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पर्युषण पर्व : अरावली की वादियों में स्थित है 1700 साल पुराना राता महावीर तीर्थ

-भगवान पार्श्वनाथ के 30वें पट्टधर आचार्य सिद्धिसुरि के हस्ते हुई थी प्रतिष्ठा

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पाली

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Suresh Hemnani

Sep 06, 2021

VIDEO : पर्युषण पर्व : अरावली की वादियों में स्थित है 1700 साल पुराना राता महावीर तीर्थ

VIDEO : पर्युषण पर्व : अरावली की वादियों में स्थित है 1700 साल पुराना राता महावीर तीर्थ

पाली/भाटून्द। राता महावीरजी के नाम से विख्यात प्राचीन तीर्थ हथुंडी का जैन तीर्थों में महत्वपूर्ण स्थान है। मुनि जिन विजय ने इसे राजस्थान के 556 जैन मंदिरों में सबसे प्राचीन माना है। इस मंदिर का उल्लेख मुनि ज्ञानसुंदर की ओर से रचित श्रीपार्श्वनाथ भगवान की परम्परा का इतिहास में है। उसके अनुसार भगवान महावीर के इस मंदिर का निर्माण विक्रम संवत 360 में वीरदेव श्रेष्ठी द्वारा भगवान पाŸवनाथ के 30वें पट्टधर आचार्य सिद्धसुरि द्वारा होना बताया गया है। इसके तहत यह मंदिर 1700 वर्ष पुराना है। विक्रम संवत 778 में आचार्य कंकूसूरि के उपदेश से हस्तिकुंडी में 27 मंदिरों का निर्माण कराया गया था।

ईंटों व चूने से बनी प्रतिमा
राता महावीर मंदिर में ईंट व चूने से भगवान महावीर की प्रतिमा का निर्माण किया गया था। भगवान महावीर की इस प्रतिमा का रंग लाल होने से इसे राता महावीरजी कहते हैं। भगवान की प्रतिमा में जो लांछन है, वह अलग विशेषता रखता है। इसके पीछे का आकार सिंह का व मुख हस्ति का है। यह गजसिंह का लांछन भगवान महावीर के लांछनसिंह व हस्तिकुण्डी में हाथियों की बहुतायत की ओर संकते करता है। सिंह के हाथी का मुख होने से इस नगरी को प्राचीन काल में हस्तिकुण्डी कहते थे, जो कालान्तर में हथुंडी हो गया।

1600 पणिहारियां भरती थी पानी
मंदिर वाले स्थान पर प्राचीन काल में बड़ा नगर था। इसके प्रमाण आज भी मिलत है। यहां के लिए आठ कुआं नव बावड़ी, सोलह सौ पणिहार...के 14वीं शताब्दी के उल्लेख के अनुसार इस जगह पर लगातार 1600 पणिहारियां पानी भरती थी।

24 देव कुलिकाएं है मंदिर में
विक्रम संवत 2001 में जीर्णोद्धारित राता महावीर मुख्य मंदिर में 24 देव कुलिकाएं है। मंदिर द्वार के दोनों तरफ 6-6 तथा अंदर की ओर से दांए-बाएं 6-6 देव कुलिकाएं है। मुख्य गर्भगृह में मूलनायक महावीर स्वामी भगवान की पद्मासनस्थ रक्त प्रवाल वर्ण की 135 सेमी की अत्यन्त प्रभावशाली प्रतिमा, सौध शिखरी चैत्य में प्रतिष्ठित है। इस पर लाल विलेपन चढ़ा हुआ है। परमात्मा की प्रतिमा के गले में दो आंटे की मोतियों की माला, हाथों पर बाजूबंद, पक पंजों के पास दोनों हाथों मेंं कड़े पहने हुए है।