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बड़ा फैसला: अब सिर्फ पदक जीतने के वास्तविक दावेदार एथलीटों को ही मिलेगा फंड

पेरिस ओलंपिक में एथलीटों के निराशाजनक प्रदर्शन के बाद खेल मंत्रालय उनके फंड में कटौती करने जा रहा है। एक बैठक में फैसला लिया गया है कि अब सिर्फ पदक जीतने के वास्तविक दावेदार एथलीटों को ही फंड मिलेगा।

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पेरिस ओलंपिक 2024 की तैयारियों के लिए केंद्र सरकार ने एथलीटों की ट्रेनिंग पर करीब 470 करोड़ रुपए खर्च कर दिए। इसके बावजूद भारतीय एथलीटों का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा। भारत ने पेरिस ओलंपिक में छह पदक जीते। इसमें एक रजत और पांच कांस्य पदक थे। इस निराशाजनक प्रदर्शन के बाद अब सरकार टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम (टॉप्स) के तहत एथलीटों को दी जाने वाली आर्थिक मदद में कटौती करने का विचार कर रही है।

बैठक में लिया गया फैसला

रिपोर्ट के तहत, हाल ही मिशन ओलंपिक सेल (MOC) की एक बैठक हुई, जिसमें पूर्व एथलीट, कोच, सरकारी अधिकारी और खेल प्रशासक मौजूद थे। इसमें यह प्रस्ताव रखा गया कि एथलीटों को दी जाने वाली आर्थिक मदद के लिए नए मापदंड बनाए जाएं और उनको ही मदद दी जाए, जो वास्तविक तौर पर पदक जीतने के दावेदार हैं।

300 से ज्यादा एथलीटों को मिलती है आर्थिक मदद

वर्तमान में करीब 300 से ज्यादा एथलीटों को टॉप्स स्कीम के तहत ट्रेनिंग करने के लिए आर्थिक मदद मिलती है। एमओसी की बैठक में शामिल एक अधिकारी ने कहा कि यदि नए चयन मापदंड अपनाए गए तो करीब आधे खिलाड़ी टॉप्स स्कीम से बाहर हो जाएंगे। हालांकि अभी हम कटौती नहीं कर रहे हैं लेकिन इस पर समीक्षा जरूर हो रही है।

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ओलंपिक के लिए अलग होंगे मापदंड

रिपोर्ट के मुताबिक, बैठक में एशियाई खेल और ओलंपिक के लिए अलग-अलग योजनाएं शुरू करने पर भी विचार किया गया। इसके तहत, कई एथलीट ऐसे हैं, जो एशियन और कॉमनवेल्थ खेलों में पदक के दावेदार होते हैं लेकिन उनका दावा ओलंपिक में बेहद कमजोर होता है। ऐसे में एमओसी को कई उप-समितियों में विभाजित किया गया है और प्रत्येक को मुख्य विषयों के लिए चयन नीतियां बनाने का काम सौंपा गया है।

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