पक्का कर लिया है। सेमीफाइनल में पहुंचते ही मैरी कॉम ने इतिहास रचा। वह महिला एवं पुरुष वर्ग में इस चैम्पियनशिप में कुल आठ पदक अपने नाम करने वाली पहली खिलाड़ी बन गईं। इस मामले में उन्होंने क्यूबा के फेलिक्स को पीछे किया, जिनके नाम विश्व चैम्पियनशिप में कुल सात पदक हैं।

सेमीफाइनल में मैरी का सामना यूरोपियन चैम्पियन तुर्की की बुसेनाज काकिरोग्लो से होगा। विश्व चैम्पियनशिप में मैरी ने अभी तक जितने भी फाइनल खेले हैं उनमें से सिर्फ एक बार ऐसा हुआ है, जब उन्हें शिक्सत खानी पड़ी हो। सिर्फ 2001 में फाइनल में उन्हें हार मिली थी।

इस चैम्पियनशिप में सिर्फ मैरी ही नहीं है। 69 किलोग्राम भारवर्ग में लवलिना बोरगोहेन, जमुना बोरो 54 किलोग्राम भारवर्ग और मंजू रानी 48 किलोग्राम भारवर्ग में सेमीफाइनल खेलेंगी। मंजू और जमुना पहली बार विश्व चैम्पियनशिप में खेल रही हैं। लवलिना ने पिछले साल विश्व चैम्पियनशिप में कांस्य जीता था।

48 किलोग्राम भारवर्ग में भारत का हमेशा दबदबा रहा है क्योंकि अभी तक यहां मैरी खेलती आई थीं। लेकिन इस बार मंजू ने उनसे बागडोर संभाल ली है और उम्मीद की जा सकती है कि वह मैरी के स्वर्ण की रक्षा करेंगी। सेमीफाइनल में उनका सामना थाईलैंड की छुटहामाट राक्सत से होगा।

असम की रहने वाली जमुना से भी उम्मीदें कम नहीं हैं। जमुना ने जिस तरह का प्रदर्शन किया उससे उम्मीद लगाई जा सकती है कि वह सेमीफाइनल में चीनी ताइपे की हुआंग सियाओ वेन की बाधा को पार करने में सफल रहेंगी। इंडिया ओपन और इंडोनेशिया में प्रेसिडेंट कप में स्वर्ण पदक जीतने वाली जमुना आत्मविश्वास से भरी लग रही हैं।

लवलिना निश्चित तौर पर अपने पदक का रंग बदलने उतरेंगी। पिछली बार कांस्य जीतने वाली लवलिना चीन की यांग लियू से सेमीफाइनल में दो-दो हाथ करेंगी।

भारत ने हालांकि विश्व चैम्पियनशिप में अपने पिछले साल के प्रदर्शन की बराबरी कर ली है लेकिन इन सभी मुक्केबाजों की कोशिश होगी की वह पदको के रंग को बदलने में सफल रहें।

भारतीय महिला मुक्केबाजी के परफॉर्मेस डायरेक्टर राफेल बेर्गामास्को ने कहा, "यह अच्छी बात है कि हमने अपने पिछले साल के स्कोर की बराबरी कर ली है, लेकिन हमारा लक्ष्य चार स्वर्ण पदक अपने नाम करना है। मैरी कॉम बाकी युवा लड़कियों के लिए प्ररेणास्त्रोत हैं। मुझे यह देखकर अच्छा लग रहा है कि बाकी की मुक्केबाज आगे बढ़ी हैं और स्वर्ण से कम कुछ नहीं चाहती हैं।"

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