
Aravind Chithambaram
Prague Masters: भारत की शतरंज में बादशाहत जारी रखते हुए ग्रैंडमास्टर अराविंद चितांबरम ने अपने करियर का पहला बड़ा खिताब जीता। उन्होंने प्रतिष्ठित प्राग मास्टर्स शतरंज टूर्नामेंट में कई दिग्गज खिलाड़ियों को पछाड़ते हुए पहला स्थान हासिल किया। तमिलनाडु के 25 वर्षीय अरविंद ने नौवें और अंतिम दौर में तुर्की के गुरेल एदिज के खिलाफ ड्रॉ खेलते हुए कुल छह अंकों के साथ खिताब अपने नाम किया। विश्व नंबर 8 आर प्रग्गनानंदा पांच अंकों के साथ संयुक्त रूप से दूसरे स्थान पर रहे। उन्हें अंतिम दौर में डच ग्रैंडमास्टर अनीश गिरि के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा। चीन के शीर्ष वरीयता प्राप्त खिलाड़ी वेई यी और गिरि भी प्रग्गनानंदा के साथ पांच अंकों पर रहे।
अराविंद तमिलनाडु के मदुरै के थिरुनगर के मूलनिवासी हैं। उनका बचपन बेहद मुश्किल भरा रहा, क्योंकि जब वह तीन साल के थे, तब उनके पिता का निधन हो गया था। इसके बाद उनकी मां ने इंश्योरेंस कंपनी कर उनका पालन पोषण किया। अराविंद को शतरंज खिलाड़ी बनाने का श्रेय उनके नाना को जाता है, हालांकि उन्हें क्रिकेट पसंद था। वह अक्सर बच्चों के साथ खेलने की जिद करते थे, लेकिन नाना चाहते थे कि वह घर पर ही रहें। उन्होंने महज सात साल की उम्र में चेस सिखाना शुरू किया।
जब वह मात्र 12 साल के थे तो उन्हें पहली बड़ी सफलता हासिल मिली। उस दौरान उन्होंने अंडर 19 शतरंज चैंपियनशिप जीती। 2012 में वह अंडर-14 विश्व चेस चैंपियनशिप में दूसरे स्थान पर रहे।
Published on:
09 Mar 2025 08:20 am

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