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पाकिस्तान सरकार का बड़ा फैसला, कहा- बंद होना चाहिए रेप पीड़िताओं का टू-फिंगर टेस्ट

HIGHLIGHTS इमरान सरकार ने कहा है कि बलात्कार पीड़ितों ( Rape Victims ) पर किए जाने वाला टू-फिंगर टेस्ट ( Two Finger Test ) को बंद कर देना चाहिए। पाकिस्तान के कानून मंत्रालय ने सिफारिश की है कि यौन उत्पीड़न के मामलों में टू-फिंगर टेस्ट किसी भी मेडिको-लीगल टेस्ट रिपोर्ट ( Medico Leagal Test Report ) का हिस्सा नहीं होना चाहिए।

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Two Finger Test

इस्लामाबाद। पाकिस्तानी मूल की फ्रांसीसी महिला के साथ लाहौर हाइवे पर हुए गैंगरेप ( Gangraped ) के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन का सिलसिला लगातार जारी है। कई महिला संगठन मुखर होकर अपना आवाज बुलंद कर रहे हैं।

लगातार हो रहे विरोध-प्रदर्शन के बाद अब इमरान सरकार रेप मामले में सख्त नजर आ रही है। दरअसल, महिला का रेप की पुष्टि के लिए टू-फिंगर टेस्ट की बात को अस्वीकार कर दिया है। इमरान सरकार ने कहा है कि बलात्कार पीड़ितों ( Rape Victims ) पर किए जाने वाला टू-फिंगर टेस्ट ( Two Finger Test ) को बंद कर देना चाहिए।

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पाकिस्तान के कानून मंत्रालय ने सिफारिश की है कि यौन उत्पीड़न के मामलों में टू-फिंगर टेस्ट किसी भी मेडिको-लीगल टेस्ट रिपोर्ट ( Medico Leagal Test Report ) का हिस्सा नहीं होना चाहिए।

लाहौर उच्च न्यायालय को किया जाएगा सूचित

कानून और न्याय मंत्रालय ने लाहौर के अतिरिक्त अटॉर्नी जनरल, चौधरी इश्तियाक अहमद खान को इस बारे में सूचित किया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, संघीय सरकार के रुख के बारे में लाहौर उच्च न्यायालय को सूचित किया जाएगा।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के एक बयान के बाद अदालत ने कानून मंत्रालय की प्रतिक्रिया मांगी है। WHO ने वर्जिनिटी टेस्ट को 'अवैज्ञानिक, चिकित्सकीय रूप से अनावश्यक और अविश्वसनीय' घोषित किया है।

टू-फिंगर टेस्ट के खिलाफ याचिका दायर

टू फिंगर टेस्ट के खिलाफ कोर्ट में दो जनहित याचिकाएं दायर की गई हैं। एक याचिका पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज नेशनल असेंबली के सदस्य ने दायर की है, जबकि दूसरी याचिका महिला अधिकार कार्यकर्ताओं, शिक्षाविदों, पत्रकारों और अधिवक्ताओं के एक समूह की ओर से दायर की गई है।

याचिकाकर्ताओं ने कहा है कि टू-फिंगर टेस्ट 'अपमानजनक, अमानवीय और महिलाओं के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है’। इन दो याचिकाओं में से एक पर पिछले महीने सुनवाई हुई। इसमें पंजाब स्पेशलाइज्ड हेल्थकेयर एंड मेडिकल एजुकेशन डिपार्टमेंट और प्राइमरी एंड सेकेंडरी हेल्थकेयर डिपार्टमेंट ने अपने सबमिशन में कोर्ट को बताया था कि TFT में कौमार्य का प्रत्यक्ष-अज्ञात मूल्य सीमित है।

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ये मेडिको-लीगल सर्टिफिकेट के प्रोटोकॉल पर प्रहार किया। इस मामले पर लाहौर उच्च न्यायालय से अगले महीने के पहले सप्ताह में सुनवाई फिर से शुरू होने की उम्मीद है। इस बीच, कानून मंत्रालय ने कहा है कि अदालत में इस मामले को रखा जाएगा।