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Patrika Interview: फाइटर बनने का जुनून था, इसलिए अंगद बिष्ट ने बीच में छोड़ी डॉक्टरी की पढ़ाई

Patrika Interview: भारत की मिक्सड मार्शल आर्ट्स फाइटर अंगद बिष्ट ने बताया कि इस फाइट के प्रति उनका जुनून ही है कि डॉक्टरी की पढ़ाई छोड़कर वह रिंग में उतर गए। उन्हें यूएफसी में जगह बनाने का पूरा भरोसा है।

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angad bisht

Patrika Interview: कुछ महीने पहले ही भारत की मिक्सड मार्शल आर्ट्स फाइटर पूजा तोमर ने यूएफसी में फाइट जीतकर इतिहास रच दिया था। वह यह फाइट जीतने वाली पहली भारतीय बनी थीं। अब उत्तराखंड के रहने वाले अंगद बिष्ट की नजरें यूएफसी की मुख्य फाइट में जगह बनाने पर हैं। वह शनिवार को क्वालीफाइंग फाइट लड़ने के लिए उतरेंगे। 'पत्रिका' संवाददाता सौरभ कुमार गुप्ता से खास बातचीत में अंगद ने बताया कि इस फाइट के प्रति उनका जुनून ही है कि डॉक्टरी की पढ़ाई छोड़कर वह रिंग में उतर गए। उन्हें यूएफसी में जगह बनाने का पूरा भरोसा है।

यूएफसी फाइटर बनने का विचार कैसे आया?

जब मैं 18 साल का था, तब उत्तराखंड में बैचलर ऑफ डेेंटल सर्जरी (बीडीएस) के लिए एंट्रेंस टेस्ट पास कर लिया था। लेकिन मेरे मन में कुछ अलग करने की योजना थी। पढ़ाई के दौरान ही मैंने देहरादून में जिम जाना शुरू किया। धीरे-धीरे मुझे इसमें मजा आने लगा और फिर मुझे यूएफसी के बारे में पता चला। मैंने सोच लिया कि यदि मेरी बॉडी बन जाती है तो फिर मैं फाइटर बनूंगा। इसके बाद, मैंने माता-पिता को बताया और ट्रेनिंग करने के लिए दिल्ली आ गया।

यूएफसी अभी भारत में बहुत लोकप्रिय नहीं है? ऐसे में क्या परेशानियां झेलनी पड़ी?

धीरे-धीरे यह फाइट भारत में अपनी पहचान बना रही है और इसका भविष्य भी उज्ज्वल है। जहां तक परेशानियों की है तो सुविधाओं की कमी का मुझे सामना करना पड़ा। मेरे पास कंडीशनिंग कोच होना चाहिए था लेकिन ऐसा नहीं था। देश में ऐसी एकेडमी होनी चाहिए, जहां बॉक्सिंग और कुश्ती की एकसाथ ट्रेनिंग होनी चाहिए और साथ ही अच्छे कोच होने चाहिए।

फाइट की तैयारी कैसे और कहां करते हैं?

भारत में ट्रेनिंग की अच्छी सुविधाएं नहीं हैं। इस कारण मैं थाइलैंड और इंडोनेशिया में ट्रेनिंग करता हूं। भारत में मैंने दिल्ली में अलग से बॉक्सिंग और कुश्ती के कोच की ट्रेनिंग ली। मैं देहरादून में भी ट्रेनिंग करता हूं क्योंकि यहां मैंने खुद की एकेडमी खोल ली है, जहां बाहर से कोच आते हैं, जो बॉक्सिंग के अलावा कुश्ती की भी ट्रेनिंग देते हैं।

क्वालीफाइंग मुकाबले को लेकर आपके ऊपर कितना दबाव है?

सच कहूं तो मैं किसी तरह के दबाव में नहीं हूं क्योंकि अब फाइट लड़ना मेरी जिंदगी का हिस्सा बन गया है। दबाव सिर्फ तब होता है, जब लोग सोशल मीडिया पर कहते हैं कि भाई तुम्हे हर हाल में जीतना है। इस कारण मैं सोशल मीडिया कम इस्तेमाल करता हूं। इसके अलावा, मैंने पिछले कुछ समय में काफी शानदार तरीके से ट्रेनिंग की है और मुझे लगता है कि मैं अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने के लिए तैयार हूं।

आपकी भविष्य की क्या योजना हैं?

मेरा सपना यूएफसी में जाना और अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करके अपनी पहचान बनाना है, क्योंकि यहां तक पहुंचने के लिए मैंने काफी संघर्ष किया है और काफी मुश्किलें झेली हैं।